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देश के 100 प्रदूषित शहरों में जालंधर का भी नाम, नहीं सुधरे तो दिल्ली की तरह होंगे हालात

केंद्र सरकार ने विभिन्न शहरों में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम इंस्टाल करवाए हैं।

Danik Bhaskar | Mar 14, 2018, 06:48 AM IST

जालंधर. शहर की आबोहवा में धूल, सिक्का और गंदगी लगातार बढ़ रही है। हवा में पर्टिकुलेट मैटर 100 से नीचे होना चाहिए, लेकिन जालंधर सिटी में ये तय मानकों से ऊपर जा रहा है। हाल ही में सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने देशभर में 200 शहरों का सर्वे करवाकर लिस्ट तैयार की है, जहां की हवा सेहत के लिहाज से गंदी है। इन्हीं में जालंधर का नाम भी शामिल हो गया है। यह लिस्टिंग एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम से हुई है, जोकि जालंधर में सर्किट हाउस में लगा हुआ है। हालांकि दिल्ली जैसे शहरों से जालंधर का लेवल काफी कम है लेकिन लगातार इजाफे से शहर के हालात और भी खराब होने की आशंका है।

फरवरी से प्रदूषण की लिस्टिंग

अब पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड जालंधर ऑफिस के एक्सईएन अरुण कक्कड़ सेंटर को प्लान सब्मिट करके लौटे हैं, जिसके लागू करने से पॉल्यूशन पर कंट्रोल किया जा सकेगा। दरअसल केंद्र सरकार ने विभिन्न शहरों में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम इंस्टाल करवाए हैं। हरेक पर करीब 80 लाख से 1 करोड़ का खर्च है। इसी के तहत सर्किट हाउस में जालंधर सिटी का केंद्र स्थापित किया है। इसमें फरवरी से अब तक हवा की गंदगी दर्ज हुई, उसने जालंधर को सबसे प्रदूषित सौ शहरों में शामिल किया है।

पुराने वाहन और सड़कों की सफाई मुद्दा... एक्सईएन अरुण कक्कड़ बताते हैं कि उन्होंने प्लान दिया है कि 10 साल से पुराने वाहनों को हटाया जाए, सड़कों की रेगुलर सफाई, इंडस्ट्री जोन में एयर फिल्ट्रेशन के मानक लागू हों। पाल्यूशन की मुख्य वजह व्हीकल, कंस्ट्रक्शन सेक्टर व धूल भरी सड़कें और इंडस्ट्री की चिमनियां हैं। तीनों में कंट्रोल करने को कदम उठाए जाएंगे।

शहरी विकास के विभागों की बनेगी कमेटी...10 साल से पुराने वाहन हटाना, चिमनियों में फिल्ट्रेशन लगवाना, सीएनजी से वाहन चलाना, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का इस्तेमाल, सिटी बस सर्विस, ट्रैफिक हटाने के लिए मैनेजमेंट, ग्रीनरी बढ़ाने जैसे कदम उठाए जाएंगे। नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस, इंडस्ट्री विभाग आदि को मिलाकर पीपीसीबी के नोडल आफिस वाली कमेटी बनेगी।

देश के 6 सबसे प्रदूषित शहर, जहां सांस लेना मुश्किल

दिल्ली- पीएम 2.5 की मात्रा 153 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर है। जबकि पीएम10 की मात्रा 286 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर भी यहीं पार्इ गर्इ है।
पटना- पीएम 2.5 की मात्रा 149 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर जबकि पीएम10 की मात्रा 164 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।
ग्वालियर- पीएम 2.5 की मात्रा 144 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर जबकि पीएम10 की मात्रा 329 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर।
रायपुर- पीएम 2.5 की मात्रा 134 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर, जबकि पीएम10 की मात्रा 305 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक है।
अहमदाबाद- पीएम 2.5 की मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर जबकि पीएम10 की मात्रा 67 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।
लखनऊ- पीएम 2.5 की मात्रा 96 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर जबकि पीएम10 की मात्रा 219 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक है।

बढ़ रही सेहत समस्याएं...आंखों में जलन और दमे के रोगियों की दिक्कत लगातार बढ़ रही है। डा. ऋषि महे कहते हैं- सारी दिक्कतें हवा की गंदगी के कारण ही हैं। ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने होंगे। सड़क-पार्क ही नहीं, बल्कि घर में भी जहां जगह हो, वहां पौधे लगाएं।

हवा का क्वालिटी मानक

- 0-50:बेहतर

- 51 से 100 : संतोषजनक

- 101-200 : मॉडरेट

- 201–300 : खराब

- 301-400:अति खराब

- 401-500 : बेहद खतरनाक।

शहर की हवा में प्रदूषण का औसत

मात्रा औसत न्यूनतम अधिकतम
पीएम2.5 40 1 81
पीएम10 101 84 112
एन2 25 15 48
एसओ2 19 9 29
सीओ2 52 34 70
ओजोन : 50 4 61