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80 फीसदी लोग यहां करते हैं मशरूम की खेती, आमदनी हर दिन 500 से 700 रुपए

जीविका ने सस्टनेबल लाइवलीहुड्स एंड एडप्टेशन टू क्लाइमेट चेंज प्रोजेक्ट के तहत इसे केंद्र सरकार की पहल पर शुरू किया है।

राजीव कुमार | Last Modified - Feb 15, 2018, 04:42 AM IST

  • 80 फीसदी लोग यहां करते हैं मशरूम की खेती, आमदनी हर दिन 500 से 700 रुपए

    बोधगया.पहले आय का निश्चित जरिया नहीं था। जीविका से जुड़ने पर मदद मिली, लेकिन जब इस साल मशरूम के उत्पादन से जुड़ी, तब सही मायने में बदलाव दिखा। आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान है मशरूम उत्पादन का। बाराचट्टी के बाराडीह की कांति देवी ने उक्त बातें कही। उसके जैसी कई महिलाओं की यही कहानी है। बाराचट्टी प्रखंड के बाराडीह गांव के 80 फीसदी लगभग 400 घरों में मशरूम से आर्थिक बदलाव आ गया है। इसके अलावा प्रखंड के सात गांवों के लगभग 2000 घरों में आर्थिक सशक्तीकरण का माध्यम बन रहा है मशरूम।

    जीविका की पहल से तीन सौ दीदी इसका उत्पादन करवा रही हैं। प्रत्येक महिलाएं दैनिक पांच सौ से सात सौ रुपए तक मशरूम बेच कर आय अर्जित कर रही है। जीविका के यंग प्रोफेशनल्स फार्म अमित कुमार व नीतीश कुमार ने बताया कि पहले महिलाओं के आय का जरिया कुछ खास नहीं था। जीविका ने सस्टनेबल लाइवलीहुड्स एंड एडप्टेशन टू क्लाइमेट चेंज प्रोजेक्ट के तहत इसे केंद्र सरकार की पहल पर शुरू किया है। जलवायु परिवर्तन से खेती पर पड़नेवाले असर को कम करने के विकल्प के रूप में मशरूम उत्पादन को आय का जरिया बनाया गया है। इससे भूमिहीन महिला किसानों को आय का वैकल्पिक जरिया भी मिला।

    मशरूम खेती से 300 दीदीयां जुड़ीं


    जीविका के इस परियोजना से प्रखंड की 300 दीदी जुड़ी हैं। इन्हीं की पहल पर दो हजार घरों में उत्पादन करवाया जा रहा है व बिक्री का लाभ उन्हें भी दिया जा रहा है। हालांकि प्रखंड में कुल 882 महिला स्वयं सहायता समूह है। इससे लगभग 12 हजार महिलाएं जुड़ी हैं।

    मध्याह्न भोजन में होगा शामिल


    मशरूम के उत्पादन देखते हुए इसे प्रखंड के स्कूलों में मध्याह्न भोजन में शामिल किया जा सकता है। जिला परियोजना प्रबंधक मुकेश ससमल ने बताया कि इस मुद्दे पर डीडीसी राघवेंद्र सिंह से बात हुई है। आनेवाले समय में पूरे जिले के स्कूलों में मशरूम को मध्याह्न भोजन में शामिल किया जाएगा।

    इन गांवों में भी धड़ल्ले से हो रही मशरूम की खेती


    ढिंगरी मशरूमप्रजाति के मशरूम, जिसे आयस्टर भी कहते हैं, का उत्पादन किया जा रहा है। नक्सल प्रभावित पड़रिया गांव में भी मशरूम का उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा सोभ, रोही, भगहर, विंदा में मशरूम का व्यवसायिक उत्पादन हो रहा है। मशरूम उत्पादन से जुड़ी बाराडीह की कांति देवी व सोभ की राजवंती देवी ने कहा कि 500 से 700 रुपए हर महिला दैनिक कमा रही हैं।

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