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बिहार: 4 MLC ने कांग्रेस से नाता तोड़ नीतीश से हाथ मिलाया, RJD ने मांझी को राज्यसभा का दिया ऑफर

मांझी ने एनडीए का साथ छोड़ा तो अशोक चौधरी समेत 4 एमएलसी ने कांग्रेस से नाता तोड़कर नीतीश का हाथ थामा।

Bhaskar News | Last Modified - Mar 01, 2018, 09:12 AM IST

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    बुधवार सुबह जीतन राम मांझी के आवास पर मिलने पहुंचे तेजस्वी यादव।

    पटना. हिन्‍दुस्‍तानी आवाम मोर्चा (हम) के सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी बुधवार को एनडीए(नेशनल डेमोक्रैटिक अलायंस) का साथ छोड़कर महागठबंधन में शामिल हो गए। बुधवार की रात मांझी ने अपने सरकारी आवास पर महागठबंधन में शामिल होने का औपचारिक एलान किया। दूसरे दिन शाम 5 बजे कांग्रेस के अशोक चौधरी ने चार एमएलसी(मेंबर आॅफ लेजेस्टेटिव काउंसिल) समेत पार्टी से नाता तोड़ सभापति को इस बात की सूखना देने के साथ ही नीतीश का हाथ थाम लिया।वहीं, आरजेडी सूत्रों के मुताबिक मांझी को पार्टी की तरफ से राज्यसभा में भेजे जाने का ऑफर दिया गया है।

    चौधरी बोले- अब अपमान सहन नहीं हो रहा था

    - बिहार कांग्रेस में अरसे से जारी उठा-पटक बुधवार की रात अपने अंजाम पर पहुंच गई। बताया जाता है कि इसकी स्क्रिप्ट पहले से तय थी। शाम 5 बजे कांग्रेस एमएलसी अशोक चौधरी, तनवीर अख्तर, दिलीप चौधरी और रामचंद्र भारती ने सभापति को पत्र लिखकर जेडीयू में शामिल होने की जानकारी दे दी। सभापति से इसे मंजूरी भी दे दी।

    - रात साढ़े आठ बजे चौधरी ने पोलो रोड स्थित अपने घर पर प्रेस कांफ्रेंस में इसका एलान किया। चौधरी बोले- "अब अपमान सहन नहीं हो रहा था। उपचुनाव में पार्टी ने ऐसे-ऐसे स्टार प्रचारक बनाए जिनको पहले किसी ने देखा तक नहीं। मेरे जैसे समर्पित कार्यकर्ता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष को इलेक्शन कॉर्डिनेटर बना दिया।"

    कांग्रेस ने कहा- हमने चारों एमएलसी को पार्टी से निकाल दिया

    इधर, प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी बोले- हमने चारों एमएलसी को पार्टी से निकाल दिया है। इस बारे में पूछने पर अशोक चौधरी ने कहा, "कौकब कादरी अभी मैच्योर नहीं है। मैंने शाम 5 बजे ही सभापति को लिख कर दे दिया था। वे तीन घंटे तक क्या कर रहे थे? उन्हें अभी बहुत सीखने की जरूरत है। अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत। कांग्रेस के विधान परिषद में 6 एमएलसी थे। 4 जेडीयू में चले आए। दो-तिहाई संख्या 4 ही होती है। इसलिए इन लोगों पर दलबदल कानून लागू नहीं हो सकेगा।"

    मांझी को राज्यसभा का ऑफर दिया गया

    बुधवार महागठबंधन में शामिल होने के एलान के साथ ही जीतन राम बिहार के सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी पर खूब बरसे। उन्होंने पीएम नरेन्द्र मोदी को पवित्र बताया, लेकिन राज्य बीजेपी के नेताओं पर आश्रित रहने का आरोप लगाया। इधर मांझी के महागठबंधन में आने के साथ ही आरजेडी ने राज्यसभा-विधानपरिषद उम्मीदवार के सिलेक्शन के लिए पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद को अधिकृत कर दिया। बुधवार रात संसदीय बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया। आरजेडी सूत्रों की मानें तो ने मांझी को राज्यसभा का ऑफर दिया गया है, लेकिन मांझी अपने बेटे को एमएलसी बनाने को इच्छुक हैं। मांझी खुद भी केन्द्र की जगह राज्य की राजनीति करना चाहते हैं। हालांकि, मांझी ने कहा कि बेटा को एमएलसी बनने की शर्त पर नहीं, पार्टी को मजबूत करने के लिए महागठबंधन में आए हैं। 6 मार्च से उपचुनाव में महागठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में रैली करेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले एक हफ्ते में एक भी बीजेपी नेता से उनकी बात नहीं हुई है। इधर रालोसपा के सवाल पर तेजस्वी ने कहा कि फैसला उपेन्द्र कुशवाहा को लेना है।

    चौधरी ने कांग्रेस छोड़ने के ये कारण गिनाए

    - सीएलपी की बैठक में सदानंद सिंह ने मुझे अपमानित किया। मुझ पर आरोप लगाया कि भभुआ सीट को हराना चाहते हैं।

    - जेडीयू का ही भविष्य है। श्रीकृष्ण सिंह के बाद नीतीश कुमार के रूप में बिहार को सर्वश्रेष्ठ सीएम मिला है।

    - कांग्रेस महामंत्री सीपी जोशी ने एक व्यक्ति को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए साजिश रची है।

    - राहुल गांधी अच्छे इंसान हैं, लेकिन सीपी जोशी जैसे लोगों से घिरे हुए हैं। कांग्रेस में दलितों का अपमान होता है।

    उठा-पटक का राज्यसभा चुनाव पर भी होगा असर

    मांझी के महागठबंधन से जुड़ने से एनडीए को एक वोट का नुकसान हो गया है। चौधरी ने कांग्रेस से नाता तोड़ते समय दावा किया कि दल के अनेक विधायक उनके संपर्क में हैं और सही समय का इंतजार कर रहे हैं। क्या यह सही समय राज्यसभा चुनाव होगा? इस चुनाव में ह्विप जारी नहीं होता है। लिहाजा विधायक पार्टी के फैसले के खिलाफ वोट कर सकते हैं। कांग्रेस के विधायकों की संख्या 27 है। अगर चौधरी कांग्रेस के विधायकों से एनडीए के पक्ष में वोटिंग करा सके तो एनडीए को लाभ होगा

    मांझी ने एनडीए छोड़ने के ये कारण गिनाए

    - जहानाबाद सीट मांगी थी। वह नही मिली तो राज्यसभा या विधानपरिषद में सीट देने को कहा। पर नहीं सुनी गई।

    - शराबबंदी से 90 हजार लोग जेल में हैं। बालूबंदी से मजदूरों के बच्चेबिलबिला रहे हैं। लेकिन इसपर बात करने से नीतीश उपहास उड़ाते हैं।

    - विस चुनाव में बीजेपी ने हमें 21 सीट दी पर 16 सीट पर अपने लोगों को खड़ा करवा हमारे उम्मीदवारों को हरवाया।

    - एनडीए आरक्षण में कटौती की बात करता है। द्ववेदी भागलपुर दंगा में इंस्ट्रुमेंटल थे। डीजीपी क्यों बनाया?

    ढाई साल एनडीए के साथ रहे जीतनराम

    मांझी ने 8 मई 2015 को अपना नया दल हम (से) का गठन किया था। वो ढाई साल एनडीए गठबंधन में रहे। इसके पूर्व उन्होंने 20 फरवरी को जेडीयू छोड़ा था। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले 7 अगस्त को हम को सिंबल और मान्यता मिली। बिहार विधानसभा में उनकी पार्टी ने एनडीए गठबंधन में रहते हुए 21 सीटों पर चुनाव लड़ा पर एक सीट इमामगंज से खुद जीतन राम मांझी ही जीत सके। वो खुद अपनी परम्परागत सीट मखदुमपुर से हार गए थे।

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    रात साढ़े 8 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में तनवीर अख्तर, रामचंद्र भारती, अशोक चौधरी, दिलीप चौधरी
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