--Advertisement--

साल का पहला और सबसे बड़ा चंद्रग्रहण 31 को, आपकी राशि पर हो सकता है ये असर

शास्त्रों में वर्णित है कि ग्रहण के आरंभ में स्नान कर अपने इष्ट देव का स्मरण करने के साथ पूजा, जप, पाठ आदि करना चाहिए।

Danik Bhaskar | Jan 29, 2018, 05:38 AM IST

पटना. माघ शुक्ल पूर्णिमा बुधवार 31 जनवरी को पुष्य व अश्लेषा नक्षत्र और कर्क राशि में चंद्रग्रहण लगेगा। ग्रहण शाम 5.20 बजे से शुरू होगा और मोक्ष रात्रि 8.43 बजे के बाद होगा। वर्ष 2018 का यह पहला व सबसे बड़ा चंद्रग्रहण होगा। यह संपूर्ण भारत में दिखाई देगा।


ज्योर्तिवेद विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. राजनाथ झा के अनुसार इस ग्रहण का व्यापक असर मनुष्य, प्राणी, पर्यावरण, प्रकृति, जल, थल, नभ पर होने वाला है। मेष समेत कुछ अन्य राशि वाले जातकों के लिए इस ग्रहण का प्रभाव अच्छा नहीं रहेगा। वृषभ, कन्या, तुला और कुंभ राशि और कुंभ लग्न वालों के लिए ग्रहण का प्रभाव श्रेष्ठकारी रहेगा। जबकि मिथुन, मकर और मीन राशि वालों के लिए ग्रहण का प्रभाव मिलाजुला रहेगा।

राशि के अनुसार ग्रहण का असर

मेष राशि वालों को व्यथा व मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा। वृष राशि के जातकों को मान-सम्मान व धन की प्राप्ति होगी। मिथुन राशि वालों को आर्थिक क्षति व मन में उद्वेग, कर्क राशि के व्यक्तियों को विश्वासघात व मानहानि का खतरा, मीन राशि वालों को हानि व अप्रतिष्ठा, कन्या राशि के जातकों को लाभ का मार्ग प्रशस्त होगा, तुला राशि को सुख समृद्धिदायक, वृश्चिक राशि अपयश व अप्रतिष्ठा, धनु राशि को कष्ट व परेशानी, मकर राशि को स्त्री कष्ट व तनाव, कुंभ राशि वालों को सुख सुविधा में वृद्धि, मीन राशि वालों को चिंता व मन में उद्वेग रहेगा।

ग्रहण के दौरान इन बातों का रखें ख्याल

जिन राशियों पर ग्रहण का कुप्रभाव पड़ रहा है, उन राशि के व्यक्तियों को ग्रहण नहीं देखना चाहिए। जिन राशियों पर शुभ प्रभाव पड़ रहा है, वे ग्रहण देख सकते हैं। ग्रहण के समय भोजन, शयन, गाय दुहना, जमीन खोदना, लकड़ी काटना, हल चलाना, मल-मूत्र का त्याग करना वर्जित माना गया है। वृद्ध व बच्चों के लिए ये नियम लागू नहीं होता। रोगी एवं गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण नहीं देखना चाहिए। ग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्रियां चाकू, ब्लेड या धारदार वस्तु को हाथ न लगाएं और इनका इस्तेमाल नहीं करें।

पूजा, जप, पाठ

शास्त्रों में वर्णित है कि ग्रहण के आरंभ में स्नान कर अपने इष्ट देव का स्मरण करने के साथ पूजा, जप, पाठ आदि करना चाहिए। ग्रहण के मध्य में हवन करना चाहिए। ग्रहण के अंत में मोक्ष स्नान कर दान करना चाहिए। ऐसा करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।