Hindi News »Bihar »Patna» Hrithik Roshan Started Shooting For Super 30 As Anand Kumar

कभी साइकिल से घूमकर बेचते थे पापड़, अब ऋतिक कर रहे हैं इनका रोल

ऋतिक इन दिनों वाराणसी में फिल्म सुपर 30 की शूटिंग कर रहे हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Feb 06, 2018, 03:12 PM IST

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    आनंद कुमार ने फेसबुक पर पोस्ट के जरिए फिल्म के निर्देशक को शुभकामनाएं दी है।

    पटना.बॉलीवुड सुपरस्टार ऋतिक रोशन ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक फोटो शेयर की है, जिसमें वो एक नए लुक में नजर आ रहे हैं। बता दें कि ऋतिक इन दिनों अपनी अगली फिल्म 'सुपर30' की शूटिंग में व्यस्त हैं। ये फिल्म पटना के सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार की बायोपिक है। आनंद ने फेसबुक पर फिल्म के निर्देशक को दी शुभकामनाएं...

    वहीं, फेसबुक पर आनंद कुमार ने एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा- "एक कहावत बड़ी मशहूर है कि हजारों मील की यात्रा की शुरुआत सिर्फ एक कदम से होती है, लेकिन मैं अक्सर अपने स्टूडेंट्स से कहता हूं कि हजारों मील की यात्रा की शुरुआत के लिए पहला कदम उचित दिशा में बढ़ना सबसे जरूरी है। जिस तरह से सुपर 30 फिल्म के डायरेक्टर विकास बहल ने जोरदार तैयारी के साथ आज वाराणसी में फिल्म की शूटिंग का आगाज किया है सच में वह काबिले तारीफ है।"

    आगे आनंद ने लिखा- "अभी तुरंत शूटिंग शुरू होने के पहले विकास बहल ने मुझे ऋतिक जी के पहले लुक को भेजा तब मैं देखकर दंग रहा गया। लगा कि मैं अपने-आप को कई साल पीछे स्टूडेंट लाइफ में देख रहा हूं। आगे उन्होंने मुझसे कहा कि वे अभी फिल्म की शूटिंग शुरू करने जा रहें है, आपके आशीर्बाद की जरुरत है। मैंने कहा कि मैं आपको क्या आशीर्वाद दे सकता हूं। हां, मेरी शुभकामनायें हमेशा आपके साथ हैं।"

    इस मौके पर DainikBhaskar.com अपने रिडर्स को आनंद कुमार के लाइफ के स्ट्रगल के बारे में बताने जा रहा है कि कैसे साइकिल से घूमकर पापड़ बेचने वाला शख्स आज इस मुकाम तक पहुंच गया कि उस पर फिल्म बन रही है।

    आगे की स्लाइड्स में जानें आनंद कुमार से जुड़े कुछ इंटरेस्टिंग फैक्ट्स...

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    पिता के पास नहीं थे इंग्लिश मीडियम में पढ़ाने के पैसे

    - आनंद कुमार की फैमिली मिडिल क्लास से बिलॉन्ग करती है। उनके पिता पोस्टल विभाग में क्लर्क थे।

    - बच्चों को अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाने का खर्च निकालना आनंद के पिता के लिए मुश्किल था। इसलिए बच्चों को हिंदी माध्यम के सरकारी स्कूल में ही पढ़ाया।

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    कैम्ब्रिज से आया था ऑफर

    - मैथ्स आनंद का फेवरेट सब्जेक्ट हुआ करता था। वे बड़े होकर इंजीनियर या साइंटिस्ट बनना चाहते थे।

    - 12वीं के बाद आनंद ने पटना यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया जहां उन्होंने गणित के कुछ फॉर्मूले इजाद किए। इसके बाद कैम्ब्रिज से आनंद को बुलावा आ गया।

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    नहीं थे कैम्ब्रिज जाने के पैसे

    - आनंद के साथ एक समस्या ये आई कि कैम्ब्रिज जाने और रहने के लिए लगभग 50 हजार रुपए की जरूरत थी, लेकिन इतने पैसे आनंद के पास नहीं थे।

    - बताया जाता है कि जब कैम्ब्रिज जाने के लिए आनंद ने पिता से पैसे की बात की तो उन्होंने अपने ऑफिस में बात कर पैसों का इंतजाम कर लिया।

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    कैम्ब्रिज जाने से पहले हुई पिता की मौत

    - 1 अक्टूबर 1994 को आनंद को कैम्ब्रिज जाना था, लेकिन इससे पहले 23 अगस्त 1994 को उनके पिता का निधन हो गया।

    - घर में आनंद के पिता अकेले कमाने वाले थे। उनके चाचा दिव्यांग थे। लिहाजा घर की सारी जिम्मेदारी आनंद के कंधों पर आ गई।

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    ऐसे करने लगे गुजारा

    - इसके बाद आनंद अपना फेवरेट सब्जेक्ट मैथ्स बच्चों को पढ़ाकर गुजारा करने लगे। लेकिन जितना वो कमा रहे थे उससे घर का खर्च पूरा नहीं हो पा रहा था।

    - फिर आनंद की मां ने घर में पापड़ बनाने का काम शुरू किया और आनंद रोज शाम को चार घंटे मां के बनाए पापड़ों को साइकिल से घूम-घूम कर बेचते।

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    दो बच्चों से हुई थी स्कूल की शुरुआत

    - थोड़े पैसे जमा हुए तो आनंद ने रामानुजम स्कूल ऑफ मैथेमेटिक्स खोला। इस स्कूल में एडमिशन के नाम पर कोई स्टूडेंट 100 रुपए तो कोई 200 देता।

    - आनंद ने इस स्कूल में दो बच्चों को पढ़ाने से शुरुआत की और देखते ही देखते बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ती चली गई और जगह कम पड़ने लगी।

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    2002 में सुपर 30 की शुरुआत की

    - फिर आनंद ने एक बड़े हॉल की व्यवस्था की और प्रत्येक स्टूडेंट के लिए 500 रुपए की सालाना फीस निश्चित कर दी।

    - साल 2002 में आनंद ने सुपर 30 की शुरुआत की और 30 बच्चों को फ्री आईआईटी कोचिंग देना शुरू किया।

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    पहले साल 18 बच्चों को मिली सक्सेस

    - पहले ही साल यानी 2003 की आईआईटी एंट्रेंस में सुपर 30 के 30 में से 18 बच्चों को सक्सेस मिली।

    - इसके बाद 2004 में 30 में से 22 बच्चे और 2005 में 26 बच्चों को सफलता मिली। साल 2008 से 2010 तक सुपर 30 का रिजल्ट सौ प्रतिशत रहा।

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