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यहां डंप कचरे को जलाने से हवा में फॉस्जीन गैस, 10 मिनट में दिखता है ये असर

फॉस्जीन गैस इतनी खतरनाक है कि इस गैस की मौजूदगी से आसपास के क्षेत्रों में ऑक्सीजन की मात्रा 75% तक कम हो रही है।

Danik Bhaskar | Dec 20, 2017, 06:07 AM IST

भागलपुर. भागलपुर के चंपानगर में फैल रही है फॉस्जीन गैस। यह गैस निकल रही है चंपानगर में नगर निगम द्वारा डंप किए जा रहे कूड़े से। अगर आप इस सड़क से निकलते हैं तो सतर्क हो जाएं। हो सकता है कि आपके शरीर की स्वस्थ कोशिकाएं कैंसर कोशिकाओं में बदल रही हों। यानी आप कैंसर के मरीज हो रहे हों। इस गैस को दुनिया के पांच सबसे खतरनाक केमिकल हथियारों में रखा गया है। हर दिन यहां पूरे शहर से 240 मीट्रिक टन कचरा फेंका जा रहा है। फॉस्जीन गैस इतनी खतरनाक है कि इस गैस की मौजूदगी से आसपास के क्षेत्रों में ऑक्सीजन की मात्रा 75% तक कम हो रही है। नतीजा, पेड़ सूख रहे हैं। छोटे जीव-जंतु मर रहे हैं।


दैनिक भास्कर की टीम ने तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के पीजी बायोटेक्नोलॉजी विभाग की रिसर्च टीम के साथ चंपानाला पुल और टीएनबी कॉलेज के सामने डाले गए कूड़े का अध्ययन किया। टीम ने कूड़ा, मिट्टी और हवा का सैंपल लेकर लैब में इसकी जांच की। जलस्रोतों पर भी इसका दुष्प्रभाव दिख रहा है। आसपास के कुओं के पानी में यह बैक्टीरिया मिला है। इस पानी को पीने से दांतों में छेद, पायरिया व आंत से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं।

फॉस्जीन गैस के एक्सपोजर का असर

10 मिनट में: इस इलाके में दस मिनट खड़े रहने से फेफड़े में फॉस्फोरस और कार्बन जमने लगती है। ये खून में घुलकर लाल दाने व जलन उत्पन्न करती है।
एक घंटे में: खून में घुलकर दिमाग पर विपरीत असर डालती है। एक घंटा गैस शरीर में जाए तो लोग बेहोश या पक्षाघात का शिकार हो सकते हैं।
रोजाना : डंपिंग क्षेत्र से होकर रोजाना गुजरने वाले एक यात्री पर दमा व कैंसर जैसी बीमारी की आशंका बढ़ जाती है। फॉस्जीन के मॉलिक्यूल जीव जंतु के स्वस्थ सेल को कैंसर सेल में बदल देता है।

भास्कर नॉलेज: सड़ा हुआ कचरा जलाना और ज्यादा खतरनाक

भागलपुर टीएमबीयू के बायोटेक्नालॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी प्रोफेसर एचके चौरसिया ने बताया कि सड़ा कचरा जलाने के बाद की स्थिति और खतरनाक होती है। साथ जल रहे कई रासायनिक पदार्थों से हवा के साथ मिट्टी व भूमिगत जल भी जहरीले हो रहे हैं। सैंपल में फॉस्जीन गैस और एसिड मिल रहा है। भागलपुर के आस पास फॉस्जीन गैस फैला है। कूड़ा डंपिंग से एक साल तक गैस रिसाव होता है।

गैस चैंबर में कोई बंद हो तो 15-20 सेकंड में मौत
टीएमबीयू केमेस्ट्री डिपार्टमेंट के पूर्व एचओडी प्रोफेसर ज्योतिंद्र चौधरी ने बताया कि फॉस्जीन गैस के चैंबर में किसी व्यक्ति को बंद कर दें तो उसकी 15-20 सेकेंड में मौत हो जाएगी। एक घंटे के एक्सपोजर से आदमी बेहोश हो सकता है। कूड़े के जलने से निकलने वाली कार्सोजेनिक गैस कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं में बदल देती है।

यहां हवा ही नहीं, पानी में भी जहर

नाथनगर के चंपानाला पुल के पास दो किलोमीटर के दायरे में नगर निगम एनएच 80 के किनारे कूड़ा फेंक रहा है। इस कूड़े के जलने से हवा में खतरनाक फॉस्जीन गैस फैल रही है और जमीन में केमिकल रिस रहे हैं। ये भूजल व हवा में जहर घोल रहे हैं।


इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के सदस्यों की टीम ने दैनिक भास्कर के साथ मौके पर जाकर जांच की तो पता चला कि कूड़ा डंपिंग क्षेत्र से लगे कुएं और चापाकल के पानी में जहरीला कार्बनिक एसिड घुला है। टीम पास के मिर्जापुर गांव पहुंची। वहां के चापाकल व कुएं के पानी के सैंपल लिये। लैब टेस्टिंग में उनमें से अधिकतर के पानी दूषित निकले। कूड़ा डंपिंग क्षेत्र के पास के कुएं के पानी से तो दुर्गंध आ रही है। तीन डॉक्टरों की टीम ने पांच घंटे तक गांव के लोगों की जांच की तो पता चला कि प्रदूषित पानी और हवा से मिर्जापुर के ग्रामीणों के लीवर पर बुरा असर पड़ रहा है। उन्हें टिटनस होने का भी खतरा है। डॉक्टरों ने ग्रामीणों की जीभ, आंख, नाखून, पेट के आकार और त्वचा की जांच की। टीम ने कहा कि यहां का जीवन सामान्य नहीं है। यहां के ग्रामीण गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। यहां अविलंब ही कोई सार्थक पहल करनी चाहिए, नहीं तो अभी के जो हालात हैं इससे यहां आगे बड़े खतरे के संकेत मिल रहे हैं। जिला प्रशासन और नगर निगम जल्द से जल्द डंपिंग ग्राउंड के लिए जमीन खोजे ताकि इस इलाके को कूड़े के डंपिंग से निजात मिल सके।

नियंत्रित नहीं होने पर बढ़ जाएगा जहर

टीम ने बताया मिर्जापुर का भूगर्भ जल फॉस्जीन, मिथेन और लेड प्वॉयजनिंग मिलने के कारण एसिड में बदल रहा है। कूड़ा डंपिंग के निकट कुएं में कार्बनिक एसिड 5% तक पाया है। हालांकि चापाकल में इसकी मात्रा कम है। पानी की जांच के बाद डॉक्टरों ने कहा कि जैसे-जैसे कूड़ा डंपिंग बढ़ता जाएगा। पानी में जहर की मात्रा बढ़ती चली जाएगी।

सामान्य को कैंसर सेल में बदलता है कार्बनिक एसिड

गांव के मंटू पासवान, सूरज कुमार, कलावती देवी, मायावती कुमारी, उदयकांत की जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि कुछ लोगों में लीवर डिसऑर्डर के संकेत मिले हैं। कार्बनिक एसिड शरीर के टिश्यू को क्षतिग्रस्त कर इसे कैंसर सेल में बदल देता है। यह केमिकल हैजार्ड से होता है। बीते छह माह में लोग टायफाइड और डायरिया के शिकार भी हुए हैं। टीम से ग्रामीणों ने पेट में गड़बड़ी की भी शिकायत की।

खुले पांव घूमने वाले लोगों को टिटनेस होने का खतरा

टीम ने बताया कि मिर्जापुर गांव के मुहाने पर कूड़ा डंप किया गया है। वहां कई ग्रामीण बिना चप्पल के दिखे। इससे कचरे पर फैले मेडिकल निडिल, कांच, कांटी, नुकीले लोहे व जंग लगे लोहे के चदरे से घायल होने का खतरा है। इससे टिटनस भी हो सकता है। बच्चे भी बिना चप्पल के वहां खेल रहे थे। इन बच्चों को कभी भी टिटनेस की सुई नहीं लगी है। ये भी इस बीमारी के शिकार हो सकते हैं।

मवेशी के लिए चंपानाला नदी से ला रहे पानी

मिर्जापुर के लोगों ने बताया कि कुएं व चापाकल के पानी से दुर्गंध आता है। वे 20 रुपए में मिलने वाले पानी का जार खरीद कर पीते हैं। मवेशी के लिए चंपानदी से पानी लाते हैं। पीएचइडी ने इस गांव के भूजल को पहले ही फ्लोराइड और आर्सेनिक प्रभावित घोषित कर दिया है। इस गांव में अधिकतर लोग नवगछिया अनुमंडल के कटाव पीड़ित हैं। इनका पेशा मजदूरी और पशुपालन है। गांव के गिरीश मंडल, रामदेव कुमार का कहना है कि गांव में पानी के सप्लाई के लिए एनएच 80 पर पाइप बिछाने का काम पूरा हो गया है। लेकिन अभी कनेक्शन नहीं मिला है। गांव में करीब 60 घर हैं, जिनमें 250 लोग रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि कूड़ा और नाथनगर की ओर से आ रहे डाई कलर के कारण चंपानाला नदी भी प्रदूषित हो रही है।

इन एक्सपर्ट ने की जांच- आईएमए के पूर्व सचिव डॉ. अजय कुमार सिंह, डॉ. राजीव लाल, हेल्थ वीक के सचिव डॉ. सत्येंद्र कुमार, बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के प्राध्यापक डाॅ. डीके दास।



कूड़ा डंपिंग के निकट कुएं में कार्बनिक एसिड 5% तक पाया है। हालांकि चापाकल में इसकी मात्रा कम है। कूड़ा डंपिंग के निकट कुएं में कार्बनिक एसिड 5% तक पाया है। हालांकि चापाकल में इसकी मात्रा कम है।
दैनिक भास्कर की टीम के साथ आईएमए के पूर्व सचिव डॉ. अजय कुमार सिंह, डॉ. राजीव लाल व हेल्थ वीक के सचिव डॉ. सत्येंद्र कुमार। दैनिक भास्कर की टीम के साथ आईएमए के पूर्व सचिव डॉ. अजय कुमार सिंह, डॉ. राजीव लाल व हेल्थ वीक के सचिव डॉ. सत्येंद्र कुमार।
टीएमबीयू के बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के प्राध्यापक डाॅ. डीके दास के साथ रिसर्च करने वालों की टीम ने इन इलाकों की गहराई से पड़ताल की। टीएमबीयू के बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के प्राध्यापक डाॅ. डीके दास के साथ रिसर्च करने वालों की टीम ने इन इलाकों की गहराई से पड़ताल की।