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मैरिज फंक्शन में गिफ्ट के रूप में देते हैं किताब, इस बुक्स से पढ़कर कई बने अफसर

गिरिधर गुप्ता से किताबें लेकर सैकड़ों छात्रों ने पढ़ाई पूरी की और आज उनमें से कई प्रोफेसर, डॉक्टर बन गए हैं।

Dainik Bhaskar

Jan 22, 2018, 08:23 AM IST
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भागलपुर. यहां के 77 वर्षीय गिरिधर प्रसाद गुप्ता ने युवाओं के मंजिल की राह आसान बनाने का बीड़ा आज से चालीस साल पहले उठाया। इसके लिए अनोखा तरीका अपनाया। वैसे युवाओं को नि:शुल्क किताब उपलब्ध करना शुरू किया जो आर्थिक तंगी की वजह से किताबें खरीदकर नहीं पढ़ पाते हैं। कहने के लिए सूजागंज स्थित उनकी एक किताब की दुकान है, लेकिन जरूरतमंद छात्रों को किताबें उपलब्ध कराने के लिए वहां गैलरी बना दी है, ताकि छात्र वहां आकर जरूरत की किताबें पढ़ सकें।

छात्रों को अगर उन किताबों को घर ले जाकर पढ़ने का मन हो तो इसकी भी आजादी है। चाहे वह कोर्स की किताबें हो या साहित्य की। अगर जरूरत के हिसाब से किताब उनकी दुकान में उपलब्ध नहीं रहती है तो वे उसे बाहर से मंगाकर छात्रों को पढ़ने के लिए उपलब्ध कराते हैं। यह सिलसिला चार दशक से चल रहा है।

आज भी मिलने आते हैं पुराने छात्र


गिरिधर गुप्ता के यहां से नि:शुल्क किताबें लेकर सैकड़ों छात्रों ने पढ़ाई पूरी की और आज उनमें से कई प्रोफेसर, डॉक्टर और इंजीनियर बन गए। इनमें से ही एक हैं सुरेश मवानी। ये मूल रूप से गुजराती हैं। इनकी शुरुआती शिक्षा भागलपुर से हुई। यहां से इंजीनियर की पढ़ाई की। लेकिन पैसे के अभाव में कोर्स की किताबें नहीं खरीद पाते थे। इन्हें गिरिधर बाबू ने किताबें दी थीं। सुरेश मवानी अभी गुजरात में इंजीनियर हैं। जब भी भागलपुर आते हैं तो गिरिधर बाबू से जरूर मिलते हैं। तिलकामांझी भागलपुर विवि के अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. आरडी शर्मा व चैंबर के पूर्व अध्यक्ष मुकुटधारी अग्रवाल भी वहां से किताब ले जाते रहे हैं। समाजसेवी मनोज पांडे बताते हैं कि अगर किसी छात्र के पास किताबें नहीं होती है और गिरिधर बाबू को फोन कर उस बच्चे तो वहां भेजते हैं तो वे मुफ्त में उसे किताबें देते हैं।


शादी समारोह में गिफ्ट के रूप में देते हैं किताब


गिरिधर बाबू बताते हैं कि बंगाल में पुरानी परंपरा है कि शादी-विवाह में किताब भेंट की जाती है। इसी तरह वह भी अगर किसी शादी समारोह में जाते हैं तो किताब गिफ्ट करते हैं। वह गांधी शांति प्रतिष्ठान केन्द्र के संरक्षक एवं पूर्व अध्यक्ष और भारत बुक डिपो, भागलपुर व पटना के प्रोपराइटर हैं। उन्हें इस बात की प्रसन्नता है कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू हुई। वह चाहते हैं कि भ्रष्टाचार पर रोक लगे और समाज का नैतिक उन्नयन हो। वह नर्सरी से पीएचडी तक गांधी-विचार को अनिवार्य करने के पक्षधर हैं।


कई लेखकों की किताबों का किया प्रकाशन


गिरिधर बाबू का प्रकाशन के क्षेत्र में भी अहम योगदान रहा है। उनके भारत बुक डिपो प्रकाशन से दर्जनों लेखकों की पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। इनमें डॉ. श्रीहरि दामोदर, डॉ. रामेश्वर सिंह, डॉ. एके मिश्र, डॉ. एम. क्यू. तौहिद, डॉ. एपी श्रीवास्तव, डॉ. एबी लाल, डॉ. आरबी राय एवं डॉ. बहादुर मिश्र के नाम शामिल हैं। बीएन मंडल विवि के लेक्चरर सुधांशु शेखर बताते हैं कि पुस्तकों के प्रति लोगों में प्रेम बढ़ाने में गिरिधर बाबू की महती भूमिका है। उनके "ओशो गैलरी' में बैठकर पुस्तकों के रसास्वादन करने कई लोग आते हैं।


संपूर्ण क्रांति आंदोलन में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका


गिरिधर बाबू की 1974 के संपूर्ण क्रांति आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भ्रष्टाचार, मंहगाई, बेरोजगारी एवं अशिक्षा के खिलाफ चले इस आंदोलन में इन्होंने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। इनके घर में आंदोलनकारियों को आश्रय मिलता था। उनके साधना प्रेस में आंदोलन से संबंधित पर्चे आदि छापे जाते थे।

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