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तंबाकू के नशे से तौबा कर फूल उगा रहे किसान, कारोबार कोलकाता तक

वर्ष 2016 में मुजफ्फरपुर जिले में 1321 एकड़ में तंबाकू की खेती होती थी।

Danik Bhaskar | Jan 22, 2018, 08:13 AM IST

मुजफ्फरपुर. तंबाकू की खेती से तौबा कर किसान अब फूल की खेती कर रहे हैं। इसके पीछे किसानों का तर्क है कि तंबाकू सेवन से हमारा समाज नशे का आदी होता जा रहा है। तंबाकू जितना मुनाफा तो फूल व मशरूम की खेती से हो जाएगा। इसलिए सकरा, मुशहरी, मड़वन, सरैया, बंदरा व औराई प्रखंड के किसान बड़े पैमाने पर फूलों की खेती से जुड़ गए हैं। वर्ष 2016 में मुजफ्फरपुर जिले में 1321 एकड़ में तंबाकू की खेती होती थी। अब यह घटकर 800 एकड़ से कम में कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में ही हो रही है।

फूलों की खेती से किसान बेहतर कमाई कर रहे हैं। समस्तीपुर व दरभंगा में भी फूल की आपूर्ति कर रहे हैं। यही नहीं, कोलकाता तक फूल का व्यापार कर रहे हैं। इसी का असर है कि सकरा प्रखंड का मुरा हरलोचन गांव अब फूलों की खेती के लिए प्रसिद्ध है। सकरा में 50 एकड़ व जिले में करीब 500 एकड़ में फूलों की खेती हो रही है।

आरएयू पूसा ने किया सम्मानित

सकरा प्रखंड के मुरा हरलोचन गांव के सुरेश प्रसाद ने बताया कि राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा के उद्यान विभागाध्यक्ष डॉ. एचपी मिश्रा से फूलों की खेती की प्रेरणा मिली। इसके बाद तंबाकू की खेती छोड़कर फूल उत्पादक बन गए। अब उनकी पत्नी सुमित्रा देवी, पुत्र वेद प्रकाश व सत्यानंद जिज्ञासू समेत दोनों बहू भी इसमें सहयोग करती हैं। आरएयू पूसा ने इन्हें बेहतर फूल उत्पादक का पुरस्कार भी दिया है।

पंतनगर कृषि विवि से लाए हैं विभिन्न प्रकार के गुलाब


सुरेश प्रसाद बताते हैं कि पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय से विभिन्न प्रकार के गुलाब लगाए हैं। साथ ही रजनीगंधा, गुलदाउदी व बेला फूलों की बेहतर किस्मों को एकत्र किया है। उनके पास चार रंग में गेंदा के फूल, चार रंग में गुलाब व सात रंग के गुलदाउदी के फूल तैयार हैं। रंग-बिरंगे फूलों के शौकीन भी हैं।

आत्मा के उप परियोजना निदेशक विनोद कुमार सिंह ने बताया कि जिले में तंबाकू का उत्पादन करने वाले किसानों को उसी के बराबर मुनाफा देने वाले मशरूम व फूलों की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। महिला सामाख्या की नुसरत-जहां व धनवर्षा सब्जी उत्पादक कृषक हितार्थ समूह कांटी के सचिव लाल बहादुर प्रसाद कुशवाहा इसके लिए पहल कर रहे हैं। इसके कारण तंबाकू उत्पादक क्षेत्र जहां घट रहा है, वहीं फूल का उत्पादन लगातार बढ़ता जा रहा है।