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रिक्शा खींचकर बच्चों की परवरिश कर रहा स्वतंत्रता सेनानी का परिवार

आजादी में अपने जान की बाजी लगा दी आज उनका परिवार रिक्शा खींचकर अपने परिवार की परवरिश कर रहा है।

Dainik Bhaskar

Jan 26, 2018, 06:14 AM IST
Family of freedom fighter who lives by pulling rickshaw

मनिहारी. जिन्होंने देश की आजादी में अपने जान की बाजी लगा दी आज उनका परिवार रिक्शा खींचकर अपने परिवार की परवरिश कर रहा है। इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है। पूरा देश आज गणतंत्र दिवस मना रहा है प्रशासन की ओर से तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कुछ स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित भी किया जाएगा लेकिन लगता है कि कुछ खास अवसरों के बाद ऐसे लोगों के परिवारों की सुधि लेना सरकार व उनके नुमाइंदे भूल जाते हैं। इसी कड़ी में मनिहारी के एक स्वतंत्रता सेनानी का परिवार बदहाल जिंदगी जीने को विवश है। देश की आजादी के लिये 1942 के आंदोलन में घरबार छोड़कर अंग्रेजों के दांत खट्‌टे करने वाले और गांधी जी के आह्वान पर आजादी की अंतिम लड़ाई लड़ने वाले स्वतंत्रता सेनानी अनूप लाल पासवान का परिवार मनिहारी नगर पंचायत स्थित सिमुडीह वार्ड नंबर 15 में रहता है। अनूप लाल पासवान के चार पुत्र हैं। सबसे बड़ा पुत्र रामदेव पासवान जो बाहर मजदूरी करता है। उसके बाद दूसरे नंबर का पुत्र इंद्रजीत पासवान जो मनिहारी के गंगा तट पर गोताखोरी का काम कर अपना परिवार का भरण पोषण करता है। तीसरा पुत्र कुंवरजीत पासवान मनिहारी में रिक्शा चलाता है और चौथा पुत्र ऑटोरिक्शा चलाकर अपना परिवार का भरण पोषण किसी तरह से कर पाता है।

इंदिरा गांधी ने किया था सम्मानित
15 अगस्त 1972 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था। अब वही ताम्र पत्र इनके पुत्र और परिवार के लोग सहेजकर रखे हुए हैं। देश को आजादी दिलाने वाले जिस सिपाही ने अपना जान जोखिम में डालकर हिंदुस्तान को आजाद कराया था आज उसका सिपाही का परिवार दाने-दाने को मोहताज है। यह सरकार के साथ ही साथ व्यवस्था के मुंह पर भी करारा तमाचा है। आखिरकार इसके लिए दोषी कौन है और उन पर क्या कार्रवाई हुई समाज इसका हिसाब मांग रहा है। बेटियां पढ़ना चाहती हैं, लेकिन सरकार के द्वारा कोई सहायता नहीं मिलने से उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है। इनके आशियाने की हालात भी बद से बदतर अवस्था में पहुंच गई है। घर के छप्पर से लेकर निवाले तक की समस्या है। दो मुठ्ठी अनाज की खातिर पेट की भूख को खत्म करने के लिए आटा या दो मुठ्ठी सत्तू के आस में दिन गुजर जाता है। ताम्रपत्र इन परिवारों के लिए सिर्फ शोभा की वस्तु बनकर रह गया है। परिवार के लोग अपने सेनानी पिता की फाइलों को घर के आंगन में सिर्फ उलट फेर इसलिए करते रहते कि कहीं सरकार इन कागजों के आधार पर हमें कोई सरकारी लाभ पहुंचा दे। वहीं उसी वार्ड में एक और स्वतंत्रता सेनानी का परिवार है। स्वर्गीय चुन्नुलाल पासवान का है। उनके परिवार की भी हालत ठीक नहीं हैं।

सरकार को देनी चाहिए सहायता

मनिहारी के विधायक मनोहर प्रसाद सिंह कहते हैं कि अभी तक इस तरह की कोई भी जानकारी स्वतंत्रता सेनानी के परिवार के हालात के बारे में उनके सामने नहीं आई है। अगर ऐसी स्थिति है तो उन्हें हर संभव सहायता सरकार की ओर से मिलनी चाहिए। जिसने देश की आजादी में अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया उनके परिवार के समझ संकट नहीं आना चाहिए। इसके लिए सरकार कोई ठोस कदम उठाए।

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Family of freedom fighter who lives by pulling rickshaw
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