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कभी बंजर थी यहां की जमीन, अब सब्जी की खेती कर लाखों कमा रहे हैं किसान

Dainik Bhaskar

Feb 03, 2018, 06:44 AM IST

वैज्ञानिको की टीम ने 8 साल पहले गांवों की मिट्टी को लेकर जांच की फिर उसके बाद वैज्ञानिको ने कहा कि यह भूमि बंजर नही है।

Farmers earn millions of rupees by farming on barren land

बिक्रमगंज (बिहार). अब बाहर नौकरी ना करब अब त इहे के धरती सोना उगलता! रोजगार के अभाव में रोहतास बिक्रमगंज के बेरोजगार युवक जीविकोपार्जन के लिए अन्य प्रदेशों में पलायन करने वाले लोगो की जुबान से ऐसी बात सुन भले ही हैरत हो लेकिन है यह बिल्कुल सोलह आने सच भूख, गरीबी, पिछड़ापन, के दंश झेलने वाले धान के कटोरा से सुविख्यात आबादी के एक बड़ा हिस्सा किसानी और मजदूरी से अपना पेट भरता है।

नाकाम होने पर झरिया, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, सूरत, महराष्ट्र, गुजरात जाने को विवश हो जाते हैं। ऐसे में सुदूर गांव के खेत खलिहान से आवाज आए की “अब न तो बलम झरिया जाएंगे और न ही थरिया फेकेंगे” तो इससे सुखद क्या हो सकता है जी हां ऐसा हुआ है। वह भी पलायन के लिए मशहूर रोहतास जिले के बिक्रमगंज अनुमंडल क्षेत्र के कई प्रखंडो में जहां के किसान अब बंजर भूमि को अपने खून पसीना से सींचकर उक्त जमीन को पैदवार बना दिया।

कई एकड़ भूमि पर आलू की खेती

बिक्रमगंज प्रखंड के शिवपुर के किसान स्यंदन सुमन कहते हैं कि एक एकड़ जमीन मेरा ऐसा था जो बिल्कुल बंजर था कई दशक से इसी तरह बेकार झाड़ी लग गया था। इंदार्थ के भी कई किसानों ने अपनी बंजर भूमि पर अब खेती कर रहे है। इसी तरह. संझौली प्रखंड के रौनी गांव के किसानों ने कई एकड़ भूमि पर आलू की खेती कर लाखो रुपए कमा रहे है।

किसानों के पलायन पर लगा विराम

कृषि बैज्ञानिको ने बताया कि अनुमंडल क्षेत्र में बंजर भूमि नही है लोगो को जानकारी के अभाव के इतने दिनों से खेती नही होती होंगी। मिट्टी की जांच कर नई तकनीक से अच्छी फसल इस जमीन पर उगाई जा सकती है। कई दशक से उसर पड़ी रौनी गांव के लगभग 50 एकड़ और इंदार्थ के 80 एकड़ जमीन पर सब्जी के उत्पादन कर किसान अपना दशा बदल रहे है।

आठ साल पहले मिट्‌टी की जांच की गई थी

वैज्ञानिको की टीम ने 8 साल पहले इन गांवों की मिट्टी को लेकर जांच की फिर उसके बाद वैज्ञानिको ने कहा कि यह भूमि बंजर नही है सब्जी की खेती इस पर की जा सकती है तब गांववालों को सब्जी की खेती की नवीन तकनीक से रूबरू कराया गया गांव के उत्साहित किसानों ने भी बंजर भूमि पर उगी झाड़ियों की साफ सफाई कर सिंचाई के लिए बोरिंग की ब्यवस्था की। उसके बाद किसानो ने आलू की खेती शुरु कर दिया पहली ही फसल में किसान कामयाब हो गए आलू की फसल ने पूरे अनुमंडल क्षेत्र में रिकॉर्ड स्थापित कर दी। इंदार्थ के कमलनारायन मिश्र कहते हैं कि शुरुआत के दिनों में थोड़ी परेशानी हुई थी लेकिन अब सब कुछ ठीक ठाक चल रहा है बंजर भूमि से अच्छा उत्पादन हो रहा है। सब्जी उगाकर लोग खुशहाल है उनके बच्चे अंग्रेजी स्कूल में भी पढ़ने जाते हैं किसानों की मेहनत से गांव की सूरत ही बदल गई है।

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