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बिहार के इस गांव से है विजय माल्या का कनेक्शन, कर्मचारियों का 4 करोड़ बकाया

यूबी डिस्टलरीज यूनियन के नेता बीडी तिवारी का कहना है कि शराब फैक्ट्री की हालत अब पूरी तरह से खस्ता हो गयी है।

Danik Bhaskar | Jan 17, 2018, 04:13 AM IST

गोपालगंज. यहां के यूबी डिस्टलरी के नाम से शराब फैक्ट्री में व्हिस्की, बोदका, रम, जीन और वैग पाइपर नाम से ब्रांडेड शराब बनती थी। फैक्ट्री का मालिक विजय माल्या आज लंदन में फरारी जीवन बिता रहे हैं। फैकटरी में 500 से ज्यादा कामगार कार्यरत थे। फैक्ट्री बंद होने के बाद कामगारों के वेतन और पीएफ की राशि फंस गई। वर्ष 2002 में फैक्टरी बंद हुई। उस समय कामगारों के पीएफ का 4 करोड़ रुपया फैक्ट्री के पास बकाया रह गया। कर्मचारी भुगतान के लिए दौड़ लगाते रहे लेकिन आज तक उन्हें निराशा ही हाथ लगी है। 16 साल की अवधि में 60 कामगारों की मौत भी हो चुकी है। फिलहाल 450 कामगार आज भी भुगतान के लिए चक्कर लगा रहे हैं।


चोरी हो गई शराब

सूबे की सरकार द्वारा शराबबंदी के बाद फैक्ट्री के गोदाम में रखे गए लगभग 10 करोड़ की शराब पर माफियाओं की नजर टिक गई। शराब फैक्टरी के गोदाम में रखी शराब गायब कर दी गई। इस मामले में थाने में भी शिकायत की गई है।

क्यों बंद हुआ कारखाना

यूबी डिस्टलरीज की यह इकाई वर्ष 2002 में बंद हुई थी। कारखाना पर वाणिज्य कर विभाग का करीब 55 करोड़ रुपया बकाया था। वाणिज्य कर की राशि जमा नहीं करने के कारण तत्कालीन डीएम ने फैक्टरी को सील कर दिया था। उस समय फैक्ट्री चालु हालत में थी। जिसमें लगभग 10 करोड़ से भी अधिक मूल्य की निर्मित शराब थी। फैक्ट्री बंद होने के बाद इसकी सुरक्षा में कमी आ गई। धीरे-धीरे इसमें से कीमती सामानों की चोरी होने लगी। आज फैक्ट्री पूरी तरह वीरान है।

बैंकों में पड़ी है राशि

फैक्टरी बंद होने के बाद जिले के कई बैंको में पीएफ की राशि पड़ी है। इस दौरान मजदूरों ने कई बार आंदोलन भी चलाया है। अब स्थिति है कि फैक्ट्री मालिक विजय माल्या भी सरकारी राशि के गबन में देश छोड़ चुका है। ऐसे में कामगारों की बुढी हडि्डयों में वह ताकत नहीं रही जो अपनी बुढ़ापे के लिए रखी फैक्ट्री की जमा रकम को निकाल सके। इनमें 185 रिटायर कर्मी शामिल हैं।

क्या कहते हैं यूनियन नेता

यूबी डिस्टलरीज यूनियन के नेता बीडी तिवारी का कहना है कि शराब फैक्ट्री की हालत अब पूरी तरह से खस्ता हो गयी है। खासकर काम कर रहे 450 कर्मियों की हालत बदतर है। आर्थिक तंगी के कारण कई कर्मियों की मौत भी हो गयी है। पीएफ राशि के लिए कर्मियों को आज भी भटकना पड़ रहा है। पीएफ राशि की भुगतान के लिए पीएफ कमिश्नर सहित कई आला अफसरों को पत्र लिखा गया है।