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यहां पुलिस पर पथराव, आधा दर्जन जवान चोटिल, एक महिला कांस्टेबल घायल

अतिक्रमण हटाने गए पुलिस बल के जवानों सहित अधिकारियों ने जेसीबी से महादलितों की झोपड़ियां उजाड़ दीं।

Danik Bhaskar | Jan 16, 2018, 06:07 AM IST

सहरसा. 1 एकड़ 15 डिसमिल भूमि से अतिक्रमण हटाने सोमवार को सुपौल से पहुंचे पुनर्वास पदाधिकारी के साथ बड़ी संख्या में पहुंची पुलिस पर आक्रोशित महादलितों ने ईंट-पत्थर से हमला कर दिया। इस हमले में आधा दर्जन जवानों को चोटें आई हैं, जबकि एक महिला कांस्टेबल गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना सोमवार सुबह 11 बजे की है।

इधर, बड़ी संख्या में अतिक्रमण हटाने गए पुलिस बल के जवानों सहित अधिकारियों ने जेसीबी से महादलितों की झोपड़ियां उजाड़ दीं। इस कारण आक्रोशित महादलितों का कहना था कि पुनर्वास कार्यालय की ओर से ही बंदोबस्ती की गई जमीन पर इस ठंड में उनका घर उजाड़ा गया है।


डाॅक्टर की पुलिस से हुई नोक-झोंक


घायल जूही के उपचार के बाद पुलिस के पदाधिकारियों और आपातकालीन कक्ष में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के बीच झड़प हो गई। घायल जूही कुमारी को आपातकालीन कक्ष लाया गया, जहां ड्यूटी पर मौजूद डा एसपी विश्वास से लाइन डीएसपी सुनील कुमार ने रोगी को डिस्चार्ज या रेफर कर देने के लिए कहा, ताकि किसी निजी नर्सिंग होम में उसकी अच्छी तरह इलाज हो सके। डा विश्वास भड़क उठे और कहा कि आपकी इच्छा से रोगी को रेफर या डिस्चार्ज नहीं करूंगा।

महिला कांस्टेबल के सिर पर मारी ईंट

महिषी थाना के तेघड़ा गांव स्थित पुनर्वास की जमीन को खाली कराने के लिए महिषी थाना और सहरसा पुलिस लाइन से पुलिस बलों को सोमवार की सुबह भेजा गया। जेसीबी के साथ पुलिस वालों को देखकर अतिक्रमणकारी उग्र हो गए और पुलिस बल पर बांस फठ्ठे और ईंट के टुकड़ों से हमला कर दिया। हमले में एक महिला कांस्टेबल जूही कुमारी के सिर पर ईंट फेंका गया, जिससे वह बुरी तरह घायल होकर घटनास्थल पर ही गिर पड़ी। जूही को साथी महिला कांस्टेबलों ने उठाया, जिसे इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचाया गया।

महिला सहित 5 को किया गिरफ्तार

अतिक्रमण हटाने गई पुलिस पर पथराव और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में पुलिस ने एक महिला सहित पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें फुलेन्द्र पासवान, समोल सादा, वकील सादा आशीष सादा, तथा महिला रूवा देवी शामिल हैं। घटना को लेकर पुनर्वास पदाधिकारी के फर्द बयान पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।

16 लोगों को दिया गया था जमीन का पट्‌टा


पुनर्वास पदाधिकारी चंदन कुमार ने बताया कि अस्थायी बंदोबस्ती के तौर पर पुनर्वास के लिए एक साल के लिए जमीन पर खेती करने का प्रावधान है। इसके तहत 16 लोगों को जमीन का पट्टा दिया गया था। खेती के बदले पट्टेदारों ने जमीन पर कब्जा कर स्थायी घर बना लिया। तेघरा निवासी राजन सादा ने लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष परिवाद दायर कर पट्टेदार पर अवैध कब्जा की शिकायत की थी। पट्टेदार को लगातार नोटिस किया गया लेकिन एक भी घर खाली नहीं हुआ। सीओ के नेतृत्व में इससे पूर्व पट्‌टेदारों के साथ बैठक भी की गई, लेकिन लोगों ने घर हटाने से इंकार कर दिया।