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धर्म के नाम पर संवाद होना चाहिए, अापस में विवाद नहीं: मोरारी बापू

राम कथा वाचक मोरारी बापू ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भक्ति में जात-पात का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 07, 2018, 06:28 AM IST

  • धर्म के नाम पर संवाद होना चाहिए, अापस में विवाद नहीं: मोरारी बापू

    सीतामढ़ी /मुजफ्फरपुर.श्रीराम कथा मर्मज्ञ मोरारी बापू ने कहा कि धर्म के नाम पर हर जगह आपस में संवाद होना चाहिए। धर्म में विवाद का कोई स्थान ही नहीं है। वह शनिवार को शहर के सूतापट्टी में संवाददाताओं से बात कर रहे थे। मोरारी बापू ने कहा कि धर्म की आड़ में कई जगहों पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जा रही है। यह नहीं होना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि हर युग में स्त्री का सम्मान होता रहा है। मानव से देवता तक नारी का सम्मान करते रहे हैं। जैसे राम के नाम के पहले सीता और शंकर के नाम के पहले पार्वती आदि की वंदना होती है। लेकिन, हाल में कुछ जगहों पर महिलाओं के साथ हुई घटनाएं शर्मनाक हैं। वहीं, सीतामढ़ी के खड़का में नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा का मोरारी बापू ने शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने रामचरित्र मानस पर चर्चा की।

    उन्होंने कहा कि रामचरित्र मानस केवल धर्मग्रंथ नहीं बल्कि मानस की एक-एक पंक्ति साधना व एक-एक शब्द ब्रह्म है। इसका अध्ययन करें, अध्यापन, चिंतन व मनन करें। सबका निदान है राम चरित्र मानस। ऐसे में सबकों मानस की उपासना करनी चाहिए। परमात्मा की कृपा से हमें ऐसा सदग्रंथ मिला है। उन्होंने कहा कि धर्म का मतलब वाद-विवाद व अपवाद नहीं बल्कि संवाद है। श्रीमद्भागवत गीता हो, वेद या रामचरित्र मानस या उपनिषद, सबमें संवाद है। संवाद से ऊर्जा बढ़ती है, विवाद से ऊर्जा कम होती है।

    धर्म में बढ़ती रुचि से समाज में बदलाव संभव

    राम कथा वाचक मोरारी बापू ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भक्ति में जात-पात का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। अच्छे काम करने वालों की कोई जाति नहीं होती। चाहे उसने जन्म कहीं भी क्यों न लिया हो? श्रीरामचरित मानस के बारे में उन्होंने कहा कि सनातन हिंदू धर्म में कई धर्मशास्त्र हैं। लेकिन, मानस प्रेम शास्त्र है। इसमें श्रीराम कथा का प्रेम यज्ञ समाहित है। समुद्र में 14 प्रकार का रत्न होता है, लेकिन मानस में 14 लाख रत्न हैं।

    पिछले कुछ वर्षों में कथा और धार्मिक कार्यों के प्रति लोगों की रुचि काफी बढ़ी है। धर्म में बढ़ती रुचि से समाज में बदलाव संभव है। इसके लिए हर व्यक्ति को मन की शांति के लिए 24 घंटे में कम से कम 10वां हिस्सा ईश्वर आराधना में लगानी चाहिए। युवाओं को इसके जरिए भविष्य संवारने के लिए समय निकालना चाहिए। संवाददाता सम्मेलन के दौरान उनके साथ रामकथा समिति के संरक्षक रमेशचंद्र टिकमानी भी थे।

    अखबार पढ़ कर लेते हैं देश-दुनिया की खबर

    मोरारी बापू प्रतिदिन सुबह 4 बजे जाग जाते हैं। पूजा आदि के बाद नाश्ता से सभी प्रमुख अखबार पढ़ कर देश-दुनिया की खबरों से वाकिफ होते हैं। शाम में हर दिन हवन-यज्ञ करते हैं। रात को 4 से 5 घंटे सोते हैं। देश-दुनिया की प्रेरणादायक कहानियां और कविताएं रात को ही पढ़ते हैं। प्रतिदिन दो घंटे श्रीरामचरित मानस और गीता का अध्ययन करते हैं।

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Web Title: Ramaktha In Sitamarhi Bihar By Morari Bapu
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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