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HC ने CS से पूछा- शराबबंदी कानून की आड़ में अधिकारी क्यों मनमानी कर रहे हैं ?

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शराबबंदी कानून से जुड़े अनेक ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिसको लेकर कोर्ट परेशान है।

Dainik Bhaskar

Jan 25, 2018, 04:51 AM IST
High Court sought questions chief secretary

पटना. पटना हाईकोर्ट ने शराबबंदी कानून से जुड़े एक मामले में चीफ सेक्रेटरी अंजनी कुमार सिंह को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने उनसे पूछा है कि उनके अधिकारी शराबबंदी कानून के नाम पर क्यों मनमानी कर रहे हैं? केवल यहां के नागरिकों को ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्य के लोगों को भी अकारण परेशान किया जा रहा है। दरअसल, वेस्ट बंगाल ट्रांसपोर्ट काॅरपोरेशन की बस के एक यात्री से शराब की एक बोतल मिली और बिहार पुलिस ने बस को ही जब्त कर लिया।

काॅरपोरेशन ने इसके खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को भी हाजिर होकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया। इस मामले पर 31 जनवरी को फिर सुनवाई होगी। चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन तथा जस्टिस अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने नॉर्थ वेस्ट बंगाल ट्रांसपोर्ट काॅरपोरेशन की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई के बाद बुधवार को यह आदेश दिया।

कोलकाता से एक अधिकारी का नोएडा ट्रांसफर हुआ, उनका सामान भी बिहार में जब्त किया गया क्योंकि गाड़ी में एक बोतल शराब थी

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शराबबंदी कानून से जुड़े अनेक ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिसको लेकर कोर्ट परेशान है। एक मामले का जिक्र करते हुए कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा कि नोयडा का एक बैंक अधिकारी का तबादला कोलकाता हो गया था। उसने एक ट्रांसपोर्ट कंपनी को अपना सामान नोयडा से कोलकाता पहुंचाने के लिए कहा।


ट्रांसपोर्ट कंपनी की गाड़ी सामान लेकर बिहार में प्रवेश किया तो जांच के दौरान शराब की बोतल मिली। जांच अधिकारी ने कार्रवाई के नाम पर सारा सामान ही जब्त कर लिया। उस बैंक अधिकारी को सामान रिलीज कराने के लिए हाईकोर्ट में आना पड़ा। कोर्ट ने कहा कि वेस्ट बंगाल ट्रांसपोर्ट काॅरपोरेशन की बस जब बिहार से गुजर रही थी तो सीट नंबर-44पर बैठे व्यक्ति के सामान से शराब की एक बोतल बरामद हुई। लेकिन संबंधित अधिकारी ने बस को ही जब्त कर लिया। लगता है कि अधिकारी अपने दिमाग का इस्तेमाल ही नहीं करते। इस तरह के अनेक मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। कोर्ट ने इस आदेश के साथ रिट याचिका की एक प्रति तीन दिनों के भीतर चीफ सेक्रेटरी को भेजने का निर्देश दिया।

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