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पिता की विरासत को संभालते हुए मंत्री पद तक पहुंचे, निर्विवाद रहा पॉलिटिकल करियर

उन्होंंने मां आमदी खानम के नाम पर पांच एकड़ 23 डिसमिल जमीन खरीदकर कॉलेज को दान कर दी।

Danik Bhaskar | Jan 06, 2018, 06:20 AM IST

सीतामढ़ी. पूर्व मंत्री और हम के सीनियर ली़डर हाजी मो. शाहिद अली खान के निधन से जिलावासियों ने एक कद्दावर नेता खो दिया है। अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए मंत्री पद तक पहुंचे शाहिद अली खान का संपूर्ण राजनीतिक जीवन स्वच्छ और निर्विवाद रहा। उनके पिता बदीउल जमा खान उर्फ बच्चा बाबू 1946 में हुए प्रथम विधानसभा चुनाव में सीतामढ़ी से जीतकर विधायक बने थे। वे पांच भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। वे अपने पीछे तीन पुत्रियां और पत्नी को छोड़ गए हैं। दो पुत्रियों की शिक्षा मेडिकल कॉलेज लखनऊ में चल रही है। वे मूलरूप से बैरगनिया प्रखंड के अख्ता निवासी थे। एसकेजे लॉ कॉलेज मुजफ्फरपुर से एलएलबी एवं बिहार विवि से बीबीए की डिग्री हासिल की थी।

1990 में पहले प्रयास में ही बने थे सबसे कम उम्र के विधायक

- शाहिद अली खान ने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र आंदोलन से की थी। 1990 में सीतामढ़ी विधानसभा सीट से जनता दल का टिकट मिला और निर्वाचित घोषित हुए। तब वे सबसे कम उम्र के विधायक बने थे।

- अगले चुनाव में वे भी जनता दल के टिकट पर सीतामढ़ी विधानसभा क्षेत्र से लड़े और विजयी हुए। पर, कोर्ट के आदेश पर हरिशंकर प्रसाद को विजयी घोषित किया गया।

- बाद में कराए गए उप चुनाव में सुनील कुमार पिंटू से वे पराजित हो गये। 2005 के फरवरी और नवंबर में जदयू के टिकट पर पुपरी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और जीते।

- 2010 में जदयू के टिकट पर सुरसंड विधानसभा क्षेत्र से से विजयी रहे। 2014 में शिवहर लोकसभा क्षेत्र से जदयू से चुनाव लड़े, लेकिन पराजित हुए।

- 2015 में सुरसंड विधानसभा क्षेत्र से हम से चुनाव लड़े पर पराजित हो गये। 2008 में नीतीश मंत्रीमंडल में अल्पसंख्यक कल्याण एवं साइंस टेक्नोलॉजी मंत्री बने।

- जीतन राम मांझी के मंत्रीमंडल में भी वे मंत्री बनाये गये। वे विज्ञान प्रावैधिकी, कानून, भवन निर्माण, लघु जल संसाधन व सूचना प्रावैधिकी मंत्री का पद भी संभाल चुके थे। साथ ही 1995 से 2000 तक लगातार वियाडा के चेयरमैन रहे।

मां के नाम पर पांच एकड़ 23 डिसमिल जमीन खरीदकर खोलवाया था पॉलीटेक्निकल कॉलेज

- पूर्व मंत्री शाहिद अली खाद जिले में उच्च शिक्षा के विकास को सदा सक्रिय रहे। जानीपुर में पॉलीटेक्निकल कॉलेज खोलने में जमीन बाधा आ रही थी।

- उन्होंंने पहल कर मां आमदी खानम के नाम पर पांच एकड़ 23 डिसमिल जमीन खरीदकर कॉलेज को दान कर दी। इसके बाद कॉलेज खुलने का रास्ता साफ हो सका।

- उन्होंने पुपरी में डिग्री कॉलेज के लिए भी प्रयास किया। इसके लिए पांच एकड़ जमीन की तलाश शुरू की गयी। पर, बछाड़पुर में तीन एकड़ जमीन ही मिल सकी।

- वहां बीएड कॉलेज की आधारशिला रखी गयी। अभी कॉलेज भवन का निर्माण जारी है।

उनकी ये उपलब्धि रहेगी याद

- डुमरा में इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण

- नानपुर के जानीपुर में पॉलिटेक्निक कॉलेज का निर्माण

- सुरसंड के मलाही में पॉलिटेक्निक कॉलेज का निर्माण

- बोखड़ा प्रखंड में सूबे का पहला मॉडल प्रखंड कार्यालय का निर्माण

- बछाड़पुर में बीएड डिग्री कॉलेज का निर्माण प्रस्तावित

- पुपरी में स्टेडियम का निर्माण प्रस्तावित

- खड़का में हाईस्कूल व जिले का पहला पंचायत सरकार भवन का निर्माण

- बोखड़ा में मॉडल प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र