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गेंद समझ बच्चे ने उठा लिया बम, धमाके के बाद नाबालिग का हुआ ये हाल

बांस के झुरमुटों में किसी ने सुतली बंधा बम छिपा कर रखा था, जिसे उसने गेंद समझ कर उठा लिया।

Dainik Bhaskar

Dec 17, 2017, 05:53 AM IST
बम फटने के दौरान घायल बच्चा। बम फटने के दौरान घायल बच्चा।

भागलपुर. मधुसूदनपुर थाना एरिया के रामपुर गांव में शनिवार दोपहर को बम विस्फोट में पांच साल का रितेश कुमार कुमार जख्मी हो गया। विस्फोट में उसकी दोनों हथेली उड़ गई और चेहरे पर बम के छींटे लगे। गंभीर स्थिति में परिजनों ने इलाज के लिए मायागंज अस्पताल में भर्ती कराया है। रितेश मधुसूदनपुर के सेंट्रल पब्लिक स्कूल में एलकेजी में पढ़ता है। उसके पिता अजय दास तातारपुर में चप्पल के कारीगर हैं।


बांस के झुरमुट में सुतली में बंधा था बम, बच्चा गंभीर


रितेश ने बताया कि आज वह स्कूल नहीं गया था। दोपहर में घर के पीछे खेल रहा था। बांस के झुरमुटों में किसी ने सुतली बंधा बम छिपा कर रखा था, जिसे उसने गेंद समझ कर उठा लिया। जैसे ही उसने उसे पटका, विस्फोट हो गया और उसकी दोनों हथेली उड़ गई। जोरदार आवाज सुन कर आसपास के लोग दौड़े। खून से लतपथ रितेश वहीं पड़ा हुआ था। उसकी दादी, चाचा व अन्य परिजन रितेश को इलाज के लिए नाथनगर पीएचसी ले गए, जहां बेहतर इलाज के लिए उसे मायागंज भेज दिया। घटना की जानकारी पाकर मधुसूदनपुर थानेदार नसीम खान मौके पर पहुंचे। बांस के झुरमुटों सर्च किया, लेकिन दूसरा कोई बम नहीं मिला। पुलिस ने मौके पर विस्फोट बम के अवशेष को जब्त किया है, जिसे जांच में एफएसएल भेजा जाएगा।

भाड़े की गाड़ी से घायल को पुलिस ने पहुंचाया अस्पताल


नाथनगर पीएचसी से मधुसूदनपुर पुलिस ने भाड़े की स्कॉर्पियो से घायल बालक को मायागंज अस्पताल पहुंचाया। पिछले एक माह से थाने की जीप खराब पड़ी हुई है। पुलिस टेम्पो से गश्ती करती है। 29 नवंबर को भीमकित्ता में गोलीबारी में जख्मी किसान रंगलाल साह को भी मधुसूदनपुर पुलिस ने टेम्पो से अस्पताल पहुंचाया था। थाने की जीप खराब रहने के कारण टेम्पो से जैसे-तैसे गश्ती हो रही है।

आखिर कौन है मासूमों का दुश्मन?

कूड़े-कचरे में लगातार बम विस्फोट की घटना में मासूम निशाना बन रहे हैं। आखिर कौन है मासूमों का दुश्मन?, जिसे पुलिस अबतक इसका पता नहीं लगा पाई है। लगातार बम विस्फोट की घटनाएं हो रही है। पिछले दो साल के दौरान आधा दर्जन स्थानों पर कूड़े-कचरे में बम के फटने की घटना हो चुकी है। इसमें एक दर्जन से अधिक बच्चे भी जख्मी हुए थे। लेकिन एक भी मामलों का पुलिस खुलासा नहीं कर पाई है। सरेआम कौन बम रख रहा है और उसकी मंशा क्या है? क्या बम रखने के पीछे कोई गहरी साजिश तो नहीं? यह सारे सवाल पुलिस के लिए चुनौती बन गए हैं।

विक्रमशिला कॉलोनी में हुए बम विस्फोट का नहीं सुलझा मामला


तिलकामांझी के विक्रमशिला कॉलोनी में बम विस्फोट और पांच जिंदा बम मिलने का घटना अब तक सुलझ नहीं पाई है। जगदीशपुर के जमनी गांव में बम विस्फोट का मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया है। ऐसी सभी घटनाएं एक-दूसरे से मिलती-जुलती है। क्या ये घटनाएं किसी गहरी साजिश का हिस्सा तो नहीं हैं? क्योंकि जिस तरह बम को पैक किया गया था, वह किसी साधारण अपराधी के बस की बात नहीं है। गुल के डिब्बा में सेलो टेप साट कर बम पैक किया गया था। जाहिर है कि इस तरह का दिमाग कोई पेशेवर अपराधी/नक्सली का ही हो सकता है। जिन-जिन स्थान पर अब तक विस्फोट हुआ है, वह घनी आबादी वाला इलाका है।

दादी की गोद में घायल बच्चा। दादी की गोद में घायल बच्चा।
ब्लास्ट के बाद बच्चा बुरी तरह घायल हो गया। ब्लास्ट के बाद बच्चा बुरी तरह घायल हो गया।
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बम फटने के दौरान घायल बच्चा।बम फटने के दौरान घायल बच्चा।
दादी की गोद में घायल बच्चा।दादी की गोद में घायल बच्चा।
ब्लास्ट के बाद बच्चा बुरी तरह घायल हो गया।ब्लास्ट के बाद बच्चा बुरी तरह घायल हो गया।
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