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पिता और भाई करते हैं मजदूरी, जेवलिन थ्रो में इस लड़की ने फिर जीता गोल्ड मेडल

कोच राजीव लोचन ने बताया कि बेटी मीनू इंटरनेशनल क्वालिफाइंग मार्क्स 44.97 मीटर से काफी नजदीक है।

Danik Bhaskar | Dec 22, 2017, 06:40 AM IST
रोहतक में आयोजित नेशनल एथलेटिक्स में भाला फेंकने में भागलपुर की मीनू अव्वल रहीं। ऊपर बीच में। रोहतक में आयोजित नेशनल एथलेटिक्स में भाला फेंकने में भागलपुर की मीनू अव्वल रहीं। ऊपर बीच में।

भागलपुर. रोहतक में चल रही 63वीं नेशनल स्कूल एथलेटिक्स कॉम्पिटीशन में भागलपुर की मीनू सोरेन ने जेवलिन थ्रो में फिर गोल्ड मेडल जीता है। मीनू बिहार से कस्टेंट थीं। मीनू ने कर्नाटक और पंजाब के प्लेयर्स को पीछे छोड़ ये मेडल जीता। बता दें कि मीनू ने 44.41 मीटर थ्रो किया। जबकि दूसरे स्थान पर कर्नाटक की रुनझुन पेगू ने 43.11 मीटर व पंजाब की मनप्रीत कौर ने 42.11 मीटर थ्रो किया। मीनू एकलव्य स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर की प्लेयर है।

पिछले साल भी तीन स्वर्ण पदक जीती थी

मीनू की सफलता पर साथ गए एकलव्य के शिक्षक व कोच राजीव लोचन ने बताया कि मीनू की इस सफलता ने बिहार का मान ऊंचा किया है। मीनू सोरेन के पिता मानसिंह सोरेन शाहकुंड की पहाड़ों पर छेनी-हथौड़ी चलाकर अपना घर चलाते हैं। पिता और भाई पीरपैंती के पत्थर खदानों से बोल्डर निकालकर ट्रक पर अनलोड करते हैं। गांव में थोड़ी-बहुत जमीन के अलावा उनकी कोई अचल संपत्ति नहीं है। मां हाउसवाइफ हैं। दो बड़े भाइयों की वह इकलौती बहन है। मीनू पिछली बार भी बड़ोदरा में हुए राष्ट्रीय स्तर पर स्कूली गेम फेडरेशन इंडिया में जेवलिन थ्रो कर गोल्ड मेडल जीता था। इस बेटी ने अंडर 40 मीटर रेंज में 37.72 मीटर फेंककर गोल्ड अपने नाम कर लिया था।

इंटरनेशनल क्वालिफाइंग मार्क्स 44.97 मीटर से काफी नजदीक

कोच राजीव लोचन ने बताया कि बेटी मीनू इंटरनेशनल क्वालिफाइंग मार्क्स 44.97 मीटर से काफी नजदीक है। मीनू 2012-13 में चौथी क्लास से ही भाला फेंकने का अभ्यास करती थी। 2013-14 में रांची में उसने गोल्ड हासिल किया था। 2014-15 में केरल में नेशनल स्कूली गेम्स में उसे सिल्वर मिला था। बड़ोदरा में हुई स्पर्धा में उसने 42.42 मीटर का थ्रो तो फेंका, लेकिन पैर क्रीज से बाहर हो जाने से वह 40-45 मीटर वर्ग में पदक लेने से चूक गई थी।