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हनी ट्रैपिंग के बाद अब साॅफ्ट लूट के जाल में फंस रहे लोग; लोग परेशान, पुलिस भी हैरान

कार्रवाई के तौर पर बैंकों व पुलिस थानों का चक्कर लगाने के बाद भी उनकी स्थिति किसी हारे जुआरी से कम नहीं होती।

​कृष्णकांत मिश्र | Last Modified - Feb 15, 2018, 06:29 AM IST

  • हनी ट्रैपिंग के बाद अब साॅफ्ट लूट के जाल में फंस रहे लोग; लोग परेशान, पुलिस भी हैरान

    बेतिया.हाल ही में इश्क के मायाजाल में फंसाकर मोटी रकम की उगाही करने वाले हनी ट्रैपिंग के नेटवर्क से जिला अभी बाहर ही निकला था कि अब साफ्ट लूट के जरिए बड़ी आसानी से लोगों को टार्गेट कर उनसे मोटी रकम की उगाही घर बैठे की जा रही है। पश्चिम चंपारण जिले में साफ्ट लूट का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। साइबर क्राइम के नाम से प्रचलित इस लूट की घटना के शिकार आम आवाम के साथ प्रबुद्ध लोग भी हो जा रहे है।

    अव्वल यह की उन्हीं से पूछ कर उन्हें लूट लिया जाता है और इसकी जानकारी जबतक उन्हें होती है वे लाखों गवां चुके होते है। कार्रवाई के तौर पर बैंकों व पुलिस थानों का चक्कर लगाने के बाद भी उनकी स्थिति किसी हारे जुआरी से कम नहीं होती। लेकिन बैंक प्रबंधन, सरकार, प्रशासन की ओर से बार-बार चेतावनी के बाद भी वे इस झांसे में आ ही जाते है। आंकड़े के मुताबिक जिले में साफ्ट लूट की घटनाओं में खासा इजाफा हो रहा है।

    ये हैं साॅफ्ट लूट सह साइबर क्राइम के तरीके

    1. एटीएम की अदला बदली कर एेसी घटनाओं को अंजाम दिया जाना
    2. फोन कर ओटीपी, पिन, एटीएम नंबर व आधार कार्ड की जानकारी लेना
    3. मोबाइल चोरी के माध्यम से भी ऐसी घटनाआें को धड़ल्ले से अंजाम दिया जा रहा है।

    4. मैग्नेटिक स्ट्रीप,साइबर अपराधी इस स्ट्रीप को चोरी छिपे एटीएम में लगा देते है। जिसकी वजह से कार्ड तो काम करता है लेकिन रुपया नहीं निकल पाता, उधर जैसे ही खाताधारक बाहर निकलता है मैग्नेटिक स्ट्रीप निकाल लिया जाता है जिसके तुरंत बाद खाताधारक द्वारा निकली गई राशि जो उसे भुगतान नहीं हुई थी, उसे एटीएम भुगतान कर देता है और वह अपराधी के हाथ लग जाता है।

    यहां बोलते हैं आंकड़े

    - दिसंबर 2017 - नरकटियागंज न्यू स्वदेशी चीनी मिल के कर्मी ऋषिपाल सिंह के खाते से सात दिनों में दस-दस हजार कर कुल 70 हजार रुपयों की निकासी कर ली गई। शिकारपुर में दर्ज है प्राथमिकी।
    - जनवरी 2018 - शिकारपुर थाना के सुगौली गांव निवासी सुखराम पंडित के खाते से जनवरी के प्रथम सप्ताह में एक लाख 59 हजार की निकासी कर ली गई। शिकारपुर में दर्ज है प्राथमिकी।

    - जनवरी 2018 - अमरेश पड़ित के खाते से तीस हजार की निकासी कर ली गई। शिकारपुर में दर्ज है प्राथमिकी।
    - 2 फरवरी 018 - वन प्रमंडल के वन पदाधिकारी वीरेंद्र कुमार के खाता से तीस हजार रुपए की निकासी कर ली गई।

    पुलिस तक नहीं पहुंच पा रहे सत्तर प्रतिशत मामले

    पब्लिक से पूछकर उन्हीं को लूटने का यह नायाब तरीका घर बैठे एक फोन पर किया जा रहा है। इससे पीड़ित लोग बैंकाें से पूछताछ करके ही हार मान ले रहे है। जांच के क्रम में यह ज्ञात हुआ है कि अधिकांश मामलों की जानकारी पुलिस तक को भी नहीं हो पा रही है। छोटे मोटे लूट के शिकार लोग तो इसे अपनी बदनसीबी व नासमझी समझ ही चुप रह जा रहे है तो कई रसुखदार लोग इज्जत की दुहाई दे चुप्पी साधे हुए है। एसपी जयंतकांत ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए कहा है कि इस प्रकार के सतर प्रतिशत मामलों की जानकारी पुलिस को नहीं हो पा रही है। साथ ही कहा कि बैंक को जब खाते में कोई गड़बड़ी दिखाई देता तो वह खाताधारक कोे बैंक आने पर जानकारी देते हैं।

    एसपी जयंतकांत ने ऐसे अपराधियों से बचने के बताए हैं कुछ उपाय
    1. खरीददारी करते समय कार्ड को ढक कर रखना होगा।
    2. मोबाइल पेमेंट में भी सतर्कता बरतनी होगी, ताकि कोई ओटीपी व पिन न जान पाए
    3. सोशल साइट पर मोबाइल नंबर कतई न डाले
    4. आधार, पिन, एटीएम नंबर, कोड व खाता नंबर की जानकारी किसी को न दे।
    5. शापिंग करने वाले मोबाइल नंबर पर ओटीपी नहींं रखे।


    बैंक भी दे रहे एहतियात बरतने की नसीहत
    सेंट्रल बैंक के प्रबंधक अभिषेक कुमार झा ने बताया कि बैंक से कभी भी फोन कर किसी भी खाताधारक से पिन, एटीएम नंबर, आधार नंबर व खाता नंबर की जानकारी नही ली जाती। जब भी कही से किसी भी बैंक के नाम से फोन जाए तो खाताधारक सावधान हो जाए। ये फर्जी होते हैं।

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