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जहांं हुई थी गुरुग्रंथ साहिब की रचना, वहीं बनेगा सिख संग्रहालय

पटना में भी एक संग्रहालय का निर्माण होना है। गुरु के बाग में 100 करोड़ की लागत से एक संग्रहालय प्रस्तावित है।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 22, 2018, 06:17 AM IST

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    पटना/बुरहानपुर.सिख समाज के दसवें और आखिरी गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी 1708 ईसवी में दक्षिण यात्रा के दौरान नांदेड़ साहिब जाते समय बुरहानपुर में 6 माह 9 दिन रुके थे। उन्होंने यहां सुनहरी बीड़ (गुरुग्रंथ साहिब) का निर्माण कराया और उसमें स्वर्ण हस्ताक्षर कर सतनाम श्री वाहे गुरु लिखा। प्रकाश पर्व पर बीड़ साहब के दर्शन कराए जाते हैं। इतिहास की इन स्वर्णिम यादों को सहेजने के लिए अब यहीं पर 17 करोड़ 39 लाख रुपए की लागत का संग्रहालय बनेगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरु गोबिंद सिंह की 350 वीं जयंती पर समारोह पूरे देश व विदेशों में भी मनाए जाने की घोषणा की है। इसके लिए केंद्र सरकार 100 करोड़ रुपए सांस्कृतिक व विभिन्न कार्यक्रमों पर खर्च कर रही हैं। बुरहानपुर में तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही श्री गुरुगोबिंद सिंह जी की यादों को सहेजने के लिए बुरहानपुर में संग्रहालय बनाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार सिख संग्रहालय के लिए केंद्र सरकार ने 15.39 करोड़ रुपए रुपए स्वीकृत कर दिए हैं। दो करोड़ रुपए राज्य सरकार खर्च करेंगी। तीन एकड़ भूमि पर संग्रहालय बनाया जाएगा। जिसका मॉडल 26 जनवरी तक जनता के सामने रखने का प्रयास कर रहे हैं।

    पटना में भी एक संग्रहालय का निर्माण होना है


    खास बात यह है कि पटना में भी एक संग्रहालय का निर्माण होना है। गुरु के बाग में 100 करोड़ की लागत से एक संग्रहालय प्रस्तावित है। पंजाबी बिरादरी के पूर्व अध्यक्ष सरदार गुरदयाल सिंह के अनुसार इसके लिए 10 एकड़ जमीन दी गई है। उम्मीद की जा रही है कि इस वर्ष के अंत तक इसका भी निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।

    संग्रहालय में होगा सिखों का इतिहास


    सिख समुदाय के सूत्रों के अनुसार संग्रहालय में सिखों के इतिहास को दर्शाने वाली विरासत को रखा जाएगा। सिख धर्म के इतिहास को प्रदर्शित करने वाली फिल्में भी दिखाई जा सकेंगी। साथ ही सिख धर्म के पहले गुरु नानक देव जी से लेकर ग्रंथ साहिब की स्थापना तक सिख धर्म के विकास को दर्शाने वाली जानकारियों से अवगत कराया जाएगा। अभी इस तरह का संग्रहालय आनंदपुर साहिब में है। जिसे विरासत-ए-खालसा नाम दिया गया हैं। जो कि 350 करोड़ रुपए की लागत से 12 साल में बनकर तैयार हुआ। संग्रहालय का डिजाइन इसराइल के वास्तुशिल्पी मोशी सैफदाई ने किया।

    बुरहानपुर में दिया था धर्म का संदेश


    सिख समुदाय के सूत्रों के अनुसार श्री गुरु गोबिंद सिंह जी 1708 ईसवी में उज्जैन से नांदेड़ जाते समय बुरहानपुर रुके थे। यहां उन्होंने धर्म और देश की रक्षा का संदेश दिया था। समाजजन में देश प्रेम की भावना जगाने के लिए ही वे यहां पर छह माह नौ दिन रुके थे। गुरु साहिब की प्रेरणा से ही 1765 में निश्चल सिंह जी ने गुरुद्वारा की आधारशिला रखी। जो कि लोधीपुरा में संगमरमर से निर्मित हैं। यहां पर दर्शन के लिए देशभर से हजारों भक्त आकर मत्था टेकते है। संग्रहालय के निर्माण के बाद यह आकर्षण का केंद्र होगा।

    पटना साहिब में हुआ था जन्म
    गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म पटना में 22 दिसंबर 1966 को हुआ था। इसलिए पटना साहिब गुरुद्वारा का विशेष महत्व है। सिख संप्रदाय के पांच तख्तों में दूसरा तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहब हैं। हरिमंदिर गुरु गोबिंद सिंह की याद में महाराजा रणजीत सिंह ने बनवाया। यहां पर गुरु गोबिंद सिंह की कृपाण, लोहे की चोटी चकरी, बघनख, खंजर व कमर कसा आदि रखे हुए हैं।

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Web Title: Sikh Museum To Be Built In Burhanpur
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