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बेल्ट में छिपाया था 1.56 Cr का 5.10 किलो सोना, बांग्लादेशी बॉर्डर पर दी थी डिलिवरी

स्विटजरलैंड निर्मित सोने की इस खेप को बांग्लादेश व हावड़ा के रास्ते वाराणसी ले जाने की तैयारी थी।

Dainik Bhaskar

Jan 07, 2018, 06:43 AM IST
तस्करों के सरगना ज्ञानचंद वर्मा (वाराणसी, यूपी) को गिरफ्तार किया गया। तस्करों के सरगना ज्ञानचंद वर्मा (वाराणसी, यूपी) को गिरफ्तार किया गया।

पटना. राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की टीम के ऑपरेशन में शनिवार को पटना जंक्शन पर 1.56 करोड़ का विदेशी सोना (स्विस गोल्ड) बरामद किया गया। साथ ही तस्करों के सरगना ज्ञानचंद वर्मा (वाराणसी, यूपी) को गिरफ्तार किया गया। उसने कमर के बेल्ट के अंदर 5.10 किलोग्राम सोने की बिस्कुट छिपा रखी थी। स्विटजरलैंड निर्मित सोने की इस खेप को बांग्लादेश व हावड़ा के रास्ते वाराणसी ले जाने की तैयारी थी।


इस बाबत खुफिया इनपुट मिलने के बाद हरकत में आई डीआरआई की टीम ने पटना जंक्शन पर विभूति एक्सप्रेस के पहुंचते ही एसी बोगी (बी-3) को घेर लिया। तलाशी के क्रम में बर्थ नंबर 22 पर बैठे संदिग्ध ज्ञानचंद की जब तलाशी ली गई तो कमर में सोने की बिस्कुट देख डीआरआई अफसरों का शक यकीन में बदल गया। तफ्तीश में लगे अफसरों का दावा है कि बीते एक दशक में पहली बार बिहार में इतनी मात्रा में तस्करी के विदेशी सोने बरामद किया गया है। इस बीच गिरफ्तार तस्कर (सरगना) से मिले सुराग पर यूपी से पश्चिम बंगाल तक छापेमारी की जा रही है।

खास तरीके से छिपाया था सोना


शातिर ज्ञानचंद ने बेल्ट के अंदर विशेष तरीके से सोना छिपा रखा था। उसने चमड़े के बेल्ट के अंदर एक कपड़े के बेल्ट में सोने की बिस्कुट को इस तरह सेट करके छिपा रखा कि किसी को आसानी से पता नहीं चले।

बांग्लादेशी कूरियर ने बॉर्डर पर दी थी डिलिवरी

तस्करों के इंटरनेशनल सिंडिकेट से जुड़े बांग्लादेशी कूरियर ने सोने के इस कंसाइनमेंट की डिलिवरी भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर दी थी। टेटरापोल बॉर्डर एरिया में ज्ञानचंद ने रिसीव किया था। वहां से सोना की खेप लेकर वह टैक्सी से हावड़ा पहुंचा। फिर पहले से आरक्षित टिकट के जरिए वह हावड़ा जंक्शन पर विभूति एक्सप्रेस की तृतीय श्रेणी एसी बोगी में वाराणसी जाने के लिए सवार हो गया था।

सर्राफा कारोबारी निकला सरगना


ज्ञानचंद सर्राफा व्यवसायी निकला। वाराणसी में गोविंदपुरा चौक पर उसकी दुकान है। इसका पता चलने के बाद डीआरआई की टीम ने वाराणसी में ज्ञानचंद के घर पर छापेमारी की। हालांकि इस दौरान कागजातों के अलावा कुछ खास हाथ नहीं लगा। डीआरआई ने उसे तस्करों के एक ग्रुप का सरगना करार दिया है।

चार महीने में तीसरी खेप


तस्कर ज्ञानचंद ने बताया कि बीते चार महीने में वह तीसरी बार सोना की खेप लेकर वाराणसी जा रहा था। हालांकि इस बार सबसे अधिक सोना की खेप थी। जांच में लगे अफसरों के मुताबिक बांग्लादेश के तस्करों से सोना खरीदने के लिए कैश के अलावा हवाला से भी भुगतान किया जाता है।

गगनजी कर रहा है ऑपरेट


सोना तस्करों के इस सिंडिकेट को कोलकाता बेस्ड गगनजी ऑपरेट कर रहा है। उसके बांग्लादेश में भी लिंक हैं। गिरफ्तार ज्ञानचंद ने खुलासा किया है कि कोलकाता के बड़ा बाजार इलाके के गगनजी के संपर्क में रहते हुए ही वह सोना तस्करी करने के साथ लोकल रैकेट को संचालित कर रहा था।

8 महीने में तीसरी बार बरामदगी

राज्य में डीआरआई की टीम ने बीते छह महीने में तीसरी बार तस्करी कर लाए गए सोने की खेप पकड़ी है। इसके पहले बीते वर्ष 2017 के अप्रैल में गया व जुलाई में जमशेदपुर से 2-2 किलो सोने की खेप पकड़ी गई थी।

आरोपी ने बेल्ट के अंदर 5.10 किलोग्राम सोने की बिस्कुट छिपा रखी थी। आरोपी ने बेल्ट के अंदर 5.10 किलोग्राम सोने की बिस्कुट छिपा रखी थी।
्विटजरलैंड निर्मित सोने की इस खेप को बांग्लादेश व हावड़ा के रास्ते वाराणसी ले जाने की तैयारी थी। ्विटजरलैंड निर्मित सोने की इस खेप को बांग्लादेश व हावड़ा के रास्ते वाराणसी ले जाने की तैयारी थी।
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तस्करों के सरगना ज्ञानचंद वर्मा (वाराणसी, यूपी) को गिरफ्तार किया गया।तस्करों के सरगना ज्ञानचंद वर्मा (वाराणसी, यूपी) को गिरफ्तार किया गया।
आरोपी ने बेल्ट के अंदर 5.10 किलोग्राम सोने की बिस्कुट छिपा रखी थी।आरोपी ने बेल्ट के अंदर 5.10 किलोग्राम सोने की बिस्कुट छिपा रखी थी।
्विटजरलैंड निर्मित सोने की इस खेप को बांग्लादेश व हावड़ा के रास्ते वाराणसी ले जाने की तैयारी थी।्विटजरलैंड निर्मित सोने की इस खेप को बांग्लादेश व हावड़ा के रास्ते वाराणसी ले जाने की तैयारी थी।
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