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चौंकिए मत! ये कोई एक्सप्रेस ट्रेन नहीं, बिहार का आदर्श मध्य विद्यालय है...

इसे आदर्श विद्यालय का दर्जा प्राप्त है। स्कूल की दीवार पर ट्रेन की पेंटिंग की गई है

Dainik Bhaskar

Feb 11, 2018, 06:11 AM IST
ऊपर की फोटो किसी एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेन की नहीं है बल्कि ये बिहार के समस्तीपुर में स्थित एक मिडिल स्कूल है। ऊपर की फोटो किसी एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेन की नहीं है बल्कि ये बिहार के समस्तीपुर में स्थित एक मिडिल स्कूल है।

समस्तीपुर (बिहार). ऊपर की फोटो किसी एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेन की नहीं है बल्कि ये बिहार के समस्तीपुर में स्थित एक मिडिल स्कूल है। इसे आदर्श विद्यालय का दर्जा प्राप्त है। स्कूल की दीवार पर ट्रेन की पेंटिंग की गई है। नाम शिक्षा एक्सप्रेस दिया गया है। इसका श्रेय स्कूल के हेडमास्टर रामप्रवेश ठाकुर को जाता है।

हेडमास्टर ने बताया ऐसे आया आइडिया

- हेडमास्टर राम प्रवेश ठाकुर ने बताया कि दैनिक भास्कर की मैगजीन “अहा जिंदगी’ के 21 जनवरी के अंक में छपे आर्टिकल “बिहार की दीवारों पर अब रंग बोलते हैं...’ से पेंटिंग की प्रेरणा मिली।
- स्थानीय कलाकार बसंत माझी का सहारा लिया और पेंटिंग को मूर्तरूप दे दिया। उन्होंने बताया कि पेंटिंग में शुरू से ही रुचि है। पेंटिंग के बाद विद्यार्थियों का आकर्षण बढ़ा है।
- बता दें कि स्कूल की व्यवस्था भी बेहतर है। इस शिक्षा एक्सप्रेस को लेकर यहां के बच्चों का मानना है कि शिक्षा एक्सप्रेस नाम है और यहां की शिक्षा व्यवस्था भी एक एक्सप्रेस ट्रेन की तरह है।
- स्कूल में कुल 750 बच्चे हैं और 14 टीचर हैं। स्कूल में कुल 27 कमरे हैं जबकि इस स्कूल की स्थापना 1925 में की गई थी।

स्कूल की दीवार पर ट्रेन की पेंटिंग की गई है। नाम शिक्षा एक्सप्रेस दिया गया है। स्कूल की दीवार पर ट्रेन की पेंटिंग की गई है। नाम शिक्षा एक्सप्रेस दिया गया है।
इसका श्रेय स्कूल के हेडमास्टर रामप्रवेश ठाकुर को जाता है। इसका श्रेय स्कूल के हेडमास्टर रामप्रवेश ठाकुर को जाता है।
हेडमास्टर राम प्रवेश ठाकुर ने बताया कि दैनिक भास्कर की मैगजीन “अहा जिंदगी’ के 21 जनवरी के अंक में छपे आर्टिकल “बिहार की दीवारों पर अब रंग बोलते हैं...’ से पेंटिंग की प्रेरणा मिली। हेडमास्टर राम प्रवेश ठाकुर ने बताया कि दैनिक भास्कर की मैगजीन “अहा जिंदगी’ के 21 जनवरी के अंक में छपे आर्टिकल “बिहार की दीवारों पर अब रंग बोलते हैं...’ से पेंटिंग की प्रेरणा मिली।
स्थानीय कलाकार बसंत माझी का सहारा लिया और पेंटिंग को मूर्तरूप दे दिया। स्थानीय कलाकार बसंत माझी का सहारा लिया और पेंटिंग को मूर्तरूप दे दिया।
बता दें कि स्कूल की व्यवस्था भी बेहतर है। इस शिक्षा एक्सप्रेस को लेकर यहां के बच्चों का मानना है कि शिक्षा एक्सप्रेस नाम है और यहां की शिक्षा व्यवस्था भी एक एक्सप्रेस ट्रेन की तरह है। बता दें कि स्कूल की व्यवस्था भी बेहतर है। इस शिक्षा एक्सप्रेस को लेकर यहां के बच्चों का मानना है कि शिक्षा एक्सप्रेस नाम है और यहां की शिक्षा व्यवस्था भी एक एक्सप्रेस ट्रेन की तरह है।
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ऊपर की फोटो किसी एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेन की नहीं है बल्कि ये बिहार के समस्तीपुर में स्थित एक मिडिल स्कूल है।ऊपर की फोटो किसी एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेन की नहीं है बल्कि ये बिहार के समस्तीपुर में स्थित एक मिडिल स्कूल है।
स्कूल की दीवार पर ट्रेन की पेंटिंग की गई है। नाम शिक्षा एक्सप्रेस दिया गया है।स्कूल की दीवार पर ट्रेन की पेंटिंग की गई है। नाम शिक्षा एक्सप्रेस दिया गया है।
इसका श्रेय स्कूल के हेडमास्टर रामप्रवेश ठाकुर को जाता है।इसका श्रेय स्कूल के हेडमास्टर रामप्रवेश ठाकुर को जाता है।
हेडमास्टर राम प्रवेश ठाकुर ने बताया कि दैनिक भास्कर की मैगजीन “अहा जिंदगी’ के 21 जनवरी के अंक में छपे आर्टिकल “बिहार की दीवारों पर अब रंग बोलते हैं...’ से पेंटिंग की प्रेरणा मिली।हेडमास्टर राम प्रवेश ठाकुर ने बताया कि दैनिक भास्कर की मैगजीन “अहा जिंदगी’ के 21 जनवरी के अंक में छपे आर्टिकल “बिहार की दीवारों पर अब रंग बोलते हैं...’ से पेंटिंग की प्रेरणा मिली।
स्थानीय कलाकार बसंत माझी का सहारा लिया और पेंटिंग को मूर्तरूप दे दिया।स्थानीय कलाकार बसंत माझी का सहारा लिया और पेंटिंग को मूर्तरूप दे दिया।
बता दें कि स्कूल की व्यवस्था भी बेहतर है। इस शिक्षा एक्सप्रेस को लेकर यहां के बच्चों का मानना है कि शिक्षा एक्सप्रेस नाम है और यहां की शिक्षा व्यवस्था भी एक एक्सप्रेस ट्रेन की तरह है।बता दें कि स्कूल की व्यवस्था भी बेहतर है। इस शिक्षा एक्सप्रेस को लेकर यहां के बच्चों का मानना है कि शिक्षा एक्सप्रेस नाम है और यहां की शिक्षा व्यवस्था भी एक एक्सप्रेस ट्रेन की तरह है।
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