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डिपार्टमेंट ने जारी किया 10 लाख का चेक, क्लोन चेक से निकाले दो करोड़ 38 लाख

गया के डीएम कुमार रवि ने बताया कि जिला कल्याण पदाधिकारी ने इसकी लिखित जानकारी दी है। जांच शुरू कर दी गई है।

Danik Bhaskar | Dec 21, 2017, 06:16 AM IST

गया. गया जिले में छात्रवृत्ति राशि के घोटाला की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। हाल ही में करोड़ों रुपए गबन के मामले में तत्कालीन डीडब्ल्यूओ मृत्युंजय नारायण सहित 12 लोगों पर एफआईआर हुआ था। अचानक दो करोड़ 28 लाख 13 हजार 750 रुपए के एक और गबन का मामला सामने आया है। हालांकि इस कारनामा में भी तत्कालीन डीडब्ल्यूओ मृत्युंजय नारायण सिंह की संलिप्तता का संदेह हो रहा है। माना जा रहा है कि दूसरे मामलों में चल रही जांच के बाद एफआईआर की भनक उन्हें लग गई थी। जाते-जाते अन्य लोगों की मदद से सवा दो करोड़ से अधिक की राशि दूसरे मामले में निकाल ली गई।

सवां दो करोड़ से अधिक की फर्जी निकासी

गया कल्याण विभाग द्वारा राज्य से बाहर के छह संस्थानों के नाम से छात्रवृत्ति मद में कुल नौ लाख 69 हजार 250 रुपए निर्गत किए गए। परंतु निकासी कर ली गई दो करोड़ 37 लाख 77 हजार रुपए। इसका खुलासा कल्याण विभाग के एचडीएफसी गया के बैंक अकाउंट का बैलेंस शीट निकाले जाने पर हुआ। जिला कल्याण पदाधिकारी सुरेन्द्र राम ने तत्काल इसकी सूचना जिलाधिकारी को दी।

क्लोन चेक का संदेह


कल्याण पदाधिकारी द्वारा बैंक से 16 एवं 22 नवंबर 2017 को भुनाई गई चेक की प्रति मंगाई गई तो इसमें काफी अंतर पाया गया। चेक संख्या समान था, जबकि भुनाई गई राशि, संस्था का नाम और निर्गत तिथि में अंतर था। ये सारे चेक तत्कालीन डीडब्ल्यूओ मृत्युंजय नारायण सिंह द्वारा निर्गत किए गए थे।

इन संस्थानों के नाम निर्गत हुआ चेक

- शांति निकेतन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन मेरठ
- मोनाड यूनिवर्सिटी हापुर(यूपी)
- महाराजा अग्रसेन कॉलेज गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
- आरएन कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट मेरठ
- नीलकंठ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मेरठ
- मोनाड यूनिवर्सिटी हापुर

इन संस्थानों के नाम क्रमवार हुई निकासी

- सुंदर वीर सिंह

- निदेशक, त्रिवेणी इंस्टीच्युट ऑफ मैनेजमेंट बागपत

- निदेशक, इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट

- निदेशक त्रिवेणी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट बागपत

- नीलकंठ इंस्टीट्यूट मेरठ {बालाजी इंटरप्राइजेज

एक ही दिन में निर्गत चेक मेरठ से क्लियर


गया कल्याण कार्यालय से निर्गत तिथि को ही दो चेक मेरठ के क्रमश: एक्सिस और सिंडीकेट बैंक से क्लियर हुआ है। जबकि यहां से निर्गत चेक को स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजा जाना था। यहां तक कि विभाग में स्पीड पोस्ट से भेजे जाने की रसीद भी लगाई गई है। इन संस्थानों से निर्गत पांच चेक जून तथा एक चेक मई माह में भुनाया गया है। विदित हो कि तत्कालीन डीडब्ल्यूओ पर दूसरे मामले में पहली जुलाई को एफआईआर हुआ है।

जांच में आरोप का होगा निर्धारण


गया के डीएम कुमार रवि ने बताया कि जिला कल्याण पदाधिकारी ने इसकी लिखित जानकारी दी है। जांच शुरू कर दी गई है। आरोप तय होंगे और सभी संबंधित के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे अन्य मामलों की भी संभावना है। इसकी भी जांच चल रही है। जल्द कार्रवाई होगी।