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70 सालों के बाद संक्रांति पर बन रहा दुर्लभ संयोग, राशियों के अनुसार ये करें दान

मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं

Danik Bhaskar | Jan 15, 2018, 04:14 AM IST
मकर सक्रांति के मौके पर बाजार में  लगीं तिलकुट की दुकानें। मकर सक्रांति के मौके पर बाजार में लगीं तिलकुट की दुकानें।

गोपालगंज (बिहार). मकर संक्रांति का त्योहार हर साल सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के अवसर पर मनाया जाता है। इस बार सूर्य देव मकर राशि में14 जनवरी की रात्रि 8 बजकर 19 मिनट पर धनु राशि त्याग कर मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं। पंडित रंजन उपाध्याय के अनुसार इस दिन अमावस्या होने की वजह सें यह संयोग 70 वर्षों के बाद बन रहा है। इसके पहले वर्ष 1948 में सूर्य अर्द्धरात्रि के बाद 12 बजकर 9 मिनट पर मकर राशि में आया था तब भी 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाया गया था और उस दिन भी अमावस्या तिथि ही थी।


मकर संक्रांति का महत्व

पंडित रंजन उपाध्याय ने बताया कि संक्रांति के दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से मिलने स्वयं उनके घर जाते हैं। शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं। इसलिए मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इस दिन सूर्य के उतरायण होते हैं यानी उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य की ओर। मकर संक्रांति के बाद मांगलिक कार्यो पर लगा प्रतिबंध भी खत्म हो जाता है।

मांगलिक कार्यों पर लगा प्रतिबंध अब खत्म हो जाएगा

गणना के अनुसार हर साल सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में आने का समय करीब 20 मिनट बढ़ जाता है इसलिये करीब 72 साल के बाद एक दिन के अंतर पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है।

चुड़ा-दही के साथ तिलकुट खाने की परंपरा

मकर संक्रांति को लेकर बाजारों में चहल पहल बढ़ी हुई है। शनिवार तथा रविवार को बाजारों में संक्रांति के सामानों के सामानों की खरीदारी की गई। महंगाई के इस दौर में लोग अपने धर्म व रीति रिवाजों के अनुसार चुड़ा व दही के साथ तिल का जुगाड़ किए हैं। ठंड के बावजुद मकर संक्रांति के दौरान शहर के चौक चौराहों पर तिलकुट की दुकाने भी सजी हुई हैं। तिलकुट की कीमत पिछले साल के मुकाबले इस साल काफी बढ़ी हुई है। इस साल तिलकुट 180 रुपये से लेकर 350 रुपये प्रतिकिलो की दर से उपलब्ध है। इस दिन कहीं-कहीं पतंगबाजी की भी परंपरा है। दही-चुड़ा खाने के बाद लोग पतंगबाजी का आनंद लेते हैं।

राशियों के अनुसार दान

- मेष- दर्पण, मच्छरदानी, तिल का दान।

- तुला- गुड़, तिल, तेल और चावल।

- वृश्चिक- दूध, दही ,तिल सामग्री।

- धनु- तिल ,तेल, हल्दी।

- मकर - उड़द दाल ,सरसों तेल, राई।

- मीन गुड़ ,गेंहु , साबुदाना , कंबल।

- वृष - उनी वस्त्र , अनाज ,तिल।

- मिथुन - कंबल ,उनी वस्त्र, तिल के ल़ड्डु।

- कर्क- साबुदाना ,शहद।

- सिंह - चने की दाल ,घी ,गाय को चारा।

- कन्या - गर्म वस्त्र ,चादर।

ये भी हैं मान्यताएं

- मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं
- मान्यता यह भी है कि इस दिन यशोदा जी ने श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिए व्रत किया था।
- माना जाता है कि आज से 1000 साल पहले मकर संक्रांति 31 दिसंबर को मनाई जाती थी। पिछले एक हज़ार साल में इसके दो हफ्ते आगे खिसक जाने की वजह से 14 जनवरी को मनाई जाने लगी।