--Advertisement--

बिहार : महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा में साइबर अपराधियों ने लगाई सेंध

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते साइबर अपराध को देखते हुए केन्द्र सरकार ने यह पहल की है।

Danik Bhaskar | Dec 18, 2017, 07:21 AM IST

पटना. साइबर अपराध। आम धारणा है कि यह साइबर फ्रॉड से जुड़ा होता है। लेकिन, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा में भी साइबर अपराध ने सेंध लगा दी है। स्थिति की भयावह है। अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केन्द्र ने देश के सभी राज्यों में महिलाओं और बच्चों से जुड़े साइबर अपराध की पड़ताल, नियंत्रण और रोकथाम के लिए साइबर फॉरेंसिक लैब-सह-ट्रेनिंग सेंटर खोलने का फैसला किया है।

केन्द्रीय महिला एवं विकास मंत्रालय ने साइबर क्राइम प्रिवेंशन अगेंस्ट वुमेन एंड चिल्ड्रन(सीसीपीडब्ल्यू) नाम से एक योजना ही शुरू कर दी है। इस योजना के तहत बिहार में इसी वर्ष एक हाईटेक लैब स्थापित किया जाएगा। इसके लिए 2.30 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए गए हैं। यह लैब आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) के कार्यालय में खोला जाना है। प्रस्ताव तैयार है। जल्द ही इसे केन्द्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा। बिहार में अपने तरह का यह पहला साइबर फारेंसिक लैब होगा जो सिर्फ महिलाओं और बच्चों से जुड़े साइबर अपराध को डिटेक्ट कर अपराधियों तक पहुंचेगा। यह साइबर लैब 24x7 काम करेगा।

क्यों पड़ी जरूरत


महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते साइबर अपराध को देखते हुए केन्द्र सरकार ने यह पहल की है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर महिलाओं के खिलाफ अपराध की कई वारदातें सामने आई हैं। ऐसे अपराध फेसबुक व दूसरे सोशल मीडिया से जुड़े हैं। बच्चों से जुड़ी चाइल्ड पोर्नोग्राफी भी इस दायरे में है। इसके पीछे सक्रिय अपराधियों की धरपकड़ और उन्हें कानून के शिकंजे में कसने के लिए यह कदम उठाए गए हैं। दरअसल, साइबर अपराध से निपटने के लिए पुलिस के पास उस स्तर के न संसाधन हैं और न ही विशेषज्ञता। साइबर फॉरेंसिक लैब का कॉन्सेप्ट इस कमी को दूर करना है।

बिहार का रैंक देश में 26वां


- साइबर अपराध में बिहार का रैंक देश में 26वां है। पहले स्थान पर असम है। दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र, तीसरे स्थान पर कर्नाटक है। देश की राजधानी दिल्ली 19वें स्थान पर है।
- साइबर अपराध के जरिए यौन शोषण से जुड़े 6 मामले पिछले साल बिहार में दर्ज किए गए थे। असम में 41, गुजरात में 28, कर्नाटक में 41, महाराष्ट्र में 144 और उत्तर प्रदेश में 138 मामले सामने आए।
- बिहार में वर्ष 2016 में कुल दर्ज 309 मामलों में से 260 मामले लंबित हैं। जबकि कुल 569 मामलों का अनुसंधान होना है। 50 ऐसे मामले सामने आए जो तो पाए गए लेकिन पुलिस पर्याप्त साक्ष्य नहीं जुटा पाई, जबकि 8 मामले फर्जी पाए गए। (एनसीआरबी की रिपोर्ट)

निर्भया फंड के तहत लैब के लिए पैसा


साइबर फॉरेंसिक लैब-सह-ट्रेनिंग सेंटर के लिए बिहार सहित अन्य राज्यों को निर्भया फंड के तहत पैसे जारी किए गए हैं। दिल्ली में निर्भया कांड के बाद केन्द्र सरकार ने महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा के लिए 1 हजार करोड़ का फंड बनाया था। साइबर लैब के लिए इसमें से 70 करोड़ 14 लाख रुपए जारी किए गए हैं।


हरियाणा के गुरुग्राम की तर्ज पर होगा लैब


बिहार में साइबर फॉरेंसिक लैब-सह-ट्रेनिंग सेंटर कैसा होगा इसके लिए बिहार के एटीएस, एसटीएफ और आर्थिक अपराध की एक टीम को हरियाणा के गुरुग्राम स्थित लैब का मुआयना करने गई थी। गुरुग्राम में राष्ट्रीय स्तर का लैब है।