पटना

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सीएम ने कहा- IGIMS में 2500 बेड और एमबीबीएस की सीटें बढ़ाकर 250 हों

पीएमसीएच को विश्वस्तर का बनाया जाएगा। एनएमसीएच में भी 2500 बेड की सुविधा बहाल करने को कहा गया है।

Danik Bhaskar

Feb 13, 2018, 06:15 AM IST

पटना. नीतीश कुमार ने आईजीआईएमएस में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इसलिए यहां 2500 बेड की व्यवस्था होनी चाहिए। अभी प्राइवेट वार्ड और आईसीयू को लेकर करीब 760 बेड हैं। यह कम पड़ रहा है। एमबीबीएस की 100 सीटों को बढ़ाकर 250 की जानी चाहिए। पीएमसीएच को विश्वस्तर का बनाया जाएगा। एनएमसीएच में भी 2500 बेड की सुविधा बहाल करने को कहा गया है। पटना एम्स भी जल्द शुरू होने वाला है। इसलिए प्रतिस्पर्धा पटना एम्स से होनी चाहिए। बिहटा में ईएसआई अस्पताल को भी केंद्र ने राज्य सरकार को संचालित करने का जिम्मा दे दिया है। मुख्यमंत्री आईजीआईएमएस के स्थापना दिवस पर आयोजित चौथे दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।


उन्होंने कहा कि एक समय था जब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक महीने में सिर्फ 39 मरीज आते थे। आज उसी पीएचसी में हर महीने 10 हजार मरीज आ रहे हैं। अब किसी मेडिकल काॅलेज अस्पताल में बेड खाली नहीं रहता है। राज्य में और पांच मेडिकल काॅलेज खोलने का निर्णय लिया गया है। बेतिया और पावापुरी मेडिकल काॅलेज चालू हो गए हैं। मधेपुरा मेडिकल काॅलेज भी जल्द कार्यरत हो जाएगा। छपरा, पूर्णिया और समस्तीपुर में भी मेडिकल काॅलेज खोलने का निर्णय लिया गया है। नर्सिंग काॅलेज और पारा मेडिकल स्टाफ की ट्रेनिंग के लिए हर जिले में व्यवस्था हो रही है।

लिवर ट्रांसप्लांट जल्द शुरू हो


मुख्यमंत्री ने संस्थान के निदेशक डॉ. एनआर विश्वास के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि काफी काम हुआ है। लेकिन लिवर ट्रांसप्लांट शुरू करने में देर हो रही है। पैसा देने की मांग पर उन्होंने कहा-काम करते रहिए, पैसा मिलता रहेगा। एक बार पैसा लेकर क्या कीजिएगा। पैसा रखिएगा तो कहीं और चले जाने की आशंका रहेगी। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे प्राइवेट अस्पताल हैं वहां जब भी किसी को देखने जाता हूं वह वहां से लौटकर नहीं आता है। वहां किसी को देखने जाने में डर लगता है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए मरीज को मजबूरी में बाहर नहीं जाना पड़े।

पैसा लेकर नहीं जाइएगा

मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से कहा कि आप से एक विनती है। मरीज बीमार होकर आता है तो भगवान के बाद सिर्फ आप ही पर भरोसा करता है। इसलिए निष्ठा के साथ इलाज कीजिए। पैसा कितना भी कमाइएगा, लेकर तो नहीं जाइएगा। क्योंकि कफन में जेब नहीं होती है। भोजन में दाल-भात, रोटी, सब्जी ही खानी है। एक समय था जब चिकित्सकों के पास पैसा अधिक था और किडनैपिंग भी उन्हीं की होती थी।

दीक्षांत समारोह का ड्रेस बदलिए

मुख्यमंत्री को दीक्षांत समारोह वाला पोशाक पहनाया गया था। भाषण देने के दौरान उनकी टोपी बार-बार गिर जा रही थी। इसको लेकर ठहाके भी लगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ज्ञान की धरती है। आप लोग अंग्रेज के जमाने वाला रिवाज अभी कायम रखे हुए हैं। इसे बदलिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल काॅलेज के क्लास रूम में एसी की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए। छात्र एसी में रहकर पढ़ेंगे तो गांव-देहात में जाकर चिकित्सा करने में उन्हें परेशानी होगी। कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, निदेशक डॉ. एनआर विश्वास, डीन डॉ. एसके शाही, डॉ. संगीता पंकज, डॉ. सेतु सिन्हा ने भी संबोधित किया।

22 को पदक व 122 छात्र-छात्राओं को मिली उपाधि


एमबीबीएस की परीक्षा में बेहतर करने वाले छात्र-छात्राओं को मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कॉपी टेबल बुक का लोकार्पण भी किया और आईसीयू, एनआईसीयू और एडवांस कार्डियक सेंटर का निरीक्षण किया। समारोह में 22 छात्र-छात्राओं को पदक व प्रशस्ति पत्र और 122 छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान की गई।


इन्हें मिला गोल्ड मेडल..


- खुशबू रानी को चार गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। गया की खुशबू रानी के पिता केदार प्रसाद रजिस्ट्री आफिस कार्यरत हैं। खुशबू शिशु या स्त्री रोग विशेषज्ञ बनना चाहती हैं।
- स्वाति सुमन नवादा की रहने वाली हैं। पिता कृष्ण नंदन प्रसाद एलआईसी में कार्यरत हैं। स्वाति कहती हैं कि उन्होंने अपने दादा जी के सपनों को पूरा किया है।
- प्रीति कुमारी पटना के मीठापुर की रहने वाली हैं। इनके पिता प्रेम कुमार इंजीनियर हैं।
- मोनिका राज मधेपुरा की है। इनके पिता सत्यनारायण रजक आईजीआईएमएस में ही रेडियोग्राफर हैं।
- प्रतीक कुमार ने पीएसएम में बेहतर किया है। प्रतीत गया के रहने वाले हैं।

अस्पतालों में मुफ्त मिलेंगी 240 तरह की दवाएं: मोदी

सुशील मोदी ने कहा कि जरूरी दवाओं की सूची में कैंसर, किडनी और मधुमेह की दवाओं को भी रखा गया है। इसके साथ कुल 240 तरह की दवाएं मुफ्त में राज्य के मरीजों को दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में डॉक्टरों की कमी है। इसको देखते हुए जल्द आठ नए मेडिकल काॅलेज खोले जाएंगे। बेतिया और पावापुरी का मेडिकल काॅलेज कार्यरत हो गया है और मधेपुरा भी पांच महीने में शुरू हो जाएगा। बिहटा का ईएसआई अस्पताल भी जल्द कार्यरत हो जाएगा। उन्होंने कहा कि चिकित्सकीय व्यवस्था को ठीक करने के लिए पैसे की कमी नहीं होने दी जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि चिकित्सकीय सुविधा बढ़ जाने से मरीज अब पीएमसीएच से ज्यादा प्राथमिकता आईजीआईएमएस को देने लगे हैं। इस वजह से यहां भीड़ बढ़ गई है। उन्होंने बेडों की संख्या 500 से बढ़ाकर एक हजार करने के लिए के लिए मुख्यमंत्री से अपील की। उन्होंने कहा कि अस्पताल में रीजनल इंस्टीट्यूट आॅफ ऑप्थेलमोलॉजी की तर्ज पर ईएनटी विभाग को भी विकसित किया जाएगा। 111 करोड़ की लागत से आरआईओ को विकसित किया जा रहा है। ईएनटी को भी 200 बेड का अस्पताल बनाने की योजना है। संस्थान में अब रिसर्च की व्यवस्था भी होनी चाहिए। उस पर भी काम चल रहा है। मौके पर स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार, संस्थान के निदेशक डॉ. एनआर विश्वास, डीन, डॉ. एसके शाही, दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रंदीप गुलेरिया, डॉ. एसएन आर्या, आरएमआरआई के निदेशक डॉ. पीके दास, डॉ. एके लाल, डॉ. पीके सिन्हा, डॉ. मनीष मंडल आदि मौजूद थे।

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