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पुलिस लूट के छोटे मामले दर्ज नहीं करती, कहती है- क्यों कोर्ट के चक्कर में पड़ रहे

Bhaskar News | Last Modified - Feb 13, 2018, 06:43 AM IST

केस दर्ज कराने के लिए आधार कार्ड या किसी तरह के दस्तावेज की जरूरत नहीं होती है।
  • पुलिस लूट के छोटे मामले दर्ज नहीं करती, कहती है- क्यों कोर्ट के चक्कर में पड़ रहे

    पटना. शहर में अगर किसी चौराहे पर कोई बदमाश आपका पर्स या मोबाइल छीन ले, तो स्थानीय थाने में एफआईआर दर्ज कराना आसान नहीं होगा। आप एफआईआर कराने जाएंगे, तो पुलिस वाले आपको गुमराह करेंगे। कहीं आधार मांगकर तो कहीं कोर्ट का चक्कर लगाने की बात कहकर डराया जाएगा। कहेंगे- सनहा दर्ज करो। दैनिक भास्कर ने आम पाठकों से लगातार मिल रही शिकायत पर तहकीकात की, तो यही असलियत सामने आई।

    भास्कर टीम ने पाटलिपुत्र, श्रीकृष्णापुरी, बुद्धा कॉलोनी और कोतवाली थाने जाकर पर्स और मोबाइल बदमाशों द्वारा छीने जाने की शिकायत की, तो थाने में बैठे ऑन ड्यूटी अधिकारी एफआईआर दर्ज करने में भी कतराते दिखे। पाटलिपुत्र थाने में तो आधार नंबर मांगकर सनहा तक दर्ज करने से मना कर दिया गया। टीम ने ड्यूटी अफसर से बातचीत को अपने फोन में रिकॉर्ड कर लिया।

    पाटलिपुत्र थाना मेंहूबहू हुईं ये बातें

    रिपोर्टर : सर मोबाइल चोरी हो गया है।
    ड्यूटी अफसर :
    आवेदन लिखो।
    रिपोर्टर : कागज दीजिए।
    ड्यूटी अफसर:
    बगल में स्टेशनरी है। वहां से कागज खरीद लो।
    रिपोर्टर : ठीक है सर, कागज लाती हूं।
    ड्यूटी अफसर
    : नाम-पता के बाद लिखो कि मैं अपने आवास से मॉल मार्केटिंग गई। वहीं मोबाइल गिर गया।
    रिपोर्टर : लेकिन सर मेरा पर्स छीन के भाग गया, ये कैसे लिखें कि गुम हो गया।
    ड्यूटी अफसर :
    हमको जो बताना था, बता दिया। अब जो लिखना है लिखो।
    (तभी दूसरे अधिकारी ने कहा- जो छीन लिया वो तो काम का नहीं रहा। उसका मिसयूज न हो, इसलिए लॉक करा दिया जाएगा। मोबाइल का गलत इस्तेमाल भी करेगा तो दिक्कत नहीं होगी।)
    रिपोर्टर : सर लेकिन मेरा पर्स तो बदमाश छीन कर भागा है, जिसमें मेरा मोबाइल था।
    ड्यूटी अफसर :
    यही लिखना होगा कि गुम हो गया। छीनने की बात नहीं लिखनी।
    रिपोर्टर: सर आवेदन तैयार हो गया।
    ओडी अफसर :
    आधार कार्ड दो।
    रिपोर्टर : सर अभी आधार कार्ड तो नहीं है।
    ड्यूटी अफसर :
    तो फिर लौट जाओ। आधार लेकर आना तब ही सनहा दर्ज होगा।

    श्रीकृष्णापुरी थाना

    रिपोर्टर : सर जीवी मॉल से निकलते समय कोई पर्स छीनकर भाग गया। उसमें मेरा फोन था।
    ड्यूटी अफसर: :
    दिन में कैसे बैग लेकर भाग गया।
    रिपोर्टर : सर, ऑटो में बैठ रहे थे तो उसी क्रम में छीन लिया।
    ड्यूटी अफसर:
    अरे तो बोलो मिस हो गया। मिसिंग का एक आवेदन करा लीजिए।
    रिपोर्टर : सर पर्स में फोन था, आधार कार्ड और एटीएम कार्ड था।
    ड्यूटी अफसर:
    कह रहे हैं सनहा करा लीजिए।
    रिपोर्टर : एफआईआर करानी है।
    ड्यूटी अफसर:
    तो केस करना है न। तो किस पर आरोप लगाना है। पहचानती हो किसने छीना।
    रिपोर्टर : सर पर्स तो छीन कर भाग गया है ना मेरा। ये कैसे लिख दूं कि गुम हो गया है।
    ड्यूटी अफसर:
    आपको जो करना है करिए फिर। हम तो समझा दिए। केस करोगे तो फिर कोर्ट जाओगे लड़ने। चाहो लड़ो।
    रिपोर्टर : ठीक है, जैसा आप कहें।
    ड्यूटी अफसर:
    : मोबाइल का ईएमआई नंबर और कागज है।
    रिपोर्टर : नहीं सर फोन तो पुराना है। कागज तो नहीं है।
    ड्यूटी अफसर: :
    इसलिए न बोल रहे हैं सनहा करा लीजिए। लिखो- ऑटो में बैठने के क्रम में मेरा पर्स गिर कर खो गया।

    कोतवाली थाना

    रिपोर्टर : मैम, मेरा फोन चोरी हो गया।
    ड्यूटी अफसर :
    तो आवेदन दो।
    रिपोर्टर : क्या लिखना होगा आवेदन में।
    ड्यूटी अफसर:
    कैसे हुआ और कहां हुआ।
    रिपोर्टर : मौर्या लोक से अदालतगंज की ओर जा रही थी। तो बाइक पर सवार दो युवक ने पर्स छीन लिया जिसमें पैसे और मोबाइल थे।
    ड्यूटी अफसर :
    लिखकर दो जो घटना घटी।
    रिपोर्टर : मैम फार्मेट क्या होगा।
    ड्यूटी अफसर :
    लिखो कि फोन गिर गया या गुम हो गया। ये नहीं लिखो कि चोरी हो गया।
    रिपोर्टर : मैम दो युवक थे जो छीन के भागे।
    ड्यूटी अफसर :
    बाइक का नंबर है।
    रिपोर्टर : नहीं मैम नहीं है।
    ड्यूटी अफसर :
    तो लिखकर दो। जब गाड़ी का नंबर नहीं पता तो कैसे लिखा चोरी हो गया। दूसरा आवेदन लिखो कि गुम हो गया है।

    बुद्धा कॉलोनी थाना

    रिपोर्टर : सर मेरा पर्स-फोन छीन कर भाग गया है।

    ड्यूटी अफसर:कब भागा, क्या-क्या था बैग में।
    रिपोर्टर : डायरी और मेरा मोबाइल फोन था।
    ड्यूटी अफसर:
    हाथ से छीन कर भाग गया।
    रिपोर्टर : हां, स्कूटी पर बैठते समय छीनकर भाग गया।
    ड्यूटी अफसर:
    कितने लोग थे। बाइक से, क्या पहना था।
    रिपोर्टर : हां सर बाइक से थे दो लोग, ब्लू रंग जैकेट में।
    ड्यूटी अफसर:
    गाड़ी का नंबर नोट किया।
    रिपोर्टर : नहीं। चोट आ गई थी। क्या लिखें आवेदन में।
    ड्यूटी अफसर:
    क्या एफआईआर ही न करनी है।
    रिपोर्टर : सर कोई कागज भी देना होगा इसके साथ।
    ड्यूटी अफसर :
    हां आधार कार्ड और फोन का कागज।
    रिपोर्टर: सर फोन तो पुराना है। कागज तो नहीं है।
    ड्यूटी अफसर:
    तब तो एफआईआर में दिक्कत होगी। तब तो आपको सनहा कराना होगा।
    रिपोर्टर : ठीक है सर कागज दे दीजिए।
    ड्यूटी अफसर:
    हां देते हैं लीजिए।
    रिपोर्टर :सर क्या लिखें आवेदन में।
    ड्यूटी अफसर:
    लिखना होगा कि मेरा फोन गुम हो गया और बहुत कोशिश के बाद भी नहीं मिला।
    रिपोर्टर : सर तरीका बता दीजिए।
    ड्यूटी अफसर:
    लिखो कि मैं मॉल से निकलकर बोरिंग रोड के पास जा रही थी। उसी क्रम में मेरा मोबाइल और पर्स कहीं गिर गया।
    रिपोर्टर : सर आवेदन पूरी हो गई।
    ड्यूटी अफसर:
    इसकी फोटो कॉपी करवा लीजिए।
    रिपोर्टर : सर, ये रही फोटो कॉपी।
    ड्यूटी अफसर:
    परेशान न हो, मोबाइल फिर आ जाएगा।

    सीधी बात : राजेश कुमार, सेंट्रल रेंज के डीआईजी

    - क्या एफआईआर कराने के लिए आधार कार्ड जरूरी है
    - केस दर्ज कराने के लिए आधार कार्ड या किसी तरह के दस्तावेज की जरूरत नहीं होती है।
    - स्नेच या झपटने की शिकायत करने पर केस दर्ज नहीं होता
    - चोरी, स्नेचिंग या किसी तरह की शिकायत लेकर जाने वालों पीड़ितों की पूरी बात पुलिस को सुननी होगी।
    - क्या करना चाहिए ड्यूटी अफसर को
    - पुलिस को पहले घटनास्थल पर जाना चाहिए। मामले की जांच करनी चाहिए फिर केस दर्ज करना चाहिए।
    - केस करने जाने पर थाने में कोर्ट की बात कर डराया जाता है
    डीआईजी- किसी तरह का घटना होने पर पीड़ित को केस दर्ज कराने का अधिकार है। कोर्ट जाने की बात कहकर पीड़ित को डराना गलत है। जब अपराधी गिरफ्तार होंगे और सुनवाई होगी तो पीड़ित कोर्ट में जाएंगे।
    - कई थानों में कागज भी नहीं देते
    - सभी थानों को कागज और कलम दिया गया है। अगर कोई थाना में आता है तो उसे कागज और कलम देना होगा।

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Web Title: Patna Police Refuses To Register Small Cases Of Loot
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