Hindi News »Bihar »Patna» Special Report On Year Ender On Bihar 2017

अलविदा 2017 : बिहार में बदला तो बहुत कुछ, याद रहेगा सत्ता परिवर्तन

महागठबंधन टूटना और एनडीए सरकार बनना, साल की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना रही।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 30, 2017, 04:17 AM IST

  • अलविदा 2017 : बिहार में बदला तो बहुत कुछ, याद रहेगा सत्ता परिवर्तन
    +7और स्लाइड देखें
    ये फोटो चर्चा में रही थी। जब नीतीश कुमार महागठबंधन में थे तब उन्होंने एक प्रोग्राम के दौरान कमल के फूल में रंग भरा था।

    श्री गुरु गोबिंद सिंह महाराज के 350वें प्रकाशोत्सव पर ऐतिहासिक आयोजन से साल की शुरुआत हुई। उसी आयोजन के शुकराना समारोह से साल का समापन। जनवरी और दिसंबर के दोनों आयोजन कई मायनों में ऐतिहासिक रहे। यूं तो बीच के दस महीनों में भी अच्छी-बुरी यादगार घटनाएं हुईं, मगर जो सुर्खियां बटोर गई वह रही- प्रदेश में सत्ता परिवर्तन। महागठबंधन टूटना और एनडीए सरकार बनना, साल की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना रही। शराबबंदी के समर्थन में बनाई गई मानव शृंखला ने विश्वस्तरीय कीर्तिमन रचा। सरकार ने दहेज और बाल विवाह के खिलाफ अभियान का शंखनाद किया। इंटरस्तरीय परीक्षा का पर्चा लीक कर परमेश्वर ने दागदार किया। बाढ़ ने फिर बर्बाद किया। चर्चे में अघोषित बालूबंदी भी रही। जाते-जाते जुबान पर लालूबंदी भी चढ़ी।

    26 जुलाई को बिहार में हुआ राजनीतिक परिवर्तन देशभर के लिए बड़ी राजनीतिक घटना थी। साल के खात्मे को देखते हुए कहा जाए तो इस साल की देश की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना। जदयू, राजद और कांग्रेस का महागठबंधन टूट गया। नीतीश कुमार ने भाजपा के कमल में रंग भरा और फिर से बिहार में एनडीए की सरकार बन गई। नहीं बदला तो सरकार का मुखिया। नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री रहे। संघमुक्त भारत की बात कहने वाले नीतीश कुमार ने भाजपा का साथ लिया। 2015 के चुनाव में मुंह की खाई भाजपा सत्ता में आ गई। राज्य के सबसे बड़े दल राजद को विपक्ष वाली कुर्सी मिल गई। राजनीतिक रूप से अचंभा ही अचंभा। इस घटना से देशभर की राजनीतिक तस्वीर और तासीर बदली।

    महागठबंधन टूटा, बनी एनडीए सरकार: नेता नीतीशे कुमार

    कहा यह गया कि राजद के कारण नीतीश कुमार की छवि खराब हो रही थी। शासन चलाने में कठिनाई पेश आ रही थी। इसलिए राजद को वैसे ही सत्ता से बाहर कर दिया, जैसे कभी भाजपा को किया था। 20 महीने पुरानी सरकार गिरी। पांच घंटे के घटनाक्रम में नीतीश कुमार बिहार में महागठबंधन के नेता से एनडीए के नेता हो गए। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव थे। उनकी जगह सुशील मोदी आ गए।

    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें 350वां साल साहिब-ए-कमाल....

  • अलविदा 2017 : बिहार में बदला तो बहुत कुछ, याद रहेगा सत्ता परिवर्तन
    +7और स्लाइड देखें
    गुरु गोबिंद सिंह महाराज के 350वें प्रकाश पर्व पर पटना में निकली यात्रा।

    350वां साल साहिब-ए-कमाल

    गुरु गोबिंद सिंह महाराज की जन्मस्थली पटना में उनके 350वें प्रकाश पर्व पर ऐतिहासिक आयोजन किया गया। इतने बड़े धार्मिक आयोजन का गवाह पहली बार बिहार बना। 4 जनवरी को निकाले गए नगर कीर्तन में 3 लाख लोग शामिल हुए। तीन दिन के कार्यक्रम में कुल पांच लाख लोग आए। पटना इतने दिनों के लिए पंजाब बन गया था। जो भी बिहार आया, यहां की तैयारियों से भौंचक रह गया। यहां के लिए भी यह रोचक और यादगार आयोजन बन गया।

    - सरकार ने ऐलान किया- हम सालभर बाद इसका समापन भी इसी तरह करेंगे। वही हुआ। दिसंबर में 23 से 25 दिसंबर तक तीन दिन का समारोह आयोजित किया। कई देशों के श्रद्धालु आए।

    - 350 वें प्रकाश पर्व पर आयोजित कार्यक्रम बिहार का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन साबित हुआ। 32 देशों में मुख्य समारोह का प्रसारण हुआ।

  • अलविदा 2017 : बिहार में बदला तो बहुत कुछ, याद रहेगा सत्ता परिवर्तन
    +7और स्लाइड देखें
    सहस्राब्दी महायज्ञ: भोजपुर की धरती पर पहली बार विश्व धर्म सम्मेलन।

    सहस्राब्दी महायज्ञ: भोजपुर की धरती पर पहली बार विश्व धर्म सम्मेलन

    भाेजपुर के चंदवा में इस साल 25 सितंबर से 5 अक्टूबर तक चातुर्मास लक्ष्मीनारायण महायज्ञ सह रामानुजाचार्य सहस्राब्दी समारोह का आयोजन किया गया। गंगा नदी के तट पर इस तरह का आयोजन पहली बार किया गया। आयोजन की सफलता ही इसकी विशेषता रही। 1008 मंडप, 1132 हवन कुंड बनाए गए थे और परिक्रमा परिधि दो किलोमीटर थी। 11000 ब्राह़्मणों के द्वारा मंत्रों का उद्घोष किया गया। यज्ञ में रोजाना औसतन 6 लाख श्रद्धालु आए। इतनी बड़ी भीड़ को संभालना प्रशासन के लिए और आयोजकों के लिए बहुत बड़ी चुनौती थी। लेकिन, सब अच्छे से हो गया। देशभर से आए धर्माचार्योँ और श्रद्धालुओं ने भक्ति-रस में गोते लगाए।

    - 5 अक्टूबर को इसी स्थल पर विश्व धर्म सम्मेलन, संत सम्मेलन और श्री वैष्णव सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें कई धर्माचार्य और विद्वान तो आए ही, कई दलों के नेता भी शामिल हुए।

    - 25 लाख से ज्यादा लोग चंदवा में आयोजित सहस्राब्दी यज्ञ में शामिल हुए। पूरे आयोजन का समापन 6 अक्टूबर को हुआ।

  • अलविदा 2017 : बिहार में बदला तो बहुत कुछ, याद रहेगा सत्ता परिवर्तन
    +7और स्लाइड देखें
    सारण आ गया आरा-पटना के करीब।

    सारण आ गया आरा-पटना के करीब

    11 जून को राज्य के लोगों को दो बड़ी सौगातें मिलीं। जयप्रकाश नारायण सेतु, दीघा और वीर कुंवर सिंह सेतु, आरा-छपरा का उद्घाटन किया गया। गंगा नदी पर बने दोनों पुलों की वजह से आरा और छपरा के बीच की दूरी 100 किलोमीटर कम हो गई। पटना से छपरा की दूरी पर भी 20 किमी कम हो गई। उत्तर और दक्षिण बिहार करीब आ गया। दो छोरों को करीब लाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती थी। इससे पहले एकमात्र गांधी सेतु के जरिए ही उत्तर-दक्षिण आना-जाना होता था। गांधी सेतु यानी जाम की जलालत। लोगों को इससे मुक्ति मिल गई।

    - 04 लेन का आरा-छपरा सेतु कुल चार किलोमीटर लंबा है। इसके एप्रोच रोड की लंबाई भी 17 किलोमीटर है। दीघा सेतु की लंबाई भी साढ़े चार किलोमीटर है।

  • अलविदा 2017 : बिहार में बदला तो बहुत कुछ, याद रहेगा सत्ता परिवर्तन
    +7और स्लाइड देखें
    शराबबंदी के खिलाफ बिहार ने बनाया विश्व कीर्तिमान।

    शराबबंदी के खिलाफ बिहार ने बनाया विश्व कीर्तिमान

    शराबबंदी अभियान के समर्थन में पूरे बिहार में जनजागृति लाने के लिए राज्यभर में मानव शृंखला बनाई गई। 11 हजार 400 किलोमीटर लंबी मानव शृंखला विश्व रिकार्ड हो गई। इसे लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में शामिल किया गया। बिहार में पहली बार इस तरह का आयोजन किया गया। हर क्षेत्र, हर वर्ग के लोग इसमें शामिल हुए। दलीय सीमाएं टूट गईं। तीन करोड़ लोगों के छह करोड़ हाथ एक-दूसरे से जुड़े और शराब के विरोध का सामूहिक ऐलान किया गया। इस तरह का आयोजन देश के लिए भी पहला था, जिसकी चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर हुई।

    - साढ़े नौ हजार मीटर स्क्वायर में बिहार शब्द गांधी मैदान में लिखा गया। यहां 8.5 एकड़ क्षेत्र में मानव शृंखला बनाई गई। पांच उपग्रहों से इसकी तस्वीर ली गई।

    - 03 करोड़ लोगों के 6 करोड़ हाथ आपस में जुड़े और नशे के खिलाफ लोगों को जागरूक किया गया।

  • अलविदा 2017 : बिहार में बदला तो बहुत कुछ, याद रहेगा सत्ता परिवर्तन
    +7और स्लाइड देखें
    लालकेश्वर के बाद परमेश्वर के फर्जीवाड़े से 13 हजार नौकरियां अटकीं।

    लालकेश्वर के बाद परमेश्वर के फर्जीवाड़े से 13 हजार नौकरियां अटकीं

    बिहार कर्मचारी चयन आयोग के द्वारा 29 जनवरी और 5 फरवरी को ली गई इंटरस्तरीय परीक्षा रद्द हो गई। दो और चरणों की परीक्षा होने से पहले रद्द हो गई। पता चला कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र और उसका उत्तर लीक हो गया था। आयोग के सचिव परमेश्वर राम समेत दर्जनभर लोग जेल पहुंच गए। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के सचिव लालकेश्वर के बाद परमेश्वर सुर्खियों में रहे। जांच आगे बढ़ी तो आयोग के अध्यक्ष सुधीर कुमार भी जेल गए। इस तरह के मामले में किसी आईएएस की गिरफ्तारी राज्य के लिए पहली घटना थी। नतीजा यह हुआ कि साल बीतने तक भी इंटर स्तरीय भर्तियां तो दूर, परीक्षा भी नहीं हुई। 13 हजार पदों के लिए 18.5 लाख आवेदक थे।

  • अलविदा 2017 : बिहार में बदला तो बहुत कुछ, याद रहेगा सत्ता परिवर्तन
    +7और स्लाइड देखें
    घोषणा न कोई नियम, फिर भी हो गई बालूबंदी।

    घोषणा न कोई नियम, फिर भी हो गई बालूबंदी

    - गैरकानूनी तरीके से गंगा की गोद से बालू निकालने वाले माफिया यूं तो पहले से सक्रिय रहे हैं, लेकिन साल 2017 में इन्होंने जीभर कर चांदी काटी। सरकार ने पुरानी नियमावली की जगह नई नियमावली पेश की। इसमें इतनी पेचीदगियां थीं कि लोगों के बालू के लाले पड़ने लगे। इसी मौके का फायदा माफियाओं ने उठाया। गंगा और सोन की कोख काटकर दुगनी दाम पर बालू बेचने लगे। बीच में अदालत का हस्तक्षेप आया।

    - फिलवक्त नई नियमावली पर रोक लगी है। पुरानी प्रतीक्षारत है। और इन सबके बीच जारी है बालू का अवैध कारोबार। लोग कहते हैं- दारूबंदी के बाद सरकारी ने बालूबंदी कर दी!

    - सरकार चाहती है कि बालू सरकारी स्तर पर ही बिके। बालू माफिया इस मंसूबे पर पानी फेरना चाहते हैं।

    - 09 हजार रुपया प्रति ट्रैक्टर मिलने लगा कालाबाजार का बालू। आमतौर पर इतना बालू 5 हजार में मिलता है।

  • अलविदा 2017 : बिहार में बदला तो बहुत कुछ, याद रहेगा सत्ता परिवर्तन
    +7और स्लाइड देखें
    पतंग महोत्सव ने 21 लोगों की जिंदगी छीन ली थी।

    पतंग महोत्सव ने 21 लोगों की जिंदगी छीन ली

    - 14 जनवरी को मकर संक्रांति के मौके पर गंगा पार दियारा में आयोजित पतंग महोत्सव से लौटते लोगों की नाव पानी में गर्क हो गई। 21 लोगों की मौत हो गई। 20 लापता हुए, जिनके शव बाद में मिलते रहे। व्यवस्था को लेकर प्रशासन की नाकामी के कारण यह हादसा हुअा।

    - 30 की क्षमता वाले नाव में 60 लोग सवार हो गए थे। बीच नदी में नाव दो टुकड़े होकर गंगा में समा गई थी।

आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Patna

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×