पटना

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सीएम ने कहा- भगवान बुद्ध की शिक्षा का धार्मिक के साथ एक वैज्ञानिक स्वरूप भी है

नीतीश ने कहा कि परम पावन दलाई लामा ने हमेशा वैज्ञानिकों को आंतरिक शांति की खोज को कहा है।

Danik Bhaskar

Jan 08, 2018, 05:00 AM IST

बोधगया. भगवान बुद्ध की शिक्षा का धार्मिक व आध्यात्मिक स्वरूप के अलावा वैज्ञानिक स्वरूप भी है। दलाई लामा भारतीय युवाओं को इस स्वरूप से वाकिफ करा रहे हैं। कालचक्र मैदान में दलाई लामा से मिलने व पुस्तक का विमोचन करने के बाद सीएम नीतीश कुमार ने उक्त बातें कही।

उन्होंने कहा कि परम पावन दलाई लामा ने हमेशा वैज्ञानिकों को आंतरिक शांति की खोज को कहा है। सच्चे अर्थों में बौद्ध दर्शन मन की क्रियाओं के विषय में खोज प्रतिबिंबित करता है, जो वैज्ञानिकता की ओर ले जाता है। यदि मानवता को जीवित रखना है, तो सुख तथा आंतरिक शांति महत्त्वपूर्ण है। हमें एक ऐसी चेतना के विकास की आवश्यकता होगी, जो हमें स्वयं ही नकारात्मक भावनाओं व क्लेशों पर नियंत्रण करने के उपाय उपलब्ध कराए। राग-द्वेष से मुक्ति मिलेगा। इसी से जीवन में सफलता है, जीवन का सही अर्थ यही है।

इस दौरान दलाई लामा ने नालंदा मास्टर पर बनी थंका चित्र उन्हें भेंट की। इससे पहले कालचक्र मैदान पहुंचने पर सीएम श्री कुमार ने दलाई लामा के पैर स्पर्श किया व खादा भेंट की। दलाई लामा ने भी गले से मिलकर खाद पहनाकर उन्हें आशीष दी। उन्होंने कहा कि नालंदा परंपरा से ही बौद्ध धर्म वैश्विक हुआ। नालंदा के अलावा बिक्रमशिला व उदंतपुरी शिक्षा के केंद्र थे। लेकिन अब नालंदा के निकट ही तेल्हाड़ा की भी खोज हुई है। उत्खनन प्रक्रिया चल रही है।

संपूर्ण नशाबंदी का काम चल रहा


मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी के बाद सूबे में संपूर्ण नशाबंदी का काम चल रहा है। दो अन्य कुरीतियों को दूर करने का प्रयास हो रहा है। इस सिलसिले में बाल विवाह व दहेज उन्मूलन को लेकर 21 जनवरी को मानव श्रृंखला बनेगी। सूबे के लोग भी जाग रहे हैं। यह सब दलाई लामा के आशीर्वाद से ही संभव हो रहा है। न्याय के साथ विकास होे रहा है।

पुस्तक के हिंदी अनुवाद से होगा लाभ

साइंस एंड फिलॉस्फी इन द इंडियन बुद्धिस्ट क्लासिक्स के पहले भाग फिजिकल वर्ल्ड का लोकार्पण हुआ है। थुपतेन जिम्पा द्वारा इसका संग्रह किया गया व दलाई लामा ने प्रस्तावना लिखा है। इसमें दलाई लामा के प्रवचन का विषय के आधार पर संग्रह है। इसका अंग्रेजी के अलावा हिंदी अनुवाद शीघ्र प्रकाशित होगी। श्री कुमार ने कहा कि हिंदी अनुवाद से लोगों को ज्यादा लाभ होगा। सामान्य लोग भी बुद्ध उपदेश की वैज्ञानिकता को जानेंगे।

कहा-नालंदा परंपरा का तिब्बत हमेशा ऋणी रहेगा

सीएम के आगमन के बाद कालचक्र मैदान में संबोधन के दौरान दलाई लामा ने गुरु-शिष्य की भेंट बताया। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी सीएम ने पटना के करूणा विहार के उद्घाटन का आमंत्रित किया था। उक्त विहार बुद्ध स्मृति पार्क में है। उन्होंने कहा कि नालंदा परंपरा का तिब्बत हमेशा ऋणी रहेगा। उसी के कारण तिब्बत में बौद्ध धर्म गया व वहां के गुरुओं के कारण उसका प्रसार हुआ। कंजूर-तंजूर तिब्बती बौद्ध साहित्य भी उन्हीं की देन है। तंत्रवाद भी नालंदा परंपरा के कारण हुआ।

सीएम ने चहारदीवारी का किया उद‌्घाटन

नीतीश कुमार कालचक्र मैदान से सीधे महाबोधि मंदिर पहुंचें। वहां मुख्य भिक्षु चालिंदा, बीटीएमसी सचिव नांजे दोरजे, सदस्य डाॅ. महाश्वेता महारथी, सुरेंद्र सिन्हा सहित अन्य ने स्वागत किया। गर्भगृह में पूजा के बाद बोधिवृक्ष के निकट वज्रासन पर फूल अर्पित किए। मंदिर परिसर की बाहरी चहारदीवारी का उद्घाटन किया। लगभग तीन करोड़ 94 लाख से इसका निर्माण किया गया है। मेडिटेशन पार्क का भी निरीक्षण किया। सीएम लगभग 25 मिनट महाबोधि मंदिर परिसर में रहे। बाद में पटना के लिए रवाना हो गए।

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