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गुजरात में हैं बिल्डर, बचपन की गरीबी को याद कर कर रहे गरीब बच्चों की मदद

करीब 2500 गरीब और असहाय बच्चों को स्कूल बैग, कॉपी, किताब और उनके फीस की व्यवस्था कर चुके हैं।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 29, 2018, 06:05 AM IST

  • गुजरात में हैं बिल्डर, बचपन की गरीबी को याद कर कर रहे गरीब बच्चों की मदद

    मोतिहारी.यहां के राजेश्वर शर्मा इन दिनों असहाय छात्रों और गरीब लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। वजह है इनके द्वारा गरीब और पिछड़े तबके के बच्चों की पढ़ाई के लिए खर्च उठाना, उन्हें पठन-पाठन की सामग्री देना, तेज बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहयोग देना तथा गांव के गरीब लोगों को मुफ्त में शौचालय बनवा कर देना। समाजसेवी शर्मा का बचपन बड़े ही कठिन दौर से गुजरा है लेकिन आज सफलता के शिखर को छूते हुए गुजरात की सन्टेक बिल्डर्स के मालिक के रूप में वे लगातार समाजसेवा के क्षेत्र में अपना कदम बढ़ाते जा रहे हैं।

    गांव में बच्चे को गोबर पर गिरी किताब उठाते देख मदद करने की मिली प्रेरणा

    शर्मा के अनुसार गत वर्ष जब वे अपने गांव आए तो एक बच्चा जो अपनी गोबर पर गिरी किताब उठा रहा था, जिसे देखकर उनके मन में अपना बचपन कौंध गया क्योंकि उसके पास किताब रखने के लिए अपना बैग नहीं था। यहीं से वे छात्रों को आगे बढ़ाने और पढ़ाने के लिए संकल्पित हो गए। गांव के कुछ बेरोजगार मेधावी युवकों को इकट्ठा कर अविलंब नवयुवक संघ की स्थापना कर छात्रों का कायाकल्प शुरू कर दिया। अब तक लगभग 2500 गरीब और असहाय बच्चों को स्कूल बैग, कॉपी, किताब, पेन, पेंसिल और पढ़ने के लिए शुल्क की व्यवस्था निजी तौर पर कर चुके हैं। साथ ही उन्होंने सभी के बीच यह संकल्प भी किया है कि जो भी छात्र उच्च शिक्षा लेना चाहते हैं और गरीबी उनके आड़े आ रही है तो वे निःसंकोच आकर उनसे पढ़ाई का पूरा खर्च ले सकते हैं।

    12 सौ परिवारों को दे रहे शुद्ध पानी

    मधुबनी स्थित अपने गांव में उनके द्वारा गत एक साल से आरओ प्लांट की स्थापना कर लगभग 12 सौ परिवारों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही दिन हीन और लाचार परिवारों को 20-20 हजार की लागत से शौचालय बनवाकर भी दिया गया है। राजेश्वर ने कहा कि यदि सरकारी तौर पर थोड़ी सी सहायता मिल जाए तो प्रखंड में निजी कोष से शौचालय बनवा देंगे।

    होटलों में बर्तन मांज और दैनिक मजदूरी कर पाई शिक्षा और सफलता

    राजेश्वर ने बताया कि घर की माली हालत खस्ताहाल होने के कारण दसवीं से ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई मोतिहारी कचहरी के पास होटलों में बर्तन मांजकर एलएनडी महाविद्यालय से पूरी की और उसके बाद गुजरात में दैनिक मजदूरी पर कई वर्षों तक कार्य किया। अपने अदम्य साहस और कठिन परिश्रम के कारण आज सन्टेक बिल्डर्स जैसी कम्पनी जो गुजरात में निर्माण की दुनिया का सम्मानित नाम है का संचालक होने का गौरव प्राप्त है।


    विद्यालयों के बच्चों को देंगे पाठ्य सामग्री :समाजसेवी का संकल्प है कि इसी वर्ष में ही प्रखंड के सभी सरकारी या गैर सरकारी विद्यालयों में पढ़नेवाले असहाय बच्चों को पठन-पाठन की सभी सामग्री उनके द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। इस कार्य में जो भी लोग कंधा लगाना चाहे, उनको सहर्ष स्वीकार किया जाएगा।

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Web Title: Story Of Man Helping Poor Children
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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