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सुकमा नक्सली हमले में शहीद का अंतिम संस्कार, फैमिली ने लौटाया 5 लाख रुपए का चेक

हजारों की संख्या में नौजवान, किशोर, बुजुर्गों ने छलकती आंखों से शहीद अजय को विदा किया।

Bhaskar News| Last Modified - Mar 15, 2018, 03:58 AM IST

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funeral of martyr Ajay Yadav
पति को अंतिम विदाई देते हुए पत्नी सुप्रिया बार-बार यही दोहरा रही थीं कि हे भगवान! मैंने ऐसा क्या गुनाह किया था कि मुझे इतनी बड़ी सजा मिली। अब मेरे बच्चों को कौन देखेगा।

जमालपुर (मुंगेर).  छत्तसीगढ़ में शहीद जमालपुर के लाल अजय यादव का पार्थिव शरीर बुधवार को सिकंदरपुर नयागांव पहुंचा। फूलों से सजे वाहन पर तिरंगा में लिपटे शहीद के पहुंचते ही ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, अजय तेरा नाम रहेगा’ के गगनभेदी नारों से पूरा इलाका गूंजने लगा। पति का शव देखते ही पत्नी सुप्रिया बेसुध हो गई। लाल दरवाजा स्थित श्मशान घाट में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। मासूम बेटे ओम ने मुखाग्नि दी। उधर, डीएम ने पांच लाख रुपए का चेक शहीद के परिजनों को दिया जिसे परिजनों ने अपमान बता लौटा दिया।

 

जैसे ही ताबूत खुला...सुप्रिया ने अंतिम बार शहीद पति का चेहरा निहारा और बिलखते हुए तोड़ दी कलाई की चूड़ियां

 

‘कर चले हम फिदा जानों तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों’ की इस अमर पंक्तियों को छत्तीसगढ़ के सुकमा में शहीद होने वाले नयागांव सिकंदरपुर के लाल अजय कुमार यादव ने चरितार्थ कर दिया। बुधवार को सिकंदरपुर नया गांव ही नहीं बल्कि पूरे जमालपुर से हजारों की संख्या में नौजवान, किशोर, बुजुर्गों ने छलकती आंखों से शहीद अजय को विदा किया। इस बीच भारत माता की जय, जब तक सूरज चांद रहेगा, अजय तेरा नाम रहेगा के नारे गूंजते रहे। वैसे तो जमालपुर वासियों में देशभक्ति का जज्बा कूट-कूट कर भरा है, यहां के सैकड़ों युवा देश सेवा के लिए सेना व सीआरपीएफ में कार्यरत हैं, लेकिन शहीद अजय यादव की शहादत पर ऐसा जज्बा दिखेगा अकल्पनीय था। शहादत पर जमालपुरवासियों का यह सम्मान वर्षों तक याद किया जाता रहेगा।


हवा में लहरा रहा था तिरंगा फिज़ां में गूंज रहे थे नारे 


सुबह 11 बजे नयागांव सिकंदरपुर गांव में कई युवकों के हाथों में तिरंगा लहरा रहा था। युवाओं की टोली शहीद के पार्थिव शरीर के इंतजार में खड़ी थी। युवक भारत माता की जय, जब तक सूरज चांद रहेगा, अजय यादव के नाम के जयकारे लगा रहे थे।  

 

सन्नाटे को तोड़ दे रहा था पत्नी का रोना

 

जब ईस्टकाॅलोनी थाना क्षेत्र के नयागांव सिकंदरपुर स्थित पैतृक घर पर अजय के शहीद होने की खबर आई तो माहौल गमगीन हो गया था। लोग रातभर जागकर शहीद के पार्थिव शरीर आने का इंतजार कर रहे थे। बुधवार को गांव के घरों की छत पर महिलाएं सड़कों पर युवा व बुजुर्ग इंतजार में खड़े थे। चारों ओर मातमी सन्नाटा पसरा था। इस बीच रह रह कर शहीद अजय यादव की पत्नी सुप्रिया भारती की चीत्कार सन्नाटे को तोड़ रही थी। बुधवार की दोपहर 2.40 बजे जैसे ही शहीद की पार्थिव देह सिकंदरपुर मुहल्ला पहुंचा पत्नी के रूदन से वहां मौजूद सभी महिलाएं की आंखें नम हो गई। 

 

पिता बोले- पता नहीं था बेटे को आखिरी बार आशीर्वाद दे रहा हूं


बेटे का शव जब घर पहुंचा तो शहीद के पिता सरजू यादव भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। रोते बिलखते पिता ने बताया कि होली के बाद 10 मार्च को ही वह जमालपुर-हावड़ा सुपर एक्सप्रेस से ड्यूटी ज्वाइन करने गया था। ड्यूटी पर जाते समय उसने पैर छूकर आर्शीवाद भी लिया था। बेटे की शहादत पर गर्व करते हुए कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए उनका बेटा शहीद हुआ है। हमें क्या पता था कि वह अंतिम बार मेरे पैर छूकर आर्शीवाद ले रहा है।  

 

पांच साल के मासूम ओम ने पिता को दी मुखाग्नि, सबकी आंखों से छलक आए आंसू 

 

लालदरवाजा स्थित श्मसान घाट पर शहीद अजय यादव के अंतिम संस्कार के लिए मुखाग्नि देने के लिए 5 वर्षीय मासूम ओम को जब अग्नि वाली लकड़ी पकड़ाई गई तो सारा माहौल गमगीन हो गया। मासूम ओम इस बात से बेखबर था कि उसके माथे से पिता का साया उठ चुका है। वह तो पिता की गोद में जाने के लिए मचल रहा था। इस बीच शहीद के भाईयों ने मासूम ओम को गोद में उठा कर जब उसके हाथ से मुखाग्नि दिलाई तो मासूम की आंखें भी छलक आई। तब उस वक्त वहां उपस्थित सभी लोग भी रो पड़े। 

 

 

चार दिन पहले ही छुट्‌टी पर घर आए पति के साथ सुप्रिया ने खेली थी होली 

 

बुधवार दोपहर लगभग 2.50 बजे सीआरपीएफ के जवानों ने ताबूत से शहीद अजय यादव का पार्थिव शरीर बाहर निकाला। पत्नी सुप्रिया भारती को कुछ महिलाएं ताबूत के पास ले गईं। पत्नी सुप्रिया भारती अंतिम दर्शन के लिए शहीद के चेहरे को निहारती है। इसके बाद के दृश्य से मौजूद महिलाओं सहित अन्य लोगों का दिल दहल गया, लोग फफक पड़े। जिन हाथों से अभी चार दिन पहले पति के साथ होली खेली थी, कलाईयों में नई चूड़ियां पहन कर शृंगार किया था, उन चूड़ियों को पति के ताबूत पर दोनों हाथ पटक कर पत्नी ने तोड़ दिया। उसके क्रंदन से चूड़ियां टूटने की आवाज भी कहीं खो गई थी। आस-पास की महिलाओं द्वारा ढांढस दिए जाने और संभालने के बावजूद रह रह कर सुप्रिया बेसुध हो जा रही थी।  

 

 

5 लाख देकर शहादत का अपमान कर रही सरकार

 

डीएम उदय कुमार सिंह ने सरकार की ओर से बतौर सहायता राशि पांच लाख रुपये का चेक शहीद के परिजनों को भेंट करने की इच्छा जताई। उन्होंने परिजनों से कहा अभी फिलहाल पांच लाख रुपए का चेक है। इसे आप लोग स्वीकार करें। इस बीच शहीद अजय के बड़े भाई सदानंद यादव अचानक भड़क उठे। भाई ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं या किसी प्राकृतिक आपदा में मृतकों के परिजनों को सरकार यह राशि सौंपती है। देश के लिए शहीद होने वालों के शहादत को राशि में तौलना अपमान है। परिजनों ने चेक लौटा दिया। डीएम ने समझाते हुए कहा कि फिलहाल चेक स्वीकार करें। अन्य मदद के लिए सरकार को पत्र लिखा जा रहा है।

 

 

 

 

 

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चिर निद्रा में सोए पिता को रो-रोकर जगाने की कोशिश करती मासूम अाराध्याश्री।
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लाल दरवाजा घाट पर पिता को मुखाग्नि देता पुत्र ओम कुमार।
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शहिद अजय यादव के पार्थीव शरीर पर पुष्प चक्र चढ़ाते डीएम।
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शहिद अजय यादव के पार्थीव शरीर पर पुष्प चक्र चढ़ाते आईजी व एसपी।
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शहीद अजय की बेटी को नेम प्लेट को दिखा पढ़ने के लिए प्रेरित करते एसपी।
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सफीयाबाद हवाई अड्‌डा पर शहिद अजय यादव के शव को हेलीकॉप्टर से उतारते।
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शहिद अजय यादव के रोते बिलखते परिजन।
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लाल दरवाजा घाट पर शहिद को शस्त्र शलामी देते सीआरपीएफ जवान।
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