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झारखंड के बूढ़ा पहाड़ पर सुरक्षा बलों का एक्शन, बिहार में नक्सलियों का रिएक्शन

चर्चा यह भी है कि भाकपा(माओवादी) के कई बड़े कमांडर बूढ़ा पहाड़ के आसपास शरण लिए बैठे हैं।

Dainik Bhaskar

Dec 22, 2017, 05:35 AM IST
reaction of Maoists in Bihar

पटना. जमालपुर-किऊल रेलखंड पर मसूदन स्टेशन पर माओवादियों का हमला सामान्य नहीं था। यह झारखंड के बूढ़ा पहाड़ पर सुरक्षा बलों की बढ़ती दबिश का रिएक्शन है। खुद भाकपा(माओवादी) ने इसे स्वीकार किया है। दरअसल माओवादियों के खिलाफ ऑपरेशन ग्रीन हंट और मिशन 2017 से माओवादियों की परेशानी बढ़ी है। बूढ़ा पहाड़ माओवादियों के ऑपरेशन सेंटर के तौर पर माना जाता है। चर्चा यह भी है कि भाकपा(माओवादी) के कई बड़े कमांडर बूढ़ा पहाड़ के आसपास शरण लिए बैठे हैं। सुरक्षा बलों ने एंटी नक्सल ऑपरेशन की रणनीति के तहत अब उस इलाके की घेराबंदी शुरू की है।


पिछले एक-दो महीने से वहां ऑपरेशन जारी है। सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए माओवादियों ने उस इलाके में कई लैंड माइन ब्लास्ट भी किए हैं। लेकिन सुरक्षा बलों की दबिश से माओवादियों में बौखलाहट है। 19-20 दिसंबर को भाकपा(माओवादी) का बिहार-झारखंड बंद और फिर मसूदन स्टेशन पर सुनियोजित हमला इसी की परिणति थी।


यहां है केन्द्रीय अर्द्ध सैनिक बलों की तैनाती


बिहार में गया के इमामगंज, डुमरिया, बांकेबाजार, देव, चकरबंधा, बारा के अलावा मगध क्षेत्र के मैदानी इलाकों, उत्तर बिहार के पश्चिमी और पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, बेगूसराय, खगड़िया में भी केन्द्रीय अर्द्ध सैनिक बलों की तैनाती है।

सुरक्षा बलों ने तेज किया है बिहार-झारखंड में ऑपरेशन

माओवादियों ने बंद के पहले इस बात का ऐलान किया था कि उनका यह विरोध झारखंड और बिहार में सुरक्षा बलों के ऑपरेशन के खिलाफ है। भाकपा(माओवादी) के स्पेशल एरिया कमिटी के सचिव सूरज की तरफ से बाकायदा इसका ऐलान किया गया था।

कैडरों और कमांडरों के खिलाफ इन इलाकों में चल रहा ऑपरेशन

भाकपा (माओवादी) के कैडरों और कमांडरों के खिलाफ केन्द्रीय अर्द्ध सैनिक बलों और बिहार-झारखंड की पुलिस का संयुक्त ऑपरेशन जारी है। माओवादी भी मान रहे हैं कि झारखंड के बूढ़ा पहाड़ के आसपास पलामू, गुमला, लातेहार में सुरक्षा बलों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। एक-एक किलोमीटर की दूरी पर सुरक्षा बलों ने वहां कैंप बनाना शुरू किया है। पूरे इलाके की घेराबंदी की जा रही है। माओवादियों ने इसे अपने खिलाफ सुरक्षा बलों का मिशन 2017 कहा है। हालांकि ऑपरेशन ग्रीन हंट वर्ष पिछले कई वर्षों से जारी है। बूढ़ा पहाड़ इलाके में पिछले महीने के अंतिम सप्ताह में भी सुरक्षा बलों का जबरदस्त ऑपरेशन चला था। इसके अलावा पश्चिम सिंहभूम के किरीबुरू, छोटानागरा, गुवा, नोवामंडी में भी घेराबंदी जारी है। पलामू और चतरा में भी ऑपरेशन से नक्सलियों में बौखलाहट है। झारखंड के ये वो इलाके हैं जहां माओवादियों की सक्रियता रही है।

10 हजार जवान लगे हैं एंटी नक्सल ऑपरेशन में

एंटी नक्सल ऑपरेशन ते तहत बिहार में सीआरपीएफ व राज्य पुलिस के करीब दस हजार जवान लगे हुए हैं। सीआरपीएफ की साढ़े आठ बटालियन फोर्स इस ऑपरेशन में लगाई गई है। सुरक्षा बलों का फोकस मोस्ट वांटेड इनामी नक्सलियों पर है। बिहार के 11 जिलों के 44 मोस्टवांटेड नक्सलियों व उग्रवादियों की तलाश है। इनमें कई बड़े नाम हैं। जिनपर लाखों के इनाम हैं। पांच लाख के इन इनामी नक्सलियों में कोई भाकपा(माओवादी) की सेंट्रल कमिटी का सदस्य है तो कोई अलग-अलग एरिया कमिटी का सचिव। अरविंद जी उर्फ अरविंद कुमार सिंह उर्फ देव सेंट्रल कमिटी का सदस्य है। प्रवेश दा पूर्वी बिहार-पूर्वी झारखंड एरिया का सचिव है। विजय यादव उर्फ संदीप जी भाकपा(माओवादी) की मध्य एरिया कमिटी का सचिव है। राजन जी उत्तर बिहार एरिया कमिटी का सचिव है। कहा जाता है कि नक्सली वारदातों और सुरक्षा बलों पर हमले की रणनीति बनाने में इनको महारत है।

बूढ़ा पहाड़ इलाके में टॉप कमांडर अरविंद जी के होने की आशंका

कहा जाता है कि नक्सलियों के बिहार-झारखंड के टॉप कमांडर देव कुमार सिंह उर्फ अरविंद जी के बूढ़ा पहाड़ इलाके में होने की आशंका है। अरविंद जी भाकपा (माओवादी) के शीर्ष 10 कमांडरों में से एक है। कहा जाता है कि सुरक्षा बलों के शरीर के भीतर आईईडी प्लांट करने का आइडिया भी अरविंद जी का ही था जिसके बाद उसे टॉप कमांडरों में शामिल किया गया था। बिहार और झारखंड में सभी बड़े नक्सल ऑपरेशन अरविंद जी की ही देखरेख में किए जाते हैं। इसके अलावा हथियार खरीदने से लेकर कई तरह के काम अरविंद जी के मिले हुए हैं। झारखंड में सुरक्षा बलों ने अमेरिका आर्मी की एक राइफल बरामद की थी जिसके बाद यह चर्चा थी कि उसे नार्थ ईस्ट के उग्रवादियों से हासिल करने के पीछे अरविंद जी का ही हाथ था। बिहार के जहानाबाद का रहने वाला अरविंद जी सुरक्षा बलों की लिस्ट में फिलहाल टॉप पर है।

बिहार में नहीं है ग्रीन हंट की पॉलिसी

नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन ग्रीन हंट की पॉलिसी बिहार में नहीं रही। वर्ष 2009 में जब यह ऑपरेशन शुरू हुआ तब बिहार इसमें शामिल नहीं हुआ था। छत्तीसगढ़, झारखंड, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में ग्रीन हंट शुरू किया गया था। इस ऑपरेशन के लिए खास तौर पर सीआरपीएफ के कोबरा कमांडो तैनात किए गए। हालांकि बिहार में भी कोबरा की तैनाती है।

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