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अगले साल से स्कूली स्टूडेंट को किताब के बदले मिलेगा पैसा, अकाउंट खुलवाने का निर्देश

बीटीबीसी द्वारा राज्य के 4 प्रिंटर्स व अन्य राज्यों के 7 प्रिंटर्स को प्रिंटिंग की जिम्मेदारी दी गई है।

Danik Bhaskar | Dec 23, 2017, 05:16 AM IST

पटना. सेशन शुरू होने के छह माह बाद भी स्कूली बच्चों को पुस्तकें नहीं मिल पाती हैं। यह समस्या हर साल होती है। ऐसे में बच्चों को समय से किताब उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा विभाग ने नई रणनीति बनाई है। अगले साल से बच्चों को किताब की जगह रुपए दिए जाएंगे। बच्चों के खाते में पुस्तक की राशि दे दी जाएगी। शिक्षा विभाग ने अगले साल से कक्षा एक से आठ तक के बच्चों के खाते में पुस्तक की राशि देने को लेकर तैयारी तेज कर दी है।

जिला शिक्षा पदाधिकारियों से बच्चों का बैंक खाता 31 मार्च के पहले हर हाल में खुलवाने का निर्देश दिया गया है। पुस्तक की छपाई निजी प्रकाशक ही करेंगे। पुस्तक छपाई में खर्च के हिसाब से बच्चों के खाते में किताब खरीद के लिए राशि दी जाएगी। बच्चों और अभिभावकों को आजादी रहेगी कि वे बाजार से पुस्तक खरीद लें। बच्चों को राशि मिलने में अधिकारियों की भी जिम्मेदारी होगी कि यह सुनिश्चित करा लें, कि बच्चों ने पुस्तकें खरीदी या नहीं?

9 माह बाद भी 30 प्रतिशत बच्चों को नहीं मिल सकी किताब

राज्य के प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में सत्र शुरू होने के 9 माह बाद भी 30 प्रतिशत बच्चों को किताब नहीं मिल सकी है। कक्षा 3 से 8 तक के बच्चों को पुरानी किताब देनी थी, लेकिन 32 प्रतिशत बच्चों को ही ये किताबें मिली हैं। सर्व शिक्षा अभियान के तहत इन बच्चों को मुफ्त पुस्तक दी जानी है। राज्य के लगभग 71 हजार प्राथमिक व मध्य विद्यालयों के दो करोड़ से अधिक बच्चों को किताब देनी है। कक्षा एक से आठ तक के लिए कुल 5 करोड़ 88 लाख 77 हजार किताब की छपाई होनी है। छपाई में लगभग 110 करोड़ की राशि खर्च होगी।

26 दिसंबर से 15 जनवरी तक योजनाओं की राशि
अब पोशाक, साइकिल, छात्रवृत्ति सहित अन्य योजनाओं की राशि बच्चों के खाते में 26 दिसंबर से 15 जनवरी तक उपलब्ध कराई जाएगी। बच्चों का खाता खोलने के साथ ही आधार से भी लिंक किया जा रहा है, ताकि फर्जीवाड़ा पर रोक लगाई जा सके।

छपाई में 120 करोड़ की राशि खर्च
बीटीबीसी द्वारा राज्य के 4 प्रिंटर्स व अन्य राज्यों के 7 प्रिंटर्स को प्रिंटिंग की जिम्मेदारी दी गई है। राज्य के लगभग 72 हजार प्राथमिक व मध्य विद्यालयों के दो करोड़ से अधिक बच्चों को किताब देनी है। कक्षा एक से आठ तक के लिए कुल 5 करोड़ 94 हजार किताब की छपाई कराई गई है। छपाई में लगभग 120 करोड़ की राशि खर्च हो रही है। टेंडर फाइनल होने के 75 दिनों के अंदर प्रकाशक को पुस्तक प्रखंड तक पहुंचाना था।