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पीयू छात्रसंघ : शपथ लेने से पहले ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव रद्द

पीयू प्रशासन ने जैसे ही मंगलवार को फैसला सार्वजनिक किया, कैंपस में बवाल शुरू हो गया।

Dainik Bhaskar

Mar 14, 2018, 03:37 AM IST
दिव्यांशु भारद्वाज और योशिता पटवर्धन। दिव्यांशु भारद्वाज और योशिता पटवर्धन।

पटना. पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव के एक माह के भीतर ही चुने गए अध्यक्ष दिव्यांशु भारद्वाज और उपाध्यक्ष योशिता पटवर्धन का निर्वाचन रद्द कर दिया गया है। दोनों ने शपथ भी नहीं ली थी कि उनकी उम्मीदवारी को लेकर शिकायत पहुंच गई। तब पीयू प्रशासन ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर जांच कराई। इसमें दिव्यांशु और योशिता को दोषी पाया गया। दिव्यांशु निर्दलीय लड़े थे जबकि योशिता एबीवीपी की उम्मीदवार थी। इस बाबत वीसी प्रो. रासबिहारी सिंह ने बताया कि इन पदों के लिए अब दुबारा चुनाव नहीं होगा। महासचिव सुधांशु भूषण झा ही प्रभारी अध्यक्ष होंगे।

दोनों पर क्या है आरोप

- दिव्यांशु भारद्वाज के खिलाफ शिकायत थी कि उन्होंने एक सत्र में ही दो संस्थानों में दाखिला लिया है। 2014-17 सत्र में ही दिव्यांशु ने बीएन कॉलेज और हिमालयन यूनिवर्सिटी में नामांकन लिया था।
- योशिता पटवर्धन के खिलाफ शिकायत थी कि उन्होंने फर्स्ट इयर में एक विषय में फेल होने के बाद भी नामांकन किया। लिंगदोह कमेटी के नियमों के मुताबिक एकेडमिक एरियर वालों के चुनाव लड़ने पर रोक है।

छात्रसंघ चुनाव के नतीजों के बाद तीन उम्मीदवारों के खिलाफ आई थी शिकायत

पटना विवि छात्रसंघ में तीन उम्मीदवारों के खिलाफ लिखित शिकायत विवि प्रशासन को चुनाव नतीजों की घोषणा के बाद की गई थी। इन मामलों की जांच के लिए कुलपति प्रो. रासबिहारी सिंह ने प्रतिकुलपति डॉ. डॉली सिन्हा, डॉ. कृतेश्वर प्रसाद और डॉ. श्रीकांत सिंह की कमेटी बनाकर जांच का निर्देश दिया था। कमेटी ने तीनों शिकायतों के आधार पर अपना फैसला पीयू प्रशासन को सोमवार को सौंप दिया। उसके आधार पर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर चुने गए उम्मीदवारों का निर्वाचन रद्द किया गया। इसके बाद अब दोबारा चुनाव नहीं होगा। महासचिव ही पुसू के प्रमुख रहेंगे। कुलपति प्रो. रासबिहारी सिंह ने बताया कि इन निर्वाचन के रद्द होने के बाद दोबारा चुनाव नहीं होगा। स्टेच्युट के अनुरूप महासचिव पद पर चुने गए सुधांशु भूषण झा ही प्रभारी अध्यक्ष होंगे।

मो. चांद के खिलाफ शिकायत

संयुक्त सचिव पद पर निर्वाचित मो. असजाद चांद के खिलाफ शिकायत आई थी कि तय सीमा से अधिक वर्षों तक वे पीयू के विद्यार्थी रहे हैं। प्रावधान है कि स्नातक और स्नातकोत्तर के सामान्य पाठ्यक्रमों को अधिकतम पांच वर्ष में पूरा करने वाले विद्यार्थी ही चुनाव लड़ सकेंगे। शिकायत में कहा गया था कि मो. चांद ने पांच वर्ष सिर्फ स्नातक में ही लगा दिए हैं। जांच कमेटी ने मो. चांद के मामले की जांच के बाद उसे क्लीन चिट दे दी। कुलपति प्रो. रासबिहारी सिंह ने बताया कि शिकायतकर्ता ने अपने हस्ताक्षर सही नहीं किए थे। इसके बावजूद कमेटी ने जांच कर रिपोर्ट दी है।

फैसला आते ही बवाल शुरू
पीयू प्रशासन ने जैसे ही मंगलवार को फैसला सार्वजनिक किया, कैंपस में बवाल शुरू हो गया। दिव्यांशु भारद्वाज और योशिता पटवर्धन के समर्थकों ने कुलपति और पीयू प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया। बाद में कुलपति आवास पर उनकी मुलाकात कराई गई। कुलपति ने समर्थकों से कहा कि जो भी हुआ है नियमानुसार हुआ है। वहीं विरोधी गुट के छात्र संगठनों ने भी कुलपति से मुलाकात कर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।

चुनाव समिति पर कार्रवाई क्यों नहीं
पटना विवि प्रशासन ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का निर्वाचन तो रद्द कर दिया लेकिन प्रो. पीके पोद्दार की अध्यक्षता में बनी पूरी चुनाव समिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दिव्यांशु भारद्वाज का मामला तो यूनिवर्सिटी के बाहर का था लेकिन योशिता पटवर्धन को जिन आरोपों के बाद उपाध्यक्ष पद से हटाया गया है, वो यूनिवर्सिटी का आंतरिक मामला था। अगर योशिता का नामांकन नियमों के अनुरूप नहीं था तो चुनाव समिति ने चुनाव लड़ने की अनुमति क्यों दी। चुनाव समिति पर उठे सवालों के बीच आइसा के राज्य सचिव आकाश कश्यप ने पूरे चुनाव को ही रद्द करने की मांग की है।

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दिव्यांशु भारद्वाज और योशिता पटवर्धन।दिव्यांशु भारद्वाज और योशिता पटवर्धन।
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