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मौत के बाद लकड़ी खरीदने के लिए नहीं थे पैसे, चंदा कर किया अंतिम संस्कार

मृतक के परिजनों के पास शव को दाह संस्कार के लिए लकड़ी सहित अन्य सामान खरीदने का पैसा नहीं था।

Danik Bhaskar | Dec 09, 2017, 06:14 AM IST

सिंहेश्वर (मधेपुरा). सरकार ने सूबे में कोई भूखे नहीं मरे और सभी के पास एक छत हो रोज अलापते रहती है। डीएम की बैठक में भी यहीं निर्देश दिया जाता है कोई गरीब नहीं रहे। इंदिरा आवास, वृद्धा पेंशन, बीपीएल राशन कार्ड, कबीर अत्यष्टि आदि योजनाएं लाभुकों को मिल सके इसकी जांच भी अधिकारी करते है। वहीं सिंहेश्वर प्रखंड क्षेत्र के गौरीपुर पंचायत के वार्ड तीन में मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आयी है।

मृतक के परिजनों के पास शव को दाह संस्कार के लिए लकड़ी सहित अन्य सामान खरीदने का पैसा नहीं था। इस कारण शव 24 घंटे तक घर पर पड़ा रहा। परिजनों ने शव को दाह संस्कार के लिए पंचायत समिति सहित कई लोगों से पैसे भी मांगे लेकिन कोई तैयार नहीं हुआ। हालांकि जब मामले ने तूल पकड़ा तो सभी यही कर रहे हैं कि घटना की जानकारी नहीं थी। आसपास के कुछ लोगों ने सामाजिक स्तर पर चंदा इक्कठा कर शव दाह-संस्कार के लिए जरूरी सामान की खरीदारी की और शुक्रवार को 24 घंटे के बाद शव को दाह संस्कार किया गया।


युवा संघ के मिलन साह ने लकड़ी खरीदने के लिए 2100 रुपए दिये। मृतक के पुत्र कुंदन कुमार ने बताया वार्ड सदस्य के साथ पैसा के लिए भटकता रहा। पैसा नहीं होने के कारण गुरुवार को पिता के शव को नहीं जला पाये।
मुखिया ने जतायी खेद : यह बात सही है कि कबीर अंत्येष्टि योजना में राशि नहीं है। अबतक कभी ऐसा नहीं हुआ कि फंड की कमी के कारण किसी का शव का दाह संस्कार नहीं हुआ। इससे पूर्व भी फंड की परवाह किये बगैर खुद के पैसे देकर शव का दाह संस्कार कराया हूं।

अस्पताल ले जाने के दौरान गुरुवार को ही हो गई थी मौत


गोरीपुर वार्ड तीन निवासी मोहन मिस्त्री लंबे समय से बीमार चल रहे थे। घर की माली हालत पहले से ही ठीक नहीं थी। उपर से घर के अभिभावक की बीमारी ने परिवार को आर्थिक रूप से और कमजोर कर दिया। इसी बीच गुरुवार को लगभग 11 बजे मोहन की स्थिति और खराब .हो गयी। आनन-फानन में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिंहेश्वर ले जाया जा रहा था कि रास्ते में उसकी मौत हो गयी। शव दाह संस्कार के लिए ले जाने की बात आयी, तो घर में रुपए नहीं थे।

मामले की नहीं थी जानकारी


सिंहेश्वर के बीडीओ अजीत कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं थी। अगर जानकारी होती तो तत्काल रुपए की व्यवस्था करवा देता। जानकारी मिलने के बाद मुखिया द्वारा रुपए दिलाने को कह दिया गया है।