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लंदन से आकर गांव के दलितों के घरों में शौचालय बनवा रहे एनआरआई डॉक्टर

डॉ. ज्योति ने 1973 में पीएमसीएच से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की। इसके बाद 1979 में लंदन चले गए।

Bhaskar News | Last Modified - Apr 02, 2018, 05:10 AM IST

  • लंदन से आकर गांव के दलितों के घरों में शौचालय बनवा रहे एनआरआई डॉक्टर
    लंदन से आकर एनआरआई डॉ. ज्योति नारायण राय अपने गांव बक्सर के रामपुर में दलित टोले में शौचालय बनवाकर पेश की मिशाल, काम के दौरान की सहयोग के साथ।

    पटना.डॉ. ज्योति नारायण राय एनआरआई हैं। लंदन में बेटे-बेटियों के साथ पूरा परिवार वेल सेटल है। किसी चीज की कमी नहीं। लेकिन, अपनी मिट्टी से लगाव ऐसा कि अपने गांव बक्सर के चौसा प्रखंड स्थित रामपुर में गरीब परिवारों का जीवन स्तर संवारने में लगे हैं। इस कड़ी में अपने गांव के दलित टोले के 18 घरों में अपने खर्च से शौचालय बनवाकर स्वच्छता की ज्योति जलाई है। इनकी तकनीक भी आधुनिक है।

    सरकार द्वारा चलाए जा रहे शौचालय अनुदान योजना से अलग है इनकी तकनीक। अब तो गांव और आसपास के दूसरे लोग भी उनके साथ कदम में कदम मिलाकर चलने को तैयार हैं। इरादा है पहले अपने गांव के सभी जरूरतमंदों के घरों में शौचालय बनाने का, फिर आसपास के गांवों में अभियान चलाने का। सपना है, अमीर हो या गरीब किसी को भी शौच के लिए घर से बाहर खुले में नहीं जाना पड़े।


    कम खर्च में मॉडर्न फैसिलिटी वाला टॉयलेट

    बकौल डॉ. ज्योति, सरकार की शौचालय अनुदान योजना के तहत 18 हजार में शौचालय बनाने का प्रावधान है। यह राशि सरकार एक पैन व दो गड्ढे बनाने के लिए लोगों को देती है। जबकि उनकी तकनीक में एक शौचालय बनाने में 12 से 13 हजार ही खर्च आ रहा है। कुछ लोगों ने अपने घर में और जिनके घर में जगह नहीं थी उन्होंने घर के बाहर शौचालय बनवाया है। सभी शौचालयों के पाइप अंडरग्राउंड तरीके से बाहर निकाल कर मेन पाइप में मिला दिया गया है। अंडरग्राउंड पाइपलाइन के जरिए शौचालयों का सारा मलबा बड़े टैंक में गिरता है। इससे किसी घर या गली में गंदगी नहीं दिखती। सभी शौचालयों में फ्लश लगा है, जिससे घर में बदबू भी नहीं रहती।

    गांव में एक जगह बड़ा टैंक लगा है। उसकी क्षमता सौ लोगों की है। अपार्टमेंट की तर्ज पर माडर्न फैसिलिटी वाले टॉयलेट की सुविधा गांव के लोगों को मिल रही है। फिलहाल रामपुर गांव के उत्तर टोला, वार्ड नंबर 3 में पहला फेज पूरा हुआ है। जल्द ही यह अभियान दूसरे गांवों में भी चलेगा। उनके अभियान में बेटर सोसाइटी के सचिव व उनके भाई गोपाल दास व गांव के कई लोगों ने सहयोग किया। खेदन चौधरी, सत्येंद्र चौधरी, महंगू रजवार, नरेंद्र पाठक, हीरा राजभर अादि ने कहा कि डॉक्टर साहेब की पहल से उनकी जिंदगी बदल गई है।

    जानिए डॉ. ज्योति को

    डॉ. ज्योति ने 1973 में पीएमसीएच से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की। इसके बाद 1979 में लंदन चले गए। पटना के खाजपुरा शिव मंदिर के सामने स्थित आकाशवाणी रोड में घर है। लेकिन, मूल निवासी हैं बक्सर के चौसा प्रखंड के रामपुर गांव के।

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