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प्राइवेट स्कूलों और कॉलेजों में जितनी सुविधाएं होंगी उसी हिसाब से अब फीस

शिक्षा विभाग इस नियमावली को कैबिनेट से पास कराएगी

पंकज कुमार सिंह | Last Modified - Jan 29, 2018, 04:41 AM IST

  • प्राइवेट स्कूलों और कॉलेजों में जितनी सुविधाएं होंगी उसी हिसाब से अब फीस

    पटना.राज्य सरकार निजी स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में फीस की अपर लिमिट तय करने में संबंधित संस्थानों में आधारभूत संरचना को ध्यान में रखेगी। फीस रेगुलेशन नियमावली बनाने के लिए शिक्षा विभाग की कमेटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर ली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सफाई, पेयजल, एयरकंडीशन बस, गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई देनेवाले स्कूल और कॉलेजों को अपेक्षाकृत अन्य निजी शिक्षण संस्थानों की तुलना में अधिक फीस लेने की स्वतंत्रता मिलेगी। हालांकि दूसरे राज्यों के तुलनात्मक अध्ययन के बाद अधिक फीस की अपर लिमिट तय की जाएगी। माना जा रहा है कि आगामी सत्र यानी अप्रैल से नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।

    इन मानकों पर फीस निर्धारण

    - निजी स्कूलों में आधारभूत संरचना क्या है?
    - स्कूलों में शिक्षक और कक्षा की क्या है स्थिति?
    - पेयजल, शौचालय, पर्यावरण की दृष्टि से विद्यालय परिसर की स्थिति क्या है?
    - बच्चों को स्कूल से लाने-ले जाने वाले वाहन की हालत और सुरक्षा व्यवस्था कैसी है?

    इन मुद्दों पर भी विचार

    - बच्चों से स्कूल किताब, कॉपी और पोशाक खरीदने के लिए मजबूर कर रहा क्या?
    - पटना सहित राज्य के अन्य जिलों में निजी स्कूल प्रति माह कितनी फीस ले रहे?

    गुजरात, तमिलनाडु, दिल्ली व चंडीगढ़ में लागू है यह कानून, इसके आधार पर बनाई रिपोर्ट

    कमेटी के सदस्यों ने गुजरात, तमिलनाडु, दिल्ली व चंडीगढ़ में बने निजी स्कूलों के फीस रेगुलेशन एक्ट का अध्ययन करने के बाद रिपोर्ट बनाई है। हालांकि इसे बिहार सरकार से मंजूरी मिलनी बाकी है। शिक्षा विभाग इस नियमावली को कैबिनेट से पास कराएगी। सरकार यदि इसे एक्ट का रूप देना चाहेगी, तो विधानमंडल से इसे पारित कराना होगा। स्कूल हर वर्ष कितनी फीस बढ़ा सकते हैं, रिपोर्ट में इसका भी जिक्र है। शिक्षा विभाग के अपर सचिव की अध्यक्षता में बनी कमेटी में प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा निदेशक, उप निदेशक व बीईपी के अफसर शामिल हैं।

    क्यों पड़ी जरूरत : सरकार का आदेश भी नहीं मानते निजी संस्थाएं


    सरकार ने बार-बार चेतावनी दी है कि निजी स्कूलों में कक्षा एक से 8 तक में 25 प्रतिशत सीटों पर दो लाख से कम आय वाले परिवार के बच्चों का नामांकन नहीं लिया तो कड़ी कार्रवाई होगी। इसके बावजूद निजी स्कूल ऐसा नहीं करते। जबकि केंद्र व राज्य के कानून के मुताबिक भी यह अनिवार्य है।

    हाईकोर्ट ने भी मांगा था सरकार से जवाब


    हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों-कॉलेजों में मनमानी फीस पर सरकार से जबाव मांगा था। सरकार ने कहा था कि अन्य राज्यों में फीस रेगुलेशन एक्ट पर विचार के बाद फीस तय होगी। कोर्ट के निर्देश पर कमेटी बनी थी।

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Web Title: Fee At Same Rates As Facilities In Private Schools And Colleges
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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