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इंटर की जगह 5वीं पास ड्राइवर, कंडक्टर के पास लाइसेंस नहीं, ऐसी है स्कूलों की हालत

एमवीआई व विभाग के दो अफसरों की टीम ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश के मुताबिक 20 बिंदुओं पर जांच की।

Dainik Bhaskar

Dec 14, 2017, 05:54 AM IST
reports on school buses of Bhagalpur

भागलपुर. शहर के निजी स्कूल बस चलाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट की निर्देशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। बस का ड्राइवर इंटरमीडिएट पास होना चाहिए, लेकिन उसकी जगह पर पांचवी-सातवीं पास चालक बस चला रहे हैं। एक भी कंडक्टर के पास लाइसेंस नहीं है। ज्यादातर स्कूली बसों में जीपीएस सिस्टम नहीं लगे हैं। बस को एक निर्धारित सीमा में चलाने के लिए एक भी स्कूली बस में स्पीड गवर्नर नहीं है। इसका खुलासा जिला परिवहन विभाग की जांच से हुआ है। विभाग ने अब तक नौ निजी स्कूलों की 47 बसों की जांच की है। जहां कई खामियां पाई गई हैं।

टीम ने 20 प्वाइंट पर बसों का किया टेस्ट


3 नवंबर को कमिश्नर की अध्यक्षता में क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार की बैठक हुई थी। इसमें उन्होंने परिवहन विभाग को स्कूली बसों की जांच करने का निर्देश दिया था। इसके बाद ही जांच टीम बनी। एमवीआई व विभाग के दो अफसरों की टीम ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश के मुताबिक 20 बिंदुओं पर जांच की। नवयुग विद्यालय की तीन, दीक्षा इंटरनेशनल की आठ, हैप्पी वैली की पांच, माउंट असीसी की सात, संत पॉल की चार, होली फैमिली की चार, संत जोसेफ की पांच, संत टेरेसा की सात और नाथनगर के सरस्वती विद्यालय मंदिर की चार बसों की जांच की गई। टीम ने अपनी रिपोर्ट क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार को दी है। अब आगे कमिश्नर के निर्देश पर कार्रवाई की जाएगी। सभी स्कूलों के बसों की जांच पूरी होने के बाद भी यह सिलसिला चलता रहेगा।

जानिये किस स्कूल की बस की क्या है स्थिति

नवयुग विद्यालय : इस स्कूल की तीन बसें चलती हैं। एक भी बस में न जीपीएस सिस्टम है और न ही स्पीड गवर्नर लगा है। किसी बस में सातवीं तो किसी में मैट्रिक पास ड्राइवर है। कंडक्टर पांचवीं पास भी नहीं है। ड्राइवर व कंडक्टर के पास लाइसेंस नहीं है। आउट ऑफ स्टॉक होने की वजह से ड्राइवर व कंडक्टर के पास बैज नहीं है।
दीक्षा इंटरनेशनल : यहां आठ बसें हैं। सब बसों में जीपीएस सिस्टम तो लगा हुआ है। लेकिन किसी में भी स्पीड गवर्नर नहीं है। यहां पांचवीं पास चालक बस चला रहे हैं। जबकि कंडक्टर नवमीं पास है। चालक की सीट के दरवाजे की तरफ ड्राइवर का नाम, पता, लाइसेंस संख्या, मालिक का दूरभाष संख्या, बैच संख्या, बस का पंजीयन एक भी बस में नहीं है।
हैप्पी वैली : पांच में से एक भी बस में न जीपीएस और न ही स्पीड गवर्नर। ड्राइवर नन मैट्रिक व कंडक्टर सातवीं पास है। जांच टीम ने सारी व्यवस्था जल्द करने का निर्देश दिया है।
माउंट असीसी : माउंट असीसी ड्राइवर का खाकी कलर का ड्रेस है। ड्राइवर सातवीं पास है। यहां चल रही सात बसों में से भी न जीपीएस और न ही स्पीड गवर्नर है। इसको लेकर टीम ने यथाशीघ्र लगाने का निर्देश दिया है।
होली फैमिली, संत टेरेसा व संत पॉल : होली फैमिली की बस में जीपीएस व स्पीड गवर्नर नहीं है। कंडक्टर तो मैट्रिक पास है लेकिन ड्राइवर सातवीं पास है। संत टेरेसा की सात में से एक भी बस में जीपीएस व स्पीड गवर्नर नहीं है। संत पॉल में ड्राइवर का नाम, पता, लाइसेंस, बैच टेलीफोन नंबर बस पर लिखा हुआ नहीं है। चार में से एक भी बस में स्पीड गवर्नर और जीपीएस सिस्टम नहीं है।
संत जोसेफ व सरस्वती विद्या मंदिर : संत जोसेफ में पांच बसें चलती हैं। ड्राइवर की शिक्षा केवल आठवीं पास तक की है। ड्राइवर का ड्रेस, जैकेट पर नेम प्लेट भी नहीं लगा है। स्पीड गवर्नर नहीं है। स्कूल प्रबंधन ने कहा कि 30 जनवरी तक स्पीड गवर्नर व जीपीएस सिस्टम लगवा लेंगे। सरस्वती विद्या मंदिर की चार बसों में जीपीएस सिस्टम लगा है, लेकिन स्पीड गवर्नर किसी में भी नहीं है।

ये हैं सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन

- चालक को पांच साल का अनुभव हो
- चालक के कंडक्टर के पास लाइसेंस हो
- चालक ग्रे पैंट पहनें। जैकेट पर नेम प्लेट हो
- चालक इंटर और कंडक्टर मैट्रिक पास हो
- बस के अागे व पीछे बस ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए
- बस पर ड्राइवर का नाम, पता, लाइसेंस नंबर, बैच संख्या
- जीपीएस सिस्टम लगा हो, स्पीड गवर्नर जरूरी है
- बस की खिड़कियों में हॉरिजेंटल ग्रिल
- बस में फर्स्ट एड बॉक्स और अग्निशमन यंत्र रहे

खामियां दूर करने को कहा है

एमवीआई गौतम कुमार ने बताया कि अभी तक नौ निजी स्कूली बसों की जांच की गई है। इनमें एक भी बस में स्पीड गवर्नर नहीं लगा है। कई और खामियां हैं। अगर इसे दूर नहीं किया जाएगा तो कार्रवाई की जाएगी।

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