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रामचरितमानस ग्रंथ नहीं, विश्व का हृदय है और वर्तमान में यही पर्याप्त है: मोरारी बापू

मोरारी बापू ने गीत, भजन व कीर्तन के बीच संगीतमय राम कथा के जरिए लोगों में भक्ति का संचार किया।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 09, 2018, 05:04 AM IST

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    प्रवचन करते मोरारी बापू।

    सीतामढ़ी.प्रसिद्ध राम कथा वाचक मोरारी बापू ने सोमवार को कथा के तीसरे दिन कहा कि हो सकता है कि आने वाले समय में कोई और धर्मग्रंथ आ जाए, लेकिन वर्तमान दौर में रामकथा व रामचरितमानस पर्याप्त है। रामचरित मानस ग्रंथ नहीं विश्व का हृदय है। शहर से सटे खड़का स्थित मिथिला धाम में मोरारी बापू ने गीत, भजन व कीर्तन के बीच संगीतमय राम कथा के जरिए लोगों में भक्ति का संचार किया। उन्होंने सुखी जीवन के उपाए भी बताए।


    माता सीता के बताए 12 नाम, कहा-सीता को नहीं था शास्त्रार्थ मंजूर

    उन्होंने माता सीता पर चर्चा की। कहा - जीवन हृदय सराहत सिय लोनाई गुर समीप गवने दोउ भाई, सिय मुख छवि बिधु ब्याज बखानी, गुर पहि निसा बड़ी जानी। उन्होंने कहा की सीता के 12 नाम है। मैथली, जानकी, सीता, वैदेही जनकात्मजा, कृपा-पियूष, जलधिरि, प्रियारहाराम, वल्लभा, सूनैनासुता व बिलशुल्का। यह भी बताया कि कौन-कौन से लोग माता सीता को किस नाम से बुलाते थे। भगवान रामचंद्र सुनैना नाम से बुलाते थे, कभी कभी इस नाम से मिथिला नरेश भी बुलाते थे। बताया की हनुमान चालीसा में भी एक जगह यह सूक्ष्म रूप में आया है। राजा जनक के दरबार में रोज शास्त्रार्थ होता था और उसका विरोध करने वाली कोई एक महिला थी तो वह माता जानकी थी। पहले जब शास्त्रार्थ में कोई हार जाता था उसे जल समाधि दे दी जाती थी। सिया को जनक के दरबार के शास्त्रार्थ की पद्धति अच्छी नहीं लगती थी।

    माता जानकी परमविद्या थी, जिसका कभी नाश संभव ही नहीं

    बापू ने कहा की माता जानकी परमविद्या थी। प्रभु राम ने तो वशिष्ठ गुरु से शिक्षा ली थी। लेकिन माता जानकी परमविद्या थी। परमविद्या को कभी कलंक नहीं लग सकता है। परमविद्या माता जानकी हैं, जिसका कभी नाश नहीं हो सकता है। यह विद्या जमीन से निकलती है। उन्होंने कहा कि उपनिषद के अनुसार माता-सीता सीतोपनिषद‌् है। उन्होंने कुंभज ऋषि के आश्रम में सती व शिव के आगमन, कुंभज ऋषि द्वारा पूजा अर्चना और फिर रामचरित्र मानस कथा का कुंभज ऋषि के मुखारविंद से पान के प्रसंगों पर चर्चा की। सीता व मांडवी के चरित्र को राम व भरत के समान बताया। सावित्री व सत्यवान तथा नचिकेता प्रसंग पर भी चर्चा की। हलेष्टि यज्ञ पर भी चर्चा की।

    लव-कुश ने राम दरबार में संपूर्ण राम लीला का किया था गायन

    मोरारी बापू ने कहा कि वाल्मीकि रामायण व लव कुश पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि रामायण के परफेक्ट छात्र थे लव-कुश। लव-कुश राजा राम के दरबार में पहुंच संपूर्ण राम लीला का गायन राम के ही सामने करते रहे। लेकिन वह यह नहीं जानते थे कि जिस राम की कथा वाल्मीकि जी ने पढ़ाई है, ये वही राम हैं। इसलिए वे परफेक्ट छात्र हैं।

    अक्ल की सुनो, दिल जो कहे वही करो, जिस सभा में आपके सिद्धांतों का खंडन हो, उस सभा को तुरंत छोड़ देना चाहिए

    राम कथा के जरिए भक्ति का प्रसार कर जीवन की राह सीखाते हुए मोरारी बापू ने कहा की मेरी राम कथा जीवन जीने की पाठशाला है, मैं नवजीवन दूंगा। उन्होंने कहा कि अक्ल और दिल जब अपनी करे खुमार, अक्ल की बात सुनो, लेकिन दिल जो कहे वही करो। कहा की चेहरे पर तेज हो व आंख में आंसू तो समझो आदमी ठीक है। जिस सभा में आपके सिद्धांतों का खंडन हो वह सभा तुरंत छोड़ देना चाहिए। कहा की फूल को नष्ट किया जा सकता है खुशबू को नहीं। कोई फूल का मालिक हो सकता है खुशबू का नहीं, खुशबू फैलता रहा है और फैलता रहेगा। जिन्हें बगीचे में पैर रखना भी नहीं आता वह फूलों से बात कर रहे हैं। उन्होंने माना की धर्म की आड़ में कुछ लोग गलत कर रहे हैं। उन्होंने जोश भरते हुए कहा - बहुत मुश्किल है उस शख्स को गिराना जिसे सीखाया है ठोकरों ने चलना। कहा - जिसको प्यार करो उस पर भार नहीं डालो, जो शेष है वही विशेष है। जो भेष मेरा साईं भेजे वही भेष मेरा है।

    राजपुरुष व ऋषि पुरुष को अपने अपने काम करने चाहिए

    मोरी बापू ने कहा की राजपुरुष व ऋषि पुरुष को अपने-अपने कर्म करने चाहिए। अगर ये दोनों परस्पर एक-दूसरे का काम करने लगे एक ऐसी कुव्यवस्था उत्पन्न होगी जो कई पीढ़ियों तक खत्म नहीं होगी। अत: दोनों को अपने ही कर्म करने चाहिए। राजपुरुष को राज चलाना चाहिए और ऋषि पुरुष को शासन (सिद्धांत)।

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    रामकथा के दौरान भीड़।
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    राम कथा में भाग लेने पहुंचीं शिवहर सांसद रमा देवी।
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    महाप्रसाद के लिए लगी कतार।
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Web Title: Rama Katha By Morari Bapu In Sitamarhi Of Bihar
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