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पटना यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट यूनियन इलेक्शन, किया नॉमिनेशन, ऐसे दिखे सपोर्टर्स

पीयू छात्रसंघ चुनाव की घोषणा के बाद से ही संभावित प्रत्याशियों ने तैयारी शुरू कर दी थी।

Danik Bhaskar | Feb 09, 2018, 06:08 AM IST

पटना. पटना यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट यूनियन इलेक्शन में गुरुवार का दिन रंगीन रहा। व्हीलर सीनेट हॉल में चल रही नॉमिनेशन प्रॉसेस के आखिरी दिन गुरुवार को कुल 160 कैंडिडेट ने नॉमिनेशन कराया। सेंट्रल पैनल के 5 पदों के लिए 71 नॉमिनेशन आए, जिसमें सबसे अधिक 18 कैंडिडेट्स ने प्रेसिडेंट के लिए परचा दाखिल किया है। जबकि उपाध्यक्ष के लिए 16, महासचिव के लिए 12, संयुक्त सचिव के लिए 11 और कोषाध्यक्ष के लिए 14 स्टूडेंट्स ने नामांकन फाॅर्म जमा किया है।

वहीं रिप्रेजेंटेटिव के लिए सबसे अधिक नामांकन फैकल्टी ऑफ सोशल साइंस की दो सीटों के लिए 13 विद्यार्थियों ने किया है। जबकि पटना वीमेंस कॉलेज में रिप्रेजेंटेटिव के चार पदों के लिए सिर्फ चार छात्राओं ने नामांकन किया है। यानी यहां चुनाव नहीं होना तय हो गया है। इस संबंध में छात्रसंघ चुनाव के मुख्य पदाधिकारी प्रो. पीके पोद्दार ने बताया कि अब 9 फरवरी को सभी नामांकन पत्रों की स्क्रूटिनी होगी। 10 फरवरी को नामांकन वापसी का वक्त तय है। इसी दिन उम्मीदवारों की अंतिम सूची भी जारी की जाएगी।

छात्र संगठनों ने गुरुवार को नामांकन के आखिरी दिन शक्ति प्रदर्शन किया। सुबह 10 बजे से नामांकन प्रक्रिया व्हीलर सीनेट हॉल में शुरू हुई। कैंपस में उम्मीदवारों के अलावा किसी समर्थक को प्रवेश की अनुमति नहीं थी, इसलिए छात्र संगठनों ने अशोक राजपथ पर ही अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया। जुलूस की शक्ल में आए छात्र संगठनों के प्रतिनिधि नामांकन करने पहुंचे। नारेबाजी और जीत के विश्वास के साथ पहुंचे प्रतिनिधियों का जमावड़ा व्हीलर सीनेट हॉल के बाहर दोपहर 3 बजे तक लगा रहा।

छात्रसंघ चुनाव में भाग लेने के लिए तय नामांकन प्रक्रिया ने छात्र संगठनों को परेशान किया। छात्र संगठनों की लापरवाही का आलम यह रहा कि दोपहर तीन बजे तक नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने की डेडलाइन थी और कुछ उम्मीदवार चार बजे के बाद भी कागजात जुटाने की बात कहते हुए नामांकन की अनुमति मांगते दिखे। इससे पहले किसी ने अपना एफिडेविट छोड़ दिया तो किसी के पास मैट्रिक का सर्टिफिकेट नहीं था। छूटे कागजात को जमा करने में उम्मीदवार और उनके समर्थकों के पसीने छूटते रहे।

जेएसीपी और एआईएसएफ को मिली बढ़त

पटना वीमेंस कॉलेज (पीडब्ल्यूसी) में कॉलेज रिप्रेजेंटेटिव के चार पद हैं, जिसके लिए सिर्फ चार आवेदन ही आए। इसलिए अब यहां चुनाव नहीं होना तय हो गया। अगर चारों उम्मीदवारों का नामांकन स्क्रूटिनी में रद्द नहीं होता है तो ये चारों ही पटना वीमेंस कॉलेज से कॉलेज रिप्रेजेंटेटिव होंगे। इसमें पहली बार छात्रसंघ चुनाव में भाग ले रही जन अधिकार छात्र परिषद (जेएसीपी) को बड़ा फायदा मिल रहा है। क्योंकि जिन चार छात्राओं ने पीडब्ल्यूसी से नामांकन किया है उसमें मानसी सिन्हा और मदीहा जावेद जेएसीपी से हैं। जिस कॉलेज से एबीवीपी, छात्र जदयू, छात्र राजद, एनएसयूआई, छात्र लोजपा जैसे पुराने छात्र संगठन भी प्रत्याशी नहीं ढूंढ़ पाए, जेएसीपी ने ढूंढ लिया। इसके अलावा लेफ्ट यूनिटी के लिए भी फायदे वाली स्थिति है क्योंकि पीडब्ल्यूसी में शेष दो सीटों पर सपना कुमारी और प्रगति प्रकाश एआईएसएफ से हैं।

सेंट्रल पैनल में एक चौथाई उम्मीदवार हैं छात्राएं

पुसू चुनाव-2018 में सेंट्रल पैनल के पांच पदों के लिए कुल 71 उम्मीदवारों ने नामांकन किया है। इसमें लगभग एक चौथाई छात्राएं हैं। हालांकि महासचिव पद पर नामांकन करने वाले 12 उम्मीदवारों में कोई भी छात्रा नहीं है। जबकि अध्यक्ष पद के लिए आए 18 में से 4, उपाध्यक्ष के लिए 16 में से पांच, संयुक्त सचिव पद के लिए 11 में से दो और कोषाध्यक्ष पद पर 14 में से पांच उम्मीदवार छात्राएं हैं।

पुसू चुनाव ने तोड़ दी संगठनों की एकता

पीयू छात्रसंघ चुनाव की घोषणा के बाद से ही संभावित प्रत्याशियों ने तैयारी शुरू कर दी थी। एबीवीपी इस बार नामांकन के आखिरी दिन तक अपने उम्मीदवार तय नहीं कर सका। दोपहर तक एबीवीपी अपनी पहली पसंद को अध्यक्ष पद पर नामांकन कराने का प्रयास करता रहा लेकिन चुनाव शर्तों पर खरा नहीं उतरने के कारण ऐसा नहीं हो सका। इसके साथ एबीवीपी के जिला संयोजक दिव्यांशु भारद्वाज ने विद्रोह कर दिया और अध्यक्ष पद के लिए नामांकन कर दिया। वहीं एक टूट छात्र जदयू में भी हुई। छात्र जदयू के प्रधान महासचिव रहे मनीष यादव ने भी छात्र जदयू के पैनल से अलग महासचिव पद के लिए नामांकन कर दिया है। मनीष यादव के नामांकन से छात्र जदयू और छात्र राजद के कई विक्षुब्ध छात्रनेता दिखे।