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आरा कोर्ट की नजर में 4 साल से फरार इंस्पेक्टर पटना में थानेदार, मांगा जवाब

लोकायुक्त ने पुलिस मुख्यालय को 23 जनवरी तक जवाब देने का अल्टीमेट दिया है।

Danik Bhaskar | Jan 06, 2018, 03:27 AM IST

आरा. शहर से जुड़े एक आपराधिक मामले में बिहार पुलिस का एक इंस्पेक्टर कोर्ट की नजरों में करीब चार सालों से फरार चला अा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि कोर्ट की नजरों में फरार इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार पटना रेल पुलिस में थाना चला रहे हैं। वह भी उस जगह पर जहां पर बिहार के डीजीपी से लेकर पुलिस मुख्यालय के शीर्ष अफसर हैं। लोकायुक्त बिहार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।

लोकायुक्त ने पुलिस मुख्यालय को 23 जनवरी तक जवाब देने का अल्टीमेट दिया है। जिसे लेकर पुलिस महकमे में हड़कंप है। इधर, पटना के जोनल आईजी नैयर हसनैन खां ने एक हफ्ते के अंदर इंस्पेक्टर के विरूद्ध निर्गत स्थायी वारंट का तामिला कराने का निर्देश भोजपुर पुलिस को दिया है।

एक दारोगा पर गैरजमानतीय वारंट

आरा कोर्ट के सप्तम एसीजेएम प्रणव शंकर ने आरा के नवादा थाने में दारोगा रहे आर.के भानु के खिलाफ गैर जमानतीय वारंट जारी किया है। इस वारंट पर तामिल कराने के लिए डीजीपी को भेजा है। मालूम हो कि किसी बिंदेश्वरी प्रसाद ने फरवरी 2011 में कोर्ट में मारपीट का परिवाद किया था। जिसमें नवादा थाना के तत्कालीन अवर निरीक्षक आर.के भानु को अभियुक्त बनाया गया था। कोर्ट ने जांचोपरांत दारोगा पर समन, जमानतीय वारंट व गैर जमानतीय वारंट जारी किया था। इसके बाद भी दारोगा कोर्ट में पेश नहीं हुए।

वर्ष 2013 में कोर्ट ने किया था फरार घोषित

विभागीय सूत्रों के अनुसार इस केस में नवादा थाना के तत्कालीन दारोगा प्रमोद कुमार को काेर्ट ने जून 2013 में फरार घोषित किया था। जिसे लेकर कोर्ट ने उनके विरूद्ध स्थायी वारंट भी निर्गत किया था। इधर, इस मामले में निर्गत स्थायी वारंट का तामिला नहीं होने पर वादिनी मंजू ओझा के पिता राजेन्द्र उपाध्याय ने लोकायुक्त व पुलिस मुख्यालय में शिकायत की थी।

18 साल पुराना है मामला, मंजू ओझा ने किया था केस

बताया जा रहा कि आरा नवादा थाना के बाजार समिति रोड निवासी मंजू ओझा पति मोहन अोझा ने 16 जून वर्ष 2000 में आरा कोर्ट में परिवाद संख्या 560/सी /2000 के तहत केस दर्ज कराया था। भादवि की धारा 452 /342/188 /166/365/ 120बी के तहत दर्ज केस में अब ट्रायल शुरू हो गया है। इस केस में जबरन घर में घुसकर अपहरण करने एवं संपत्ति नुकसान पहुंचाने को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे। जिसमें तत्कालीन डीएसपी से लेकर अन्य अफसरों पर भी पूर्व में वारंट निर्गत हुआ था। संबंधित मामले में डीएसपी से आईपीएस बने एक अफसर लेकर अन्य पदाधिकारियों ने पहले ही कोर्ट से जमानत ले ली है।

इधर, गवाह डॉक्टर को पेश करने में विफल थानाध्यक्ष वेतन पर रोक

कोर्ट के आदेश की अवहेलना पर अष्टम एसीजेएम राकेश कुमार-तृतीय ने एसपी को नवादा थानाध्यक्ष के वेतन पर रोक लगाने का आदेश दिया है। मामला, मारपीट के एक केस से जुड़ा है। जिसमें दक्षिणी रमना रोड में शहीद भवन निवासी एक रिटायर्ड चिकित्सा पदाधिकारी को गवाही के लिए कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया गया था। फिर उस डॉक्टर के खिलाफ कोर्ट ने गैर जमानतीय वारंट नवादा थाना को भेजा था। फिर भी थानाध्यक्ष गवाही के लिए डॉक्टर को कोर्ट में पेश नहीं कर सके। कोर्ट ने 16 दिसम्बर 2017 को नवादा थानाध्यक्ष से शो-कॉज किया। बताया जाता है कि 1 नवम्बर 1996 को उदवंतनगर के नवादाबेन के सत्यनारायण राय ने मारपीट का केस किया था। जिसमें चार लोग नामजद अभियुक्त थे। परंतु वह मामला 21 साल से उक्त डॉक्टर की गवाही के लिए लंबित चल रहा है।

आईजी ने 7 दिन में वारंट तामिल करने का दिया आदेश, पूछा जिम्मेवार कौन?

इधर, पटना के जोनल अाईजी नैयर हसनैन खां ने रेल पुलिस में कार्यरत इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार के खिलाफ चार सालों से लंबित चले आ रहे स्थायी वारंट को लेकर कड़ी नाराजगी जतायी है। आईजी ने भोजपुर पुलिस को एक हफ्ते के अंदर लंबित वारंट का निष्पादन करने का आदेश दिया है। इसे लेकर उन्होंने एक पत्र भी निर्गत किया है। चार सालों से वारंट लंबित रखे जाने को लेकर उन्होंने साफ तौर पर पूछा हैं कि इसके लिए आखिर जिम्मेवार कौन है? जोनल आईजी ने इस मामले में लोकायुक्त द्वारा निर्गत पत्र का हवाला देते हुए साफ तौर पर कहा है कि जल्द से जल्द इस मामले में कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।