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सरस्वती मां के प्रति ऐसी आस्था कि टीचर बनने के बाद भी बनाते हैं मूर्ति

आंबेडकर चौक में दलित बस्ती के बगल में शिक्षक मिंटू कुमार बच्चे को नि:शुल्क पढ़ाने का काम करते है।

Dainik Bhaskar

Jan 22, 2018, 07:23 AM IST
Special Story on Vasant Panchami and Saraswati Pooja

छपरा. मन में सच्ची मेहनत और लगन हो तो किसी भी कार्य को करने में समय बाधा नहीं डाल सकती।दृढ़ संकल्प के आगे पूरी कायनात झुक जाती है। यह कहानी चरितार्थ हो रही है दिघवारा के नवसृजित प्राथमिक मध्य विद्यालय मिल्की के स्कूल के शिक्षक मिंटू कुमार पर।मिंटू कुमार दिघवारा के आंबेडकर चौक निवासी श्रीराम जी पंडित के बेटे हैं। 19 फरवरी 2014 से नवसृजित प्राथमिक स्कूल मिल्की में शिक्षक के पद पर भी कार्यरत हैं।

10 वर्ष की उम्र में बनाई थी पहली मूर्ति

अपने पिता श्री रामजी पंडित और दादा को मूर्ति बनाते देख मिंटू कुमार पहली बार 1998 में खेल-खेल में ही एक सरस्वती माता की मूर्ति बनाए थे। मूर्ति इतनी खूबसूरत थी कि आस-पास के लोग उस मूर्ति को देखकर उसे ही खरीदने की डिमांड करने लगे। उसके बाद फिर क्या था?उसके बाद से उन्होंने अपने भीतर छिपी इस प्रतिभा को आगे बढ़ाया और आज 20 वर्षों से मूर्ति बना रहे हैं। 5 वर्ष पहले सरकारी स्कूल में शिक्षक की नौकरी भी लग गई। जिसके बाद भी रात्रि में जागकर मूर्ति बनाने का काम करते है।

मां सरस्वती की कृपा से लगी नौकरी
कुम्हार जाति के मंटू मां सरस्वती के भक्त हैं। मां की प्रति अटूट आस्था भी है। उनकी मानना है कि मां सरस्वती की कृपा से ही उन्हें सरकारी शिक्षक की नौकरी मिली है, और घर के सभी सदस्य आज खुशहाल हैं। मिंटू के यहां छोटे-छोटे बच्चे भी मूर्ति बनाने में उनका सहयोग कर रहे हैं। इस वर्ष भी डेढ़ माह में 50 से ज्यादा मां सरस्वती की मूर्तियां बना डाली है।

नि:शुल्क कोचिंग भी पढ़ाते हैं
आंबेडकर चौक में दलित बस्ती के बगल में शिक्षक मिंटू कुमार बच्चे को नि:शुल्क पढ़ाने का काम करते है। बदले में वे बच्चों से कोई शुल्क नहीं लेते है। उद्देश्य है कि ज्यादा से ज्यादा लोग शिक्षा ग्रहण कर विकास करें। 5 वर्षों से दिन में बच्चे को पढ़ाते हैं और रात्रि में घर पर मूर्ति को गढ़ने का काम करते हैं।

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