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कुहासे में भटका स्टीमर, 16 घंटे तक फंसे रहे 100 लोग, सभी को ऐसे निकाला सुरक्षित

घटना ने 6 अगस्त 1988 की याद ताजा कर दी है जब मनिहारी-साहेबगंज स्टीमर बीच गंगा नदी में डूब गया था और 4 सौ लोग डूब गये थे।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 18, 2018, 07:26 AM IST

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    सुरक्षित निकाले जाने के बाद घाट के किनारे स्टीमर पर सवार यात्री।

    कटिहार.कुहासे के कारण साहिबगंज से मनिहारी आने वाली स्टीमर रास्ते से भटक गई। लगभग 100 यात्रियों को लिए स्टीमर चार बजे शाम में साहिबगंज से खुली थी लेकिन कुछ ही देर बाद अत्यधिक कुहासे के कारण स्टीमर चलाने वाला भटक गया। घंटों गंगा में इधर-उधर भटकने के बाद स्टीमर गाद में फंस गई। किसी तरह सूचना के बाद सरकारी नाव से 16 घंटे बाद यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया।

    - बताया जा रहा है कि गाद में स्टीमर के फंसने के बाद यात्रियों और नाविक ने रात वहीं गुजारने का फैसला किया। इस बीच दियारा से यात्रियों का मोबाइल से संपर्क नहीं हो पा रहा था।

    - घाट किनारे इंतजार कर रहे परिजन समय बढ़ने के साथ-साथ अधिक परेशान हो गए। यात्रियों ने सलामती के लिए सारी-सारी रात गंगा मैया से मन्नते करते रहे।

    - उधर, प्रशासन को इसकी भनक मंगलवार की रात को 9 बजे के आसपास लगी। प्रशासन सक्रिय हुआ और बुधवार को 8 बजे तक सभी यात्रियों को मनिहारी घाट पर पहुंचाया।
    स्टीमर में फंसे सचिन कुमार रजक ने बताया कि वे संबंधी के यहां से मनिहारी लौट रहे थे। जब रात में बीच गंगा में फंस गए तो उन्हें सिर्फ जान बचाने की चिंता सता रही थी। लगता था अब जान नहीं बचेगी। किसी पल मौत हो सकती है। कुछ नहीं दिख रहा था। हमारा फोन भी कहीं नहीं लग रहा था।

    सुबह की किरण के साथ लोगों को मिली राहत

    - बंगाल के नूक्सेद अंसारी कारोबार के सिलसिले में यहां आ रहे थे। उन्होंने बताया कि उन्हें यह भी पता नहीं था कि स्टीमर है कहां। जब सुबह की किरण निकली तब राहत मिली।

    - समस्तीपुर के कुछ व्यापारियों ने बताया कि सुरक्षित निकलने के बाद वे खुश हैं। वहीं पूर्णिया के गोपाल पोद्दार अपने नवविवाहित बेटी रिया और दामाद सुजीत को लेकर पूर्णिया जा रहे थे।

    - उधर, घाट पर उनके फैमिली मेंबर्स लेने पहुंचे थे। लेकिन घंटों इंतजार के बाद जब एक-दूसरे से मुलाकात हुई तो वे खुश दिखे।

    मना करने के बाद भी नाविक ने नाव खोली

    - कटिहार के मुखिया राम चन्द्र मिस्त्री अपनी पत्नी और बच्चों के साथ समधी के यहां मकर संक्रांति में झारखंड गये हुए थे। 4 बजे शाम को वापसी के क्रम में जहाज में फंस गये थे।

    - उन्होंने बताया कि मौसम खराब थी इसे बावजूद नाविक ने जहाज को खोल दी। कई लोगों ने मना भी किया लेकिन नाविक ने किसी की नहीं सुनी।

    - करीब 16 घंटा के बाद हमलोग मनिहारी प्रशासन द्वारा मुहैया कराई गई मोटर-चालित नाव से मनिहारी पहुंचे। विदित हो की मंगलवार की रात को करीब 9 बजे जहाज पर सवार एक फौजी परिवार ने इस संबंध में प्रशासन के आलाधिकारी को जानकारी दी। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया।

    1988 में 400 लोगों की हो इसी घाट पर हो गयी थी मौत

    - यह स्टीमर बच्चा सिंह का बताया जा रहा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस घटना ने 6 अगस्त 1988 की याद ताजा कर दी है जब मनिहारी-साहेबगंज स्टीमर बीच गंगा नदी में डूब गया था और 4 सौ लोग डूब गये थे।

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    स्टीमर पर कुल 100 लोग सवार बताए जा रहे हैं।
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