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बिहार में यहां हो रही स्ट्रॉबेरी की खेती, देखने को साउथ अफ्रीका से पहुंचे प्रोफेसर

इस दौरान उनके साथ साउथ अफ्रीका से पहुंचे प्रोफेसर अजय शंकर सिंह भी थे।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 08, 2018, 04:18 AM IST

  • बिहार में यहां हो रही स्ट्रॉबेरी की खेती, देखने को साउथ अफ्रीका से पहुंचे प्रोफेसर

    औरंगाबाद.यहां के एक गांव में लगी स्ट्रॉबेरी की फसल को देखने के लिए रविवार को औरंगाबाद के एडीजे दयाशंकर सिंह अपने फैमिली के साथ पहुंचे। इस दौरान उनके साथ साउथ अफ्रीका से पहुंचे प्रोफेसर अजय शंकर सिंह भी थे। दोनों स्ट्रॉबेरी की खेती देखकर काफी खुश हुए और किसानों की नवीनतम तकनीक की सराहना की।

    वहीं किसानों से फसल के नर्सरी से लेकर लागत व आमदनी तक के बारे में विस्तार से पूछताछ की। एडीजे ने कहा कि स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे किसान जिले के किसानों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन गए हैं। इन किसानों की तरह अन्य किसानों को भी इस तरह की खेती करनी चाहिए। जिससे उनकी आमदनी में बढ़ोतरी होगी।

    कई बीमारियों से लड़ने में सक्षम है स्ट्राॅबेरी

    व्यवहार न्यायालय के एडीजे के साथ में पहुंचे साउथ अफ्रीका से प्रो अजय शंकर सिंह ने बताया कि स्ट्रॉबेरी में एनिमिया, डायबिटीज, गैस व गुर्दे सहित अन्य बीमारियों से लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता है। स्ट्रॉबेरी के 100 ग्राम फल में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन बी व सी की प्रचुर मात्रा होती है। उन्होंने कहा कि परंपरागत खेती करने से किसानों को लाभ की जगह पर नुकसान भी होता है। ऐसे में किसान कर्ज के बोझ से दब जाते हैं और गलत कदम उठा लेते हैं या फिर खेती करना छोड़ देते हैं। इसलिए किसानों को परंपरागत खेती के बजाय औषधीय खेती अपनाना चाहिए। औषधीय फसल उपजाकर किसान खुशहाल हो सकते हैं। उन्होंने किसानों को सरकार के द्वारा चलाई जा रही कृषि से संबंधित कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने की बात कही।

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