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सात निश्चय योजना : मुखिया बोले- CO, BDO से DM तक को जाता है पैसा

एक मुखिया व ग्रामीण के बीच किसको कितना कमीशन तय है दोनों की बातचीत का वीडियो वायरल हो रहा है।

ओमप्रकाश सिंह | Last Modified - Dec 31, 2017, 05:08 AM IST

  • सात निश्चय योजना : मुखिया बोले- CO, BDO से DM तक को जाता है पैसा

    औरंगाबाद.सीएम नीतीश कुमार की महत्वकांक्षी सात निश्चय योजना में कमीशन का खेल खूब चल रहा है। लिहाजा मुखिया कमीशन को लेकर वार्ड समिति में पैसा नहीं ट्रांसफर कर रहे। एक मुखिया व ग्रामीण के बीच किसको कितना कमीशन तय है दोनों की बातचीत का वीडियो वायरल हो रहा है। इससे राजनीति महकमे से लेकर प्रशासन में भी हड़कंप मचा हुआ है। मामला कुटुंबा प्रखंड की डुमरा पंचायत का है।

    डुमरा पंचायत के मुखिया मनोज शर्मा तीन दिन पूर्व अपनी ही पंचायत के एक युवक से बातचीत के क्रम में कमीशन के इस खेल का खुलासा परत दर परत करते चले गए। उक्त युवक बारी-बारी सवाल करता चला गया, जिसका जवाब मुखिया भी देते रहे। कहा कि सिस्टम से काम करिएगा तो कोई दिक्कत नहीं होगी। बीडीओ, सीओ को पहले पैसा नहीं देते थे। सब काम फंसता था। अब दे रहे हैं तो धड़ा-धड़ हो रहा है। नीचे से ऊपर तक पैसा बंधा हुआ है।

    इधर, बारुण में भी सात निश्चत योजना में कमीशन को लेकर धमनी पंचायत के मुखिया उपेन्द्र सिंह द्वारा गांव के वार्ड सदस्य से उलझ गए। हालांकि इस मामले में अभी तक मामला दर्ज नहीं हुआ है। दैनिक भास्कर के पास महिला वार्ड सदस्य द्वारा मारपीट की बात वाला वीडियो मौजूद है। वार्ड सदस्य के अनुसार पंचायत के मुखिया सात निश्चय योजना का चेक जबरन लेकर खुद काम कराना चाहते थे।

    बोले मुखिया
    डुमरा पंचायत के मुखिया मनोज शर्मा ने बताया कि मुझे फंसाने की साजिश हो रही है। कुछ दिन पहले भी फंसाने का प्रयास किया गया था। जब उनसे पूछा गया कि बातचीत में किसकी आवाज व तस्वीर है तो चुप्पी साध गए।

    बोले बीडीओ
    कुटुंबा बीडीओ लोक प्रकाश ने बताया कि बोलने की आजादी है। मुखिया से संपर्क किया जा रहा है। वैसे सात निश्चय योजना का पैसा ट्रांसफर हो गया है, लेकिन पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।

    ग्रामीण और मुखिया की बातचीत के अंश

    ग्रामीण : आप जिद पर उतर गए कि मोबाइल पर बात नहीं करेंगे, हम आ गए
    मुखिया :
    धोखा खा गए हैं। मोबाइल पर बात करने में परेशानी है।
    ग्रामीण : सब वार्ड मान गए
    मुखिया :
    मानना ही पड़ेगा। मजबूरी है। सिस्टम में सिर्फ हम ही नहीं हैं। बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ा।
    ग्रामीण : दिक्कत क्या हुआ
    मुखिया :
    जब हम नया मुखिया बने तो लगा कि लेना-देना गलत है। सबका काम फ्री में करेंगे। छह माह तक भारी परेशानी झेलना पड़ी। ब्लॉक से लेकर जिला में सब अफसर के पास दौड़ गए। कहीं काम नहीं हुआ।
    ग्रामीण : ऊपर में भी नहीं
    मुखिया :
    यहां से लेकर मुख्यमंत्री तक राहत नहीं मिलेगी, क्योंकि सब जगह सिस्टम बंधा हुआ है।
    ग्रामीण : आज से नहीं चल रहा है न
    मुखिया :
    हमको डीपीआरओ बैठाकर समझाए हैं। बोले- बिना सिस्टम के चलने पर सौ काम मांगिएगा तो एक काम मिलेगा।
    ग्रामीण : कहां-कहां बोले
    मुखिया :
    ब्लॉक से लेकर हम पटना तक इस बात को उठा दिए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। सबको पैसा जाता है।
    ग्रामीण : सात निश्चय योजना में जेई पैसा लेता है, तो बीडीओ को पैसा देता होगा
    मुखिया :
    सबको पैसा बांधल रहता है। सीधे डीएम थोड़े न पैसा लेगा। बोलने पर वहीं बंधवा देगा। बोलेगा- आजा लूप लाइन में।
    ग्रामीण : कहां-कहां घूमे
    मुखिया :
    औरंगाबाद गए। डीपीआरओ, डीडीसी, यहां तक कि डीएम तक गए। डीडीसी ने बैठाकर बोले कि सही काम करिएगा तो पांच लाख के काम में घरे से 50 हजार लगेगा।
    ग्रामीण : सब पैसा लेता है
    मुखिया :
    कोई एेसा ठेकेदार, कोई ऐसा अफसर, कोई ऐसा थानेदार नहीं, जो पैसा नहीं देता। सबका बंधा है।
    ग्रामीण : ऊपर तक कैसे पहुंचता है पैसा
    मुखिया :
    पटना अगर पैसा भेजना है तो मुख्यमंत्री जिला को बोलता है। जिला, प्रखंड को और प्रखंड को पंचायत को बोलता है कि पैसा कैसे वसूलना है। ये आप पर है, लेकिन पैसा समय पर चाहिए। इसके बाद उस पैसे को ऊपर में भेजा जाता है।
    ग्रामीण : सिस्टम जरूरी है क्या
    मुखिया :
    बिल्कुल। सिस्टम से काम करिएगा तो कोई दिक्कत नहीं होगी। बीडीओ, सीओ को पहले पैसा नहीं देते थे। सब काम फंसता था। अब दे रहे हैं तो धड़ा-धड़ हो रहा है।
    ग्रामीण : वार्ड वाला सेट हो गया
    मुखिया :
    वार्ड वाला भी क्या किया। हम जो दिए, वही किया। सब अफसर के पास घूमा, लेकिन घूमने से क्या होगा। वहां भी सिस्टम समझा दिया गया।
    ग्रामीण : आपका कमीशन कितना है
    मुखिया :
    हम 25 प्रतिशत से कम कमीशन नहीं लेते हैं। इसी में सबको लेकर चलना है।
    ग्रामीण :अच्छा मुखिया जी, जब वार्ड आपको 25 प्रतिशत देगा तो 75 प्रतिशत में उसको क्या बचेगा
    मुखिया :
    उसको पांच प्रतिशत व सचिव को पांच प्रतिशत बचेगा।
    ग्रामीण : 65 प्रतिशत में काम होगा
    मुखिया :
    हां, हम 24 प्रतिशत में पूरा ऑफिस को संभाल लेंगे। ब्लॉक स्टाफ, जेई, बीडीओ, डीपीआरओ, डीडीसी सबको बंटेगा। इसके साथ बुधवारी जांच में भी संभाल लेंगे।
    ग्रामीण : पीसीसी में कितना कमीशन लेंगे
    मुखिया :
    40 प्रतिशत। 10 लाख रुपए देंगे तो उसका 40 प्रतिशत देना होगा। कमीशन तय होने पर तुरंत चेक दे देंगे।

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