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मकर संक्रांति : कांग्रेस ने खाया जदयू का दही-चूड़ा तो पकने लगी राजनीति की खिचड़ी

पांच साल बाद भाजपा और जदयू के नेता दही-चूड़ा के भोज में एक साथ शामिल हुए। नीतीश कुमार और सुशील मोदी तीनों जगह दिखे।

Danik Bhaskar | Jan 15, 2018, 05:48 AM IST

पटना. ...बस एक साल में ही मकर संक्रांति के भोज पूरा दृश्य बदल गया। पिछली बार महागठबंधन में भोज की धूम थी तो इस बार वहां सन्नाटा पसरा था। लालू प्रसाद के घर पर भी वीरानी थी। गेट बंद और बाहर कुछ सुरक्षाकर्मी। वहीं एनडीए में दही-चूड़ा की लजीज राजनीतिक दिखी तो महागठबंधन में सरकार जाने का दर्द। जदयू, भाजपा और लोजपा तीनों ने भोज का आयोजन किया और तीनों ही जगह सारे बड़े नेता पहुंचे। हालांकि, इस भोज से विपक्षी नेताओं ने दूरी बनाए रखी। कांग्रेस नेता अशोक चौधरी ने जदयू के भोज में शामिल होकर राज्य का सियासी तापमान बढ़ा दिया। भोज के बहाने जमकर राजनीतिक भी हुई।


इस भोज में बीते साल के भोज की भी चर्चा रही। उस भोज में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दही का टीका लगाकर ‘राजतिलक’ लगाने की घोषणा की थी। आज के बदले हालात में लालू-नीतीश अलग-अलग राह पर हैं। एनडीए के भोज से विपक्ष पूरी तरह गायब रहा। हालांकि, भोज में शामिल एनडीए नेताओं ने दलीय भेदभाव से इनकार किया। उन्होंने कहा कि भोज में सभी दलों के नेताओं को आमंत्रित किया गया था। विपक्षी पार्टी के कुछ वरीय नेता इसमें शामिल भी हुए।


राजनीति में पूर्ण विराम या शुरुआत नहीं होती

पांच साल बाद भाजपा और जदयू के नेता दही-चूड़ा के भोज में एक साथ शामिल हुए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी तीनों जगह दिखे। पांच माह पहले साथ मिलकर सरकार बनाने के बाद यह पहला अवसर था, जब पूरा गठबंधन साथ दिखा। एनडीए के शीर्ष नेताओं के बीच रिश्तों की गर्माहट भी दिखी। जदयू के भोज में पहुंचे अशोक चौधरी ने कहा कि राजनीति में कोई पूर्णविराम या शुरुआत नहीं होता है। वशिष्ठ नारायण सिंह के साथ उनका व्यक्तिगत संबंध था, इसलिए जदयू के भोज में शामिल होने आए। इसे लेकर किसी प्रकार का कयास नहीं लगाया जाना चाहिए। हालांकि, इसके बाद भी वहां मौजूद अतिथियों के बीच इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।

13 को कांग्रेस की बैठक में भी नहीं गए थे अशोक चौधरी


कांग्रेस के प्रभारी प्रदेश अध्यक्ष कौकब कादरी ने जदयू पर मौकापरस्त होने का आरोप लगाया और कहा कि जदयू ने चूड़ा-दही भोज में पार्टी के नेताओं को नहीं बुलाकर अपनी संर्कीण मानसिकता का परिचय दिया है। वहीं पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष्ज्ञ व पूर्व शिक्षामंत्री अशोक चौधरी के जदयू के भोज में शामिल होने के बाद यह कहा जाने लगा है कि भले ही नीतीश कुमार और उनकी पार्टी महागठबंधन से अलग हो गई है, पर अशोक चौधरी का प्रेम अब भी जदयू के लिए बना हुआ है। 13 जनवरी को कांग्रेस नेता सदानंद सिंह के आवास पर पार्टी नेताओं की बैठक में भी अशोक चौधरी नहीं पहुंचे थे।