पटना

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3830 करोड़ रुपए बकाया मिला तो ही पूरी होगी सर्व शिक्षा अभियान की योजना

वित्तीय वर्ष 2017-18 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत 10,558 करोड़ की योजना स्वीकृत की गई है।

Danik Bhaskar

Jan 16, 2018, 04:25 AM IST

पटना. सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के तहत चल रहे कार्यक्रम बाधित हैं। राज्य में प्रारंभिक स्कूलों की बेहतरी के लिए बनाई गई योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू कराने में मुश्किल आ रही है। इसका कारण केंद्रीय मदद न मिल पाना है। केंद्र व राज्य में एनडीए सरकार होने के बाद भी स्थिति सुधर नहीं रही है। इससे प्राथमिक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए माहौल तैयार कर पाने में मदद नहीं मिल पा रही है। इस पूरी स्थिति पर राज्य सरकार ने केंद्र को अपनी रिपोर्ट दी है।

वित्तीय वर्ष 2017-18 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत 10,558 करोड़ की योजना स्वीकृत की गई है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 6,335 करोड़ रुपए मिलने हैं। 4223 करोड़ रुपए राज्य सरकार अपने मद से योजना में खर्च करेगी। योजना को लेकर राज्य सरकार का दावा है कि उसने अपने हिस्से का एलॉटमेंट दिखाया है। केंद्र की ओर से 2,505 करोड़ ही जारी किए गए हैं। चालू वित्तीय वर्ष में 3,830 करोड़ रुपए केंद्र की ओर से मिलने हैं। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में महज दो माह बाकी हैं और अब तक कुल राशि का 39.54 फीसदी राशि ही जारी हो सकी है।

कैब की रिपोर्ट

- 45,856 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं को दिया गया है मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण।

- 1.37 करोड़ विद्यार्थियों ने भाग लिया है अर्द्धवार्षिक मूल्यांकन में।

- 7.13 लाख छात्राएं 2017-18 में माध्यमिक स्तर पर हासिल कर रही हैं शिक्षा।

- 1.63 लाख छात्राओं 2008 में माध्यमिक स्तर पर स्कूलों में करती थीं पढ़ाई।

- 4500 माध्यमिक विद्यालयों को उच्चतर माध्यमिक में अपग्रेड करने की है योजना।

भूमिहीन व भवनहीन स्कूलों को समाप्त किए जाने का है प्रस्ताव

सरकार भूमिहीन व भवनहीन स्कूलों को समाप्त करने की योजना पर कार्य कर रही है। हर बच्चे की पहुंच में स्कूल हो, इसके लिए 21,253 नए प्राथमिक स्कूल राज्य में खोले गए हैं। वर्ष 2006 में राज्य के 12 फीसदी बच्चे स्कूलों से बाहर थे, जो 2017-18 में एक फीसदी पर पहुंच गए हैं। सरकार का प्रयास हर बच्चे को स्कूल से जोड़ने का है। अभी राज्य में 7089 स्कूल भवनहीन हैं। भूमि या फंड के अभाव में इन स्कूलों के भवन का निर्माण नहीं हो पा रहा है। भूमि की व्यवस्था पर अब गंभीरता से विचार कर रही है। अगर केंद्र की ओर से बकाए सर्व शिक्षा अभियान मद की राशि मिल जाती है तो निर्माण आरंभ हो जाएगा। साथ ही, समय पर बच्चों को पोशाक, छात्रवृत्ति व साइकिल की राशि उपलब्ध कराने में कामयाबी मिलेगी।

किताब की राशि खाते में भेजने पर भी मांगी स्वीकृति

राज्य सरकार ने केंद्र से एक बार फिर किताब मद की राशि बच्चों के खाते में भेजने पर सहमति मांगी है। प्रस्ताव रखा है कि अगर बच्चों के खाते में किताब मद की राशि भेज दी जाए और निजी प्रकाशकों पर दबाव बनाकर स्कूलों तक किताब की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की व्यवस्था हो तो सत्र के शुरुआत में ही उन्हें किताब मिल जाएगी। सत्र 2017-18 में करीब नौ माह बीत जाने के बाद भी 10 फीसदी बच्चों को किताब नहीं मिल सकी।

4500 पंचायतों में अभी भी नहीं है हाईस्कूल

राज्य की 4500 पंचायतों में आज भी हाईस्कूल नहीं है। हर पंचायत में हाईस्कूल की सुविधा उपलब्ध कराने का सरकार का दावा है। भारत सरकार की ओर से मॉडल स्कूल योजना बंद कर दी गई है। सरकार ने इस योजना को फिर से शुरू करने का अनुरोध किया है। इससे ग्रामीण इलाके के छात्र-छात्राओं को लाभ मिलने की बात कही जा रही है। स्वीकृत 216 मॉडल स्कूलों में से 81 स्कूलों का निर्माण अभी तक नहीं हो सका है। इसके लिए केंद्र से 186 करोड़ की मांग की गई है।

कैब की बैठक में मंत्री ने गिनाई उपलब्धियां

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड ऑफ एजुकेशन (कैब ) की बैठक में शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने उपलब्धियां गिनाई। उन्होंने कहा कि अब राज्य में महज एक फीसदी बच्चे स्कूल से बाहर हैं। बालिका शिक्षा को लेकर सरकार की योजनाओं का लाभ मिला है। 535 कस्तूरबा विद्यालयों के माध्यम से ग्रामीण छात्राओं के लिए आवासीय शिक्षण की व्यवस्था की गई है। सामाजिक कुरीति बाल विवाह के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है।

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