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तकनीकी शिक्षा में अब क्लासरूम लर्निंग पर क्रेडिट कम, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर जोर

यूजीसी की ओर से गैर तकनीकी कॉलेजों में स्किल डेवलपमेंट के लिए ट्रेनिंग प्रोवाइडर को बुलाया जाएगा।

Danik Bhaskar | Jan 22, 2018, 04:39 AM IST

पटना. अगले पांच वर्षों में तकनीकी शिक्षा की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। पूर्ण रूप से दक्ष युवाओं को तैयार करने के लिए मानव संसाधन विकास विभाग के निर्देश पर एआईसीटीई ने वर्ष 2022 तक का प्लान बनाया है। तकनीकी संस्थानों के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और गैर तकनीकी संस्थानों के लिए विवि अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से योजना बनाई गई है। इसके तहत अगले पांच वर्षों में एक करोड़ युवाओं को रोजगार के लायक बनाया जाएगा। इनमें 50 लाख प्रोफेशनल कॉलेजों से तथा 50 लाख नॉन प्रोफेशनल कॉलेजों से होंगे। हर साल 10 लाख युवाओं को दक्ष बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

बदलाव के लिए 4 महत्वपूर्ण कदम

एआईसीटीई के प्लान में सबसे अहम है क्लासरूम लर्निंग से क्रेडिट को कम किया जाएगा। प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर जोर दिया जाएगा। एमएसएमई, ईसीआई, इंटरशाला तथा अन्य ऑर्गेनाइजेशन के साथ इंटर्नशिप को अनिवार्य किया गया है। सबसे अहम है कि तकनीकी शिक्षा के कोर्स को डिजाइन करने में इंडस्ट्री को शामिल किया जाएगा। ताकि संस्थानों में पढ़नेवाले छात्र इंडस्ट्री की उम्मीदों पर खरा उतर सकें। इसके अलावा एम्पलॉयबिलीटी इनहेंसमेट ट्रेनिंग प्रोग्राम को और बढ़ावा दिया जाएगा। बता दें कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से देशभर में युवाओं को रोजगार के लायक बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत अगले पांच वर्षों में करीब डेढ़ करोड़ रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में रोजगार के लायक युवाओं की जरूरत होगी। 18 से 23 साल की उम्र के युवाओं को इस श्रेणी में रखा गया है। वर्ष 2017 तक के आंकड़ों के अनुसार अभी 18-23 साल की उम्र के 14.9 करोड़ युवा हैं।

नॉन वर्कर की संख्या बढ़ रही

आंकड़ों के अनुसार नॉन वर्कर युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले 10 वर्षों में लगभग 4 प्रतिशत नॉन वर्कर युवाओं की संख्या बढ़ी। सेंसस के आंकड़ों के अनुसार 2011 में 40 प्रतिशत युवा नॉन वर्कर की श्रेणी में थे। जबकि वर्ष 2001 में यह आंकड़ा 37.5 प्रतिशत था। पिछले सात वर्षों में इसमें और वृद्धि होने का अनुमान है। सबसे चौंकानेवाली बात है कि नॉन वर्कर की श्रेणी में जितने युवा हैं उनमें से आधे रोजगार के लायक भी नहीं हैं। इसे 20 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो को 2020-21 तक 30 तक करने का लक्ष्य रखा गया है।

गैर तकनीकी कॉलेजों में स्किल ट्रेनिंग

यूजीसी की ओर से गैर तकनीकी कॉलेजों में स्किल डेवलपमेंट के लिए ट्रेनिंग प्रोवाइडर को बुलाया जाएगा। मार्केट के अनुसार जो भी स्किल जरूरी है उसे छात्रों को दिया जाएगा। पहले इसे 5 हजार कॉलेजों में शुरू किया जाएगा। बाद में 30 हजार संस्थानों में इसे ले जाया जाएगा। इसके अलावा कॉलेज से बाहर रहनेवाले युवाओं के लिए भी स्किल्ड करने की योजना बनाई गई है।