--Advertisement--

ये है देश का सबसे ज्यादा बाढ़ झेलने वाला गांव, चार महीने तक रहता है डूबा

चार माह तो गांव जैसे देश से कट ही जाता है। न प्रशासन के लोग आते हैं, न कोई बाहरी शख्स। घर, स्कूल डूब जाते हैं।

Dainik Bhaskar

Jan 22, 2018, 04:00 AM IST
ये गांव भागलपुर के सुपौल जिले में पड़ता है। ये गांव भागलपुर के सुपौल जिले में पड़ता है।

सुपौल (बिहार). बिहार के सुपौल से 10-12 किमी दूर कोसी की धारा के बीच बसा है आसनपुर नरहिया। देश का सबसे ज्यादा बाढ़ झेलने वाला गांव। बारिश के चार माह तो गांव जैसे देश से कट ही जाता है। न प्रशासन के लोग आते हैं, न कोई बाहरी शख्स। घर, स्कूल डूब जाते हैं। मगर यहां लोगों ने जीना सीख लिया है। पुरखों की जमीन न छोड़ने की उनकी जि़द विपदाओं से जीत रही है।

हर डेढ़-दो साल में नई जगह बनाना पड़ता है घर

- इसी जि़द और जीत की कहानी जानने दैनिक भास्कर आसनपुर नरहिया पहुंचा। गांव में घुसते ही 50 साल के उपेन्द्र पंडित मिले। बताया-नदी के बीच में वह पाइप देख रहे हैं। वह बोरिंग का है। महज पंद्रह दिन पहले वहां हमारा घर था, जो कोसी की धारा से कटकर पानी में समा गया। अब नया घर बनाया है।

- गांव के ही रहने वाले बलराम पंडित ने बताया कि एक-डेढ़ हजार की आबादी वाले गांव में यह समस्या सभी के साथ है। हर डेढ़-दो साल में लोगों को नई जगह घर बनाना पड़ता है। क्योंकि कोसी अपनी धारा बदलती रहती है। मगर इससे भी बड़ी समस्या का सामना गांव के लोग जून से सितंबर के बीच करते हैं। बारिश में। तब पूरा गांव डूबा हुआ होता है। अलग-थलग पड़ जाता है।

- गांव के ही रंजीत पासवान कहते हैं कि अब यह समस्या भी सामान्य है। बरसात शुरू होने के पहले ही हर परिवार मचान बनाने में जुट जाता है। चार महीने हमारा जीवन बांस और टिन से बने इन मचानों पर ही कटता है।

पूरे गांव में हैं तीन नाव

- गांव की पंचायत समिति के सदस्य रहे 65 वर्षीय छुतहर पासवान ने बताया कि पास स्थित चार नंबर बांध को कोसी की धारा 25 फीट नीचे से काट रही है। कटाव रोकने के लिए बांस की पाइलिंग नहीं हुई तो कोसी उसे तोड़ ही देगी।

- सरकारी मदद की राह न देखते हुए फिलहाल तो गांववालों ने ही पाइलिंग शुरू कर दी है। कोसी के किनारे ही गांव का प्राथमिक स्कूल है। 15 दिन पहले इसका भी एक हिस्सा ढह गया।
- कमलेश साव बताते हैं कि गांव में न बिजली है, न हाई स्कूल। आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को सुपौल जाना होता है। वे नाव से जाते हैं। गांव में तीन नाव हैं, जो बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने के काम भी आती हैं। जब बाढ़ नहीं होती तब गांव के लोग बलुई जमीन पर मकई, सरसों, आलू और गेहूं की खेती करते हैं। ट्रैक्टर के बिना।

बाढ़ के दौरान लोग पेड़ों पर कुछ इस तरह घर बनाकर रहते हैं। बाढ़ के दौरान लोग पेड़ों पर कुछ इस तरह घर बनाकर रहते हैं।
X
ये गांव भागलपुर के सुपौल जिले में पड़ता है।ये गांव भागलपुर के सुपौल जिले में पड़ता है।
बाढ़ के दौरान लोग पेड़ों पर कुछ इस तरह घर बनाकर रहते हैं।बाढ़ के दौरान लोग पेड़ों पर कुछ इस तरह घर बनाकर रहते हैं।
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..