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ये है देश का पहला प्रोफेशनल महिला बैंड, पहले थीं दलित ; अब कमाती हैं 40 हजार

महिलाओं ने खुद के पैरों पर खड़े होने के लिए डेढ़ साल तक बैंड बजाना सीखा था।

Dainik Bhaskar

Mar 05, 2018, 02:12 AM IST
डेढ़ साल तक ड्रम बजाना सीखा था। डेढ़ साल तक ड्रम बजाना सीखा था।

दानापुर (पटना). बिहार की राजधानी पटना से सटे दानापुर में एक ग्रामीण बस्ती है ढिबरा। यहां की महादलित महिलाओं ने खुद के पैरों पर खड़े होने के लिए डेढ़ साल तक बैंड बजाना सीखा, रियाज किया और फिर खुद का ‘नारी गुंजन महिला सरगम बैंड’ बनाया। शुरुआत में लोगों ने इनका खूब मजाक उड़ाया पर सविता देवी के नेतृत्व में 10 महिलाओं की बैंड पार्टी ने उपहास को ताकत बनाने की ठानी। जानकारी के मुताबिक ये पूर्वी भारत का पहला प्रोफेशनल महिला बैंड है जिसमें सभी दलित महिलाएं हैं। अलग-अलग मौकों पर बैंड बजाने के लिए आगे आईं...

35 से 40 हजार तक कमा रहीं साल में

- बैंड पार्टी ने एक प्रदर्शन के लिए प्रति महिला 500 रुपए की दर तय की थी, पर मांग बढ़ती गई। - आज बैंड पार्टी की हर महिला को प्रति प्रस्तुति 1500 रुपए मिलते हैं।

- पूरे साल में एक महिला 35 से 40 हजार रुपए कमा रही है।

अब सभी महिलाएं कई इवेंट्स में ढ़ोल बजाने जाती हैं। अब सभी महिलाएं कई इवेंट्स में ढ़ोल बजाने जाती हैं।
महिला सरगम बैंड महिला सरगम बैंड
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डेढ़ साल तक ड्रम बजाना सीखा था।डेढ़ साल तक ड्रम बजाना सीखा था।
अब सभी महिलाएं कई इवेंट्स में ढ़ोल बजाने जाती हैं।अब सभी महिलाएं कई इवेंट्स में ढ़ोल बजाने जाती हैं।
महिला सरगम बैंडमहिला सरगम बैंड
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