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पैसा के लिए कोमा में जाने तक डॉक्टर ने नहीं किया रेफर, दो दिन के बाद हुई मौत

परिजनों का आरोप था कि डाक्टर की लापरवाही के कारण ही मनीषा और उसके बच्चे की मौत हो गयी।

Dainik Bhaskar

Jan 28, 2018, 07:44 AM IST
मनीषा की फाइल फोटो। मनीषा की फाइल फोटो।

बांका (भागलपुर). यहां के एक प्राइवेट नर्सिंग होम में जच्चा बच्चा की मौत के बाद शुक्रवार को परिजनों ने जमकर बवाल काटा। परिजनों का आरोप था कि डाक्टर की लापरवाही के कारण ही मनीषा और उसके बच्चे की मौत हो गयी। अगर समय रहते डाक्टर रेफर कर देती तो उसे बचाया जा सकता था लेकिन डाक्टर पैसे के लोभ में उसे तबतक रखा जबतक वह कोमा में नहीं चली गयी। कोमा में आने के बाद उसे रेफर कर दिया गया और अंत में इलाज के दौरान ग्लोबल हॉस्पीटल भागलपुर में उसकी मौत हो गयी।

22 जनवरी को हॉस्पिटल में कराया था एडमिट

- घटना के बाद आक्रोशित परिजन और 50-60 की संख्या में लोगों ने डॉ. सुधा देवी के क्लीनिक में तोड़-फोड़ की।

- जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची अमरपुर थाना की पुलिस ने आक्रोशित लोगों को समझाते हुए मामला शांत कराया।

- प्राप्त जानकारी के अनुसार 21 जनवरी को सुमित कुमार की पत्नी मनीषा कुमारी को प्रसव पीड़ा हुआ।

- 22 जनवरी को उसे रेफरल अस्पताल में पोस्टेड डा. सुधा कुमारी के निजी क्लीनिक में भर्ती कराया गया।

- 22 जनवरी काे डाक्टर की लापरवाही के कारण जहां बच्चे की मौत हो गयी। वहीं अत्यधिक रक्तस्राव होने के कारण मनीषा कोमा में चली गयी।

- मनीषा के काेमा में जाते ही डा. सुधा कुमारी ने आनन फानन में उसे ग्लोबल हॉस्पिटल भागलपुर रेफर कर दिया।

दो दिनों तक जीवन और माैत से जूझने के बाद तोड़ा दम

- परिजन मनीषा को लेकर ग्लोबल हॉस्पीटल भागलपुर पहुंचे। वहां डाक्टर ने बताया कि मनीषा की स्थिति नाजुक है। किसी भी समय कुछ हो सकता है।

- इलाज के दौरान डाक्टर की लापरवाही की वजह से मनीषा की हालत गंभीर होती चली गई। डाक्टर ग्लोबल अस्पताल में मनीषा को पहले भर्ती करने से ही इंकार कर रहे थे।

- परिजनों के काफी विनती के बाद मनीषा को भर्ती कराया गया। जहां दो दिनों तक जीवन और मौत से जूझने के बाद मनीषा ने 24 की देर रात दम तोड़ दिया।

आशा कार्यकर्ता ने प्राइवेट क्लीनिक में महिला को कराया था भर्ती

- थाना में डाॅ. सुधा कुमारी पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है। इसमें सुमित कुमार ने लिखा है कि मेरी शादी 2017 में मनीषा कुमारी के साथ हुई थी।

- पत्नी के गर्भवती होने के समय से डॉ. सुधा कुमारी से जांच करा रहे थे। 21 जनवरी को प्रसव पीड़ा होने पर उनके निजी क्लीनिक में ले आया।

- 22 जनवरी को आशा कार्यकर्ता ने डिलीवरी के लिए उसे डॉ. सुधा कुमार के क्लीनिक में भर्ती करा दिया। इलाज में लापरवाही के कारण बच्चे की मौत हो गयी और पत्नी मनीषा देवी कोमा में चली गई।

- मरीज को भागलपुर लेकर जाने के क्रम में डाॅक्टर से ऑक्सीजन सिलेंडर की मांग की तो देने से इंकार कर दिया। काफी विनती के बाद आक्सीजन सिलेंडर दिया गया।

- जाने वक्त कहा कि तुम मरीज को लेकर कैसे जाओगे तुम समझो। मृतका के पति ने कहा है कि वे 22 जनवरी को भागलपुर ग्लोबल नर्सिंग होम में मरीज को भर्ती करने के लिए पंहुचे।

- वहां के डॉक्टर ने मरीज को देखकर कहा कि बहुत गंभीर स्थिति है। काफी मशक्कत करने के बाद भी उसे नहीं बचाया जा सका। 24 जनवरी की रात 1.30 बजे उनकी मौत हो गई।

मामले का किया जा रहा अनुसंधान

इस मामले में थानाध्यक्ष राजकपूर कुशवाहा ने बताया कि मामले का अनुसंधान किया जा रहा है। महिला की मौत भागलपुर में हुई है और उसके अमरपुर से भागलपुर रेफर किया गया था। इन सभी मामले की जांचोपरांत दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।
-राजकपूर कुशवाहा, थानाध्यक्ष, अमरपुर

प्राइवेट क्लीनिक में हंगामा करते गांव के लोग। प्राइवेट क्लीनिक में हंगामा करते गांव के लोग।
जच्चा-बच्चा की मौत के बाद अमरपुर के निजी क्लीनिक के सामने आगजनी करते गांव के लोग। जच्चा-बच्चा की मौत के बाद अमरपुर के निजी क्लीनिक के सामने आगजनी करते गांव के लोग।
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मनीषा की फाइल फोटो।मनीषा की फाइल फोटो।
प्राइवेट क्लीनिक में हंगामा करते गांव के लोग।प्राइवेट क्लीनिक में हंगामा करते गांव के लोग।
जच्चा-बच्चा की मौत के बाद अमरपुर के निजी क्लीनिक के सामने आगजनी करते गांव के लोग।जच्चा-बच्चा की मौत के बाद अमरपुर के निजी क्लीनिक के सामने आगजनी करते गांव के लोग।
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